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हमारे दिल के पास होता है अपना दिमाग; कठिन परिस्थिति में स्वयं लेता है फैसले, वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला खुलासा

अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी (Yale University, America) के वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाली खोज की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे दिल (Heart) के पास भी अपना एक 'दिमाग' है, जो आकार में छोटा होता है।
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भारत

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Vinay Shakya

Jul 25, 2026

heart has a brain

सांकेकित इमेज (सोर्स- Gemini)

मानव शरीर में हृदय अभिन्न अंग है। शरीर का यह अंग पूरे जीवन भर बिना रुके काम करता रहता है। हृदय न सिर्फ खून पंप करता है, बल्कि खुद की धड़कनों को नियंत्रित करने और तनाव की स्थितियों में खुद को बचाने की क्षमता भी रखता है। हाल ही में अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी (Yale University, America) के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे दिल के पास अपना एक 'छोटा दिमाग' या 'लिटिल ब्रेन' मौजूद है, जिसे इंट्रिंसिक कार्डिएक नर्वस सिस्टम (ICNS) कहा जाता है।

यह नर्वस सिस्टम मुख्य मस्तिष्क के इंतजार के बिना स्थानीय स्तर पर फैसले लेता है। वैज्ञानिकों की यह खोज sciencedirect.com वेबसाइट पर प्रकाशित हुई है। हृदय के पास मौजूद नर्वस सिस्टम (ICNS) की खोज येल यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंस विभाग ने की है। येल न्यूरोसाइंस विभाग की शोधार्थी जे. शू. कियान और एसोसिएट प्रोफेसर रुई चांग के नेतृत्व में यह खोज की गई है। शोध टीम ने हृदय के दो प्रकार के न्यूरॉन्स की पहचान की है, जो हृदय के कार्य और तनाव के दौरान उसकी सहनशीलता के लिए आवश्यक हैं। शोध टीम ने हृदय की कोशिकाओं के मात्र 0.01% हिस्से वाले इस नेटवर्क को विस्तार से समझा है, जो हृदय रोगों के इलाज में क्रांति ला सकता है।

रिसर्च में क्या मिला?

शोध में पता चला कि हृदय का अपना नर्वस सिस्टम (ICNS) होता है। नर्वस सिस्टम की खोज हृदय के चारों ओर फैले वसायुक्त ऊतकों (Fat pads) में ये स्थित है। यह नर्वस सिस्टम न सिर्फ मस्तिष्क से आने वाले संकेतों को सिर्फ रिले नहीं करता, बल्कि उसको समझकर हृदय की धड़कन की गति, रक्त प्रवाह और अन्य कार्यों को कंट्रोल भी करता है। येल यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंस विभाग की शोधार्थी कियान जे. शू. कियान और एसोसिएट प्रोफेसर रुई चांग के नेतृत्व वाली टीम ने जेनेटिक रूप से संशोधित चूहों पर यह अध्ययन किया है।

रिसर्च में नया खुलासा

शोधकर्ताओं ने सिंगल-सेल RNA सीक्वेंसिंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर ICNS के न्यूरॉन्स का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि लगभग 1000 न्यूरॉन्स वाले इस सिस्टम में दो प्रमुख सब-टाइप्स हैं, जो अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं। ये दोनों प्रकार के न्यूरॉन्स शारीरिक रूप से भी अलग-अलग जगहों पर पाए जाते हैं। इन न्यूरॉन्स के प्रोजेक्शन्स (संबंध) अलग हैं। NPY+ एट्रिया के आगे के भाग में और DDAH1+ पीछे के भाग में अधिक सक्रिय होते हैं। यह खोज हृदय को केवल पंपिंग मशीन मानने वाली पुरानी सोच को चुनौती देती है।

ICNS को पहले मुख्य रूप से पैरासिम्पेथेटिक रिले स्टेशन माना जाता था, लेकिन नया शोध दिखाता है कि यह स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। इसके अलावा हृदय-मस्तिष्क संवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ICNS सिस्टम गैंग्लियनेटेड प्लेक्सी (Ganglionated plexi) के रूप में संगठित है, जो हृदय के एट्रिया पर मोतियों की माला की तरह फैला होता है।

खास न्यूरॉन्स: NPY+ और DDAH1+ की भूमिका

NPY+ न्यूरॉन्स (Neuropeptide Y expressing): ये न्यूरॉन्स मुख्य रूप से वैगस नर्व (vagal input) से संकेत प्राप्त करते हैं। ये हृदय की धड़कन की गति को नियंत्रित करते हैं और पैरासिम्पेथेटिक प्रभाव डालते हैं। इन्हें सक्रिय करने से हृदय गति कम होती है। यदि इन्हें हटा दिया जाए तो चूहों में हार्ट फेलियर हो जाता है और कुछ दिनों में मृत्यु हो जाती है। ये कोरोनरी परफ्यूजन (रक्त प्रवाह) को भी प्रभावित करते हैं।

DDAH1+ न्यूरॉन्स : DDAH1 (Dimethylarginine dimethylaminohydrolase 1 expressing) सिम्पेथेटिक इनपुट प्राप्त करते हैं। सामान्य स्थिति में इनका प्रभाव कम दिखता है, लेकिन तनाव की स्थिति में ये हृदय की सुरक्षा करते हैं। इन्हें हटाने पर चूहों में ब्लड प्रेशर मापते समय या एपिनेफ्रीन-कैफीन जैसी तनाव वाली स्थिति में अचानक हृदय गति गिरकर मृत्यु हो जाती है। ये न्यूरॉन्स विद्युतीय स्थिरता बनाए रखते हैं और मेलिग्नेंट एरिदमिया (घातक अनियमित धड़कन) से बचाते हैं।

क्या होगा फायदा?

नए शोध के बाद मरीजों को फादा हो सकता है। नई शोध हृदय रोगों के इलाज में नई राह खोल सकता है। वर्तमान में हार्ट फेलियर, एरिदमिया, सडन कार्डियक अरेस्ट और तनाव से संबंधित हृदय समस्याओं का इलाज मुख्य रूप से मस्तिष्क-केंद्रित दवाओं या डिवाइसेज से होता है। अगर इंसानों में भी यही तंत्र काम करता है तो लक्षित थेरेपी संभव हो सकती है। भविष्य में ICNS को सीधे सक्रिय या मॉड्यूलेट करके हृदय की धड़कनों को नियंत्रित करने वाले उपचार विकसित किए जा सकते हैं। हालांकि, यह तंत्र संभावित है, क्योंकि ICNS सभी स्तनधारियों में मौजूद है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूरोमॉडुलेशन टेक्नोलॉजी जैसे- ऑप्टोजेनेटिक्स या इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन, विशिष्ट न्यूरॉन प्रकारों को टारगेट कर सकती हैं। इससे साइड इफेक्ट्स कम होंगे और इलाज अधिक प्रभावी होगा। रुई चांग के अनुसार, हृदय को हर हालत में कार्यशील रखना जरूरी है। अगर पंप रुक गया तो मौत निश्चित है। यह शोध पार्किंसंस, ऑटोनॉमिक डिसऑर्डर्स और सूजन संबंधी बीमारियों में भी नए संकेत दे सकता है, क्योंकि ऑर्गन-इंट्रिंसिक नर्वस सिस्टम शरीर के कई अंगों में मौजूद हैं।

ICNS की अवधारणा नई नहीं है। पिछले दशकों में शोधकर्ताओं ने इसे 'लिटिल ब्रेन ऑन द हार्ट' कहा है, लेकिन इसकी सटीक भूमिका और सब-टाइप्स अब स्पष्ट हुए हैं। यह एंटेरिक नर्वस सिस्टम (आंतों का दूसरा दिमाग) की तरह काम करता है, लेकिन हृदय की जरूरतों के अनुसार विशेष रूप से अनुकूलित है। यह खोज हृदय स्वास्थ्य में तनाव प्रबंधन के महत्व को भी रेखांकित करती है।

इलाज में होगी सुविधा

आधुनिक जीवनशैली में लगातार तनाव हृदय रोगों का प्रमुख कारण है। DDAH1+ न्यूरॉन्स की भूमिका समझने से तनाव-प्रेरित हृदय समस्याओं के नए उपचार विकसित हो सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि आगे के अध्ययनों में इंसानी हृदय के सैंपल्स पर और काम करने की जरूरत है। फिलहाल, चूहों पर सफलता मिली है, लेकिन मानव ट्रायल्स में समय लगेगा।

नए खोज से स्पष्ट है कि हमारे शरीर की संरचना बेहद जटिल है। शरीर में हृदय न सिर्फ मस्तिष्क का गुलाम है, बल्कि खुद का निर्णय लेने वाला स्मार्ट सिस्टम रखता है। येल यूनिवर्सिटी की इस खोज से हृदय रोगों से पीड़ित करोड़ों लोगों को नई उम्मीद जगी है। भविष्य में 'दिल का दिमाग' को समझकर हम स्वस्थ जीवन की नई दिशा तय कर सकते हैं।