
जयपुर। राजधानी का प्रतिष्ठित अल्बर्ट हॉल संग्रहालय अपनी प्राचीन धरोहर और दुर्लभ संग्रह के कारण पर्यटकों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों पर्यटक पहुंचते हैं।

अल्बर्ट हॉल में प्रदर्शित ममी मिस्र के अखमीन क्षेत्र की महिला 'तूतू' की है, जिसे वर्ष 2011 में एक्स-रे करवाकर संरक्षित स्थिति में सार्वजनिक तौर पर रखा गया।

ममी के बाहरी आवरण पर मिश्र की पंखयुक्त भृंग आकृति और चार आत्माओं के प्रतीक भी उकेरे गए हैं, जो उस काल की धार्मिक मान्यताओं को दर्शाते हैं। बता दें कि ममी प्राचीन शहर पैनोपोलिस के अखमीन से मिली थी।

संग्रहालय में 1632 की प्रसिद्ध चारबाग शैली की कालीन भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। यह कालीन ईरान के किरमान क्षेत्र में बनी थी और आमेर के महलों के लिए मिर्जा राजा जयसिंह के शासनकाल में खरीदी गई थी।

प्रदर्शनी में चौथी से लेकर 12वीं शताब्दी तक की मूर्तियां संग्रहालय की ऐतिहासिकता को और गहराई देती हैं। गणेश, महिषासुरमर्दिनी, शिव परिवार, दशावतार, नवग्रह सहित जैन तीर्थंकरों की महत्वपूर्ण प्रतिमाएं भी यहां मौजूद हैं।

अल्बर्ट हॉल का निर्माण 1876 में प्रिंस ऑफ वेल्स, अल्बर्ट एडवर्ड के जयपुर आगमन के बाद आरंभ हुआ और वर्ष 1887 में यह पूर्ण रूप से तैयार हो गया।

इमारत की वास्तुकला हिंद-ईरानी शैली पर आधारित है। बरामदों और गलियारों में भित्ति चित्रों और ऐतिहासिक प्रतिकृतियों की सजावट इसकी कलात्मकता को और बढ़ाती है।