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Albert Hall: अल्बर्ट हॉल की ममी का रहस्य, 322 ईसा पूर्व की ‘तूतू’ क्यों है सबसे बड़ा आकर्षण, टिक जाती है सबकी नजर

Albert Hall Museum: जयपुर का प्रतिष्ठित अल्बर्ट हॉल संग्रहालय अपनी मिस्र की 322 ईसा पूर्व की संरक्षित ममी और दुर्लभ पुरावस्तुओं के कारण पर्यटकों के बीच खास आकर्षण बना हुआ है।

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Albert Hall Museum

जयपुर। राजधानी का प्रतिष्ठित अल्बर्ट हॉल संग्रहालय अपनी प्राचीन धरोहर और दुर्लभ संग्रह के कारण पर्यटकों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों पर्यटक पहुंचते हैं।

Albert Hall Museum

अल्बर्ट हॉल में प्रदर्शित ममी मिस्र के अखमीन क्षेत्र की महिला 'तूतू' की है, जिसे वर्ष 2011 में एक्स-रे करवाकर संरक्षित स्थिति में सार्वजनिक तौर पर रखा गया।

Albert Hall Museum

ममी के बाहरी आवरण पर मिश्र की पंखयुक्त भृंग आकृति और चार आत्माओं के प्रतीक भी उकेरे गए हैं, जो उस काल की धार्मिक मान्यताओं को दर्शाते हैं। बता दें कि ममी प्राचीन शहर पैनोपोलिस के अखमीन से मिली थी।

Albert Hall Museum

संग्रहालय में 1632 की प्रसिद्ध चारबाग शैली की कालीन भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। यह कालीन ईरान के किरमान क्षेत्र में बनी थी और आमेर के महलों के लिए मिर्जा राजा जयसिंह के शासनकाल में खरीदी गई थी।

Albert Hall Museum

प्रदर्शनी में चौथी से लेकर 12वीं शताब्दी तक की मूर्तियां संग्रहालय की ऐतिहासिकता को और गहराई देती हैं। गणेश, महिषासुरमर्दिनी, शिव परिवार, दशावतार, नवग्रह सहित जैन तीर्थंकरों की महत्वपूर्ण प्रतिमाएं भी यहां मौजूद हैं।

Albert Hall Museum

अल्बर्ट हॉल का निर्माण 1876 में प्रिंस ऑफ वेल्स, अल्बर्ट एडवर्ड के जयपुर आगमन के बाद आरंभ हुआ और वर्ष 1887 में यह पूर्ण रूप से तैयार हो गया।

Albert Hall Museum

इमारत की वास्तुकला हिंद-ईरानी शैली पर आधारित है। बरामदों और गलियारों में भित्ति चित्रों और ऐतिहासिक प्रतिकृतियों की सजावट इसकी कलात्मकता को और बढ़ाती है।