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करंट लगने पर 28 साल के किसान को गर्दन तक रेत में दफनाया; ट्रेडिशनल थेरेपी की वजह से गई किसान की जान

UP News: करंट लगने पर 28 साल के किसान को गर्दन तक रेत में दफनाया गया। ट्रेडिशनल थेरेपी की वजह से किसान की मौत हो गई। जानिए पूरा मामला क्या है?

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Pilibhit News

पीलीभीत में किसान को गर्दन तक रेत में दफनाया। फोटो सोर्स-Ai

UP News: बिजली का करंट लगने से गंभीर रूप से झुलसे 28 साल के एक व्यक्ति को उसके परिवार और ग्रामीणों ने गर्दन तक रेत में दफना दिया। इस उम्मीद में व्यक्ति को दफनाया गया कि 'पारंपरिक चिकित्सा' (Traditional Therapy) बिजली के झटके को अवशोषित कर लेगी और उसे ठीक कर देगी। जब शख्स की हालत बिगड़ने लगी, तो उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

मामले में SDM ने क्या कहा?

घटना शुक्रवार सुबह पीलीभीत जिले के पूरनपुर कोतवाली थाने के अंतर्गत लुकटिहाई गांव की बताई जा रही है। पूरनपुर के SDM अजीत प्रताप सिंह ने कहा कि दाताराम बांस काट रहा था। इस दौरान ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली की लाइन से छू गया और उसे करंट लग गया और बाद में उसकी मौत हो गई, क्योंकि उसके परिवार वाले उसे तुरंत अस्पताल नहीं ले गए।

जर्जर फूस की छत वाले घर में रहता था किसान

एसडीएम सिंह ने कहा कि अगर मृतक किसी कृषि भूमि का मालिक पाया गया, तो उसके परिजनों को केंद्र सरकार की किसान बीमा दुर्घटना योजना के तहत 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। दाताराम बेहद गरीबी में जी रहे थे और अपनी पत्नी रेशमा देवी, दो बेटों प्रदीप और अंशुल और बेटी वंदना के साथ एक जर्जर फूस की छत वाले घर में रहते थे।

गरीब होने के बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर नहीं दिया गया था। एसडीएम सिंह ने कहा कि वे उन कारणों की गहन जांच करेंगे कि दाताराम को सरकारी योजना के तहत घर क्यों नहीं दिया गया और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।