पीलीभीत। कई माह की खामोशी के बाद एक बार फिर बाघ ने इंसानो पर हमला शुरू कर दिया है। यहॉ पीलीभीत टाइगर रिजर्व की दियूरिया रेंज में बाघ ने एक युवक को अपने मुहॅ का निवाला बनाया है। युवक का शव काफी खोजबीन करने के बाद जंगल में करीब 3 किलो मीटर अंदर मिला। ग्रामीणो की सूचना पर टाइगर रिजर्व और पुलिस टीम की टीम ने शव को जंगल के अंदर से बाहर निकाला। वहीं बात टाइगर रिजर्व की सुरक्षा की भी उठती है कि जब वनक्षेत्र के अंदर जाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है तो फिर कैसे ग्रामीण जंगल के अंदर जाकर लकडी व दैनिक भोजन में प्रयोग आने वाले फल-फूल खोजने पहुॅच जाते है। टीम ने शव को सील कर उसे पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है। चूंकि घटना प्रतिबंधित वनक्षेत्र के अंदर की है इसलिये किसी भी तरह के मुआवजे़ का कोई प्रावधान नहीं है।
प्रतिबंधित वनक्षेत्र में गया था धरती के फूल ढूंढने
बताया जा रहा है कि दियूरिया कोतवाली क्षेत्र के गांव सिमराया का रहने वाला 26 वर्षीय लक्ष्मण प्रसाद बीते दिन मंगलवार को जंगल के अंदर धरती के फूल ढूंढने गया था, लेकिन देर रात तक जब वो वापस नहीं आया तो सुबह गांववाले उसे ढूंढने के लिये जंगल की ओर गये। जब वे जंगल में करीब 3 किलोमीटर जंगली नाला पार कर पहुॅचे तो उन्होने वहॉ लक्ष्मण का शव देखा। शव देखते ही परिजनों और गांववालो में रोना-पीटना शुरू हो गया। सूचना जैसे ही गांव पहुॅची तो गांव भी महिलाएं भी जंगल किनारे पहुॅच गयी। इसके बाद ग्रामीणों ने बाघ के हमले में उनके गांव के लक्ष्मण की मौत होना दियूरिया कोतवाली पुलिस को बताया। सूचना मिलते ही पुलिस ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व के वनाधिकारियो को इसकी सूचना दी और संयुक्त रूप से जंगल में जाकर शव को बाहर निकाला। बाघ ने पहले तो लक्ष्मण पर हमला कर उसे मार गिराया फिर बाद में उसके शरीर के कुछ अंग भी खाये।
पोस्टमार्टम को भेजा शाहजहॉपुर, नहीं मिलेगा मुआवज़ा
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की दियूरिया रेंज के जंगल का कुछ हिस्सा पडोसी जनपद शाहजहॉपुर के बंडा थाना क्षेत्र में भी आता है। सीओ बीसलपुर प्रवीन मलिक ने बताया कि मृतक रहने वाला तो पीलीभीत का है लेकिन जिस जगह यह घटना हुयी है वो जनपद शाहजहॉपुर के बंडा थाना क्षेत्र में आती है इसलिये शव को पोस्टमार्टम के लिये शाहजहॉपुर भेजा गया है। टाइगर रिजर्व के एसडीओ प्रवीण खरे ने बाघ के हमले की पुष्टि करी है उन्होने बताया कि मृतक जंगल के गया था जहॉ बाघ ने हमला कर उसे मार दिया। क्योंकि घटना प्रतिबंधित वनक्षेत्र के अंदर की है इसलिये मुआवज़ा देने का कोई प्रावधान नहीं है।
टाइगर रिजर्व की गश्त पर फिर उठे सवाल
पीलीभीत टाइगर रिजर्व का जंगल प्रतिबंधित है यहॉ बिना आज्ञा जंगल के अंदर जाना मना है। ऐसे में कभी लकडकट्टे लकडी काटने पहुॅच जाते है, तो कोई कटरूआ बीनने या फिर जंगली साग-सब्ज़ी-कंदफूल। प्रश्न यह उठता है कि आखिर जंगल के आसपास के रहने वाले गश्त होने के बावजूद भी कैसे जंगल के अंदर प्रवेश कर लेते है और फिर जंगली जानवर का शिकार बन जाते है। कहीं ना कहीं इसके लिये टाइगर रिजर्व भी दोषी है।