
After PM Modi All-party Meeting With Jammu Kashmir Leaders, Centre Calls Ladakh-Kargil Parties on July 1
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों के साथ पीएम मोदी की सर्वदलीय बैठक के बाद अब केंद्र सरकार ने लद्दाख और कारगिल के राजनीतिक दलों व सिविल सोसाइटी के सदस्यों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। इन सभी से एक जुलाई को नई दिल्ली में बातचीत की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में उनके आवास पर 1 जुलाई को सुबह 11 बजे होने वाली बैठक में पूर्व सांसदों और नागरिक समाज के सदस्यों को भी आमंत्रित किया गया है।
फिलहाल, इस बैठक को लेकर भी कोई एजेंडा नहीं बताया गया है, लेकिन बीते गुरुवार को पीएम के साथ हुई कश्मीर के नेताओं के साथ सर्वदलीय बैठक के नतीजों को देखते हुए समझा जा रहा है कि उसी संदर्भ में चर्चा की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर में परिसीमन और चुनाव पर हुई चर्चा
मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को चार पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित जम्मू-कश्मीर के 14 राजनीतिक नेताओं के साथ साढ़े तीन घंटे की लंबी बैठक की अध्यक्षता की थी। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के परिसीमन और फिर लोकतंत्र की बहाली के लिए सफल चुनाव कराने पर केंद्र सरकार ने जोर दिया था।
बैठक के बाद एक ट्वीट करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था “हम जम्मू-कश्मीर के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जम्मू और कश्मीर के भविष्य पर चर्चा की गई और संसद में किए गए वादे के अनुसार, परिसीमन अभ्यास और शांतिपूर्ण चुनाव कराकर राज्य का दर्जा बहाल करने में यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।"
बता दें कि, 5 अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद केंद्र सरकार और मुख्यधारा के जम्मू-कश्मीर के राजनेताओं के बीच यह पहली बैठक थी।
'लद्दाख पर गुप्कर गठबंधन को बोलने का अधिकार नहीं'
जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ पीएम मोदी की मुलाकात से पहले लद्दाख से भाजपा सांसद जामयांग त्सेरिंग नामग्याल ने एक ट्वीट करते हुए कहा था कि गुपकार गठबंधन के पास लद्दाख के लोगों की ओर से बोलने का अधिकार नहीं है।
18 अगस्त 2019 को लद्दाख के प्रमुख नेताओं ने केंद्र से अपनी पहचान बनाए रखने के लिए इस क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची के तहत एक आदिवासी क्षेत्र घोषित करने का आग्रह किया। नामग्याल ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा को पत्र लिखा, जिसमें कहा गया कि लद्दाख ज्यादातर आदिवासी क्षेत्र है, जिसमें आदिवासियों की आबादी 98 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, "लद्दाख में आदिवासी समुदाय अपनी पहचान, संस्कृति, भूमि और अर्थव्यवस्था की रक्षा के बारे में सबसे अधिक चिंतित है क्योंकि केंद्र ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के अपने फैसले की घोषणा की है।" अपने लोगों के हितों को संरक्षित करने के लिए नामग्याल ने अनुरोध किया कि संघ जनजातीय मामलों के मंत्री ने संविधान की छठी अनुसूची के तहत इसे आदिवासी क्षेत्र घोषित किया।
संविधान की छठी अनुसूची में स्वायत्त जिला और क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना के बाद असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन का प्रावधान है। छठी अनुसूची जिसमें 21 अलग-अलग लेख हैं और जो अनुच्छेद 244(2) और 275(1) पर आधारित है।
Updated on:
26 Jun 2021 08:24 pm
Published on:
26 Jun 2021 07:51 pm
