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BJP-JDU में गतिरोध से RJD को मिल गया चुनावी सदमे से उबरने का मौका?

नीतीश कुमार की सियासी साख पर उठने लगे हैं सवाल आरजेडी को मिला चुनावी हार के सदमे से उबरने का मौका अब तो भाजपा-जेडीयू के नेता एक-दूसरे के कार्यक्रमों से बनाने लगे दूरी

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नई दिल्‍ली। लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद से कांग्रेस सहित अधिकांश क्षेत्रीय पार्टियां बैकडोर में चली गईं थीं। लेकिन मोदी कैबिनेट 2.0 में सांकेतिक भागीदारी की बात सीएम नीतीश कुमार को इस कदर नगवार लगी कि बिहार एनडीए में सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया। एनडीए नेता भले ही इसे बड़ी बात न मानें, पर ऐतिहासिक हार से सदमे में घर बैठे आरजेडी नेताओं को इससे सियासी जीवनदान मिल गया है। अब आरजेडी नेताओं ने एनडीए के खिलाफ हमलावर रुख अख्तियार कर लिया है।

चचा की नीयत पर उठे सवाल

गतिरोध की बात को तूल उस समय से मिला जब मोदी कैबिनेट 2.0 में जेडीयू के शामिल होने से बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने इनकार कर दिया। इससे नाराज नीतीश ने 72 घंटे के अंदर बिहार कैबिनेट का विस्‍तार कर जेडीयू के आठ विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल कर पीएम मोदी को करारा जवाब दिया।

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बात यहीं नहीं रुकीं। रविवार को जेडीयू द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में भाजपा नेता शामिल नहीं हुए तो उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी द्वारा आयोजित इफ्तार में जेडीयू के एक भी नेता शामिल नहीं हुए। इसका सीधा असर यह हुआ कि लोकसभा चुनाव में आरजेडी की ऐतिहासिक हार के बाद खाना छोड़ने वाले लालू के खेमे में खुशी की लहर है। तेजस्‍वी एक बार फिर कहने लगे हैं, चचा एक बार फिर पलटी मारने वाले हैं।

तेजस्‍वी यादव: बदजुबान लोगों का गैंग है एनडीए

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के लिए एनडीए में सियासी गतिरोध सोने पे सुहागा जैसा है। ऐसा इसलिए क्योंकि लोकसभा चुनाव में एक भी सीट न मिलना आरजेडी की अब तक की सबसे बड़ी हार है। आरजेडी की इस हार के बार लालू यादव ने खाना तक छोड़ दिया था। वहीं, आरजेडी नेता महेश्‍वर यादव ने तो तेजस्‍वी यादव के इस्‍तीफा न देने पर पार्टी में विद्रोह की बातें तक कह दी थीं।

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लेकिन एनडीए बिहार में जारी असंतोष तेजस्‍वी यादव व अन्‍य आरजेडी नेताओं को इन राजनीतिक झंझावातों से बाहर निकलने के मामले में संजीवनी साबित हुआ है। इसका लाभ उठाते हुए तेजस्‍वी यादव ने एनडीए को बदजुबान नेताओं का गैंग करार दिया है। उन्‍होंने कहा कि भगवान जाने ये कैसे अपने-अपने हाथों में पीठ पीछे खंजर लिए एक-दूसरे की आंख में आंख डाल बनावटी बात करते होंगे?

डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह: मोदी के खिलाफ सबको एकजुट होना होगा

लालू यादव के करीबी और आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह ने इन सियासी घटनाक्रमों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बड़ा ऑफर दिया है। उनका ये ऑफर आरजेडी के नीतीश के साथ दोबारा गठबंधन को लेकर पार्टी की नीतियों के उलट है।

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यह माना जा रहा है कि रघुवंश ने बयान दिया है तो उसके पीछे जरूर कोई बात है। रघुवंश प्रसाद सिंह ने बताया है कि हालात अब ऐसे बन गए हैं कि सबको एकजुट होना होगा। नीतीश कुमार को भी वापस महागठबंधन में आ जाना चाहिए।
अगर भाजपा को भगाना है, तो सभी गैर भाजपा दलों एक साथ आना होगा। साथ ही इस बात का भी जिक्र किया कि राजनीति में कोई दोस्त या दुश्मन नहीं होता है। राजद नेता ने कहा कि तेजस्वी प्रसाद यादव ने स्टांप पेपर पर लिखा है कि नीतीश कुमार नहीं आ सकते। ये सब कहने की बात नहीं है।

मनोज झा: बिहार की जनता से विश्‍वासघात

राजद के प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि हालांकि यह भाजपा-जेडीयू का आंतरिक मसला है लेकिन इस बात से दोनों के बीच सत्‍ता में हिस्‍सेदारी को लेकर जारी गतिरोध और उठापटक से साफ है कि दोनों ने बिहार के लोगों के साथ विश्वासघात किया है। यही कारण है कि जनता को इन दोनों दलों के बीच राजनीतिक तनाव का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

तारिक अनवर: भाजपा ने सिखाया सबक

एनसीपी से कांग्रेस में वर्षों बाद लौटे तारिक अनवर ने बिहार एनडीए पर निशाना साधा है। उन्‍होंने कहा है कि मोदी कैबिनेट 2.0 में जेडीयू के न होने से साफ है कि दोनों दलों के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। ऐसे में नीतीश कुमार एक बार फिर नए सियासी विकल्‍प की तलाश कर सकते हैं।

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नीतीश कुमार ने भाजपा को सही सबक सिखाया है। उन्होंने मोदी कैबिनेट से जेडीयू को बाहर रखने और बिहार कैबिनेट विस्‍तार करके केंद्र सरकार को करारा जवाब दिया है। आने वाले समय में नीतीश कुमार भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। उन्होंने पहले ही संकेत दे दिया है कि उनके पास अन्य विकल्प भी हैं।

उपेंद्र कुशवाहा: भाजपा विश्‍वासघात के लिए रहे तैयार

जेडीयू नेता नीतीश कुमार की वजह से एनडीए से अलग होने के लिए मजबूर किए गए आरएलएसपी नेता उपेंद्र कुशवाहा ने भाजपा को सचेत करते हुए कहा कि अब वो नीतीश कुमार से दूसरे विश्वासघात के लिए तैयार रहें।

नीतीश कुमार: परेशानी की बात नहीं

बता दें कि जेडीयू प्रमुख और बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने 30 मई को पीएम मोदी कैबिनेट का हिस्‍सा बनने के लिए इनकार कर दिया था। उन्‍होंने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मीडिया से कहा था कि भाजपा ने सांकेतिक प्रतिनिधित्‍व का प्रस्‍ताव रखा था जिसे हमने खारिज कर दिया है।

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उन्‍होंने कहा था कि यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। हम एनडीए में हैं और बिल्कुल भी परेशान नहीं हैं। हम साथ काम कर रहे हैं। कोई भ्रम नहीं है। हम कैबिनेट में आनुपातिक प्रतिनिधित्‍व चाहते हैं। इसके बाद उन्‍होंने सियासी दांव चलकर अपने कैबिनेट में जेडीयू के 8 मंत्रियों को शामिल कर लिया जो भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

सुशील मोदी: मंत्रिमंडल में शामिल होने का ऑफर था

दो मई को नीतीश मंत्रिमंडल के विस्तार में भाजपा के शामिल नहीं होने को एनडीए में खींचतान से जोड़कर देखे जाने को उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने पूरी तरह से खारिज कर चुके हैं।

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उन्‍होंने ट्वीट कर साफ किया था कि भाजपा को मंत्रिमंडल में शामिल होने का ऑफर आया था। पार्टी ने भविष्य में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल होने का निर्णय लिया है। बता दें कि लोकसभा चुनावों में बिहार एनडीए ने क्लीन स्वीप करते हुए 40 में से 39 सीटें जीतने में सफलता हासिल की।