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एनआरसी पर बोले सीएम सोनोवाल, कांग्रेस के 40 साल पर भाजपा के दो साल भारी

55 हजार अधिकारियों व कनिष्ठ कर्मचारियों ने दो साल तक वारफुट पर दिन-रात काम किया।
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cm sonowal

एनआरसी पर बोले सीएम सोनोवाल, काम कांग्रेस 40 पर भाजपा का दो साल भारी

नई दिल्‍ली। आज असम में राष्‍ट्रीय नागरिकता रजिस्‍टर (एनआरसी) का दूसरा और अंतिम ड्राफ्ट जारी हो गया। इसके साथ ही विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने जो एनआरसी को लागू करने का प्रदेश की जनता से वादा किया था उसे सीएम सर्बानंद सोनोवाल ने दो साल में पूरा कर दिखाया है। कुछ दिनों पहले वह जब दिल्‍ली आए तो उनसे असम के ज्‍वलंत मुद्दे पर पत्रिका.कॉम के विशेष संवाददाता ने बातचीत की। उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंशः

वारफुट पर हुआ काम

भाजपा के युवा नेता और असम के सीएम सर्बादानंद सोनोवाल ने बातचीत के क्रम में बताया कि पिछले दो साल के दौरान हमारी सरकार ने पीएम मोदी के नेतृत्‍व में बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने का काम वारफुट पर काम किया। इस बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में सीएम सीएम ने कहा कि नेशनल रिकॉर्ड्स ऑफ रजिस्‍ट्रेशन (एनआरसी) के वादे को पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुरूप बखूबी अंजाम दिया। एनआरसी की पहली सूची पहले ही जारी की जा चुकी है। दूसरी सूची आज जारी हो गई है। फाइनल सूची में दो करोड़ 89 लाख लोगों भारत का नागरिक माना गया है। 40 लाख लोगों को फिलहाल भारतीय नागरिक नहीं माना गया है। एनआरसी के काम को तय समय में पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश और निर्धारित गाइडलाइन के तहत 55 हजार अधिकारियों व कनिष्ठ कर्मचारियों ने दो साल तक वारफुट पर दिन-रात काम किया। तब जाकर यह काम पूरा हुआ है। मैं, आपको बता दूं कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर 40 साल तक प्रदेश की जनता को ठगने का काम किया। इसके उलट भाजपा सरकार ने दो साल में ये काम पूरा कर दिखाया है। इस काम को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए केंद्र सरकार वित्तीय सहायता मुहैया कराने का काम किया। राज्‍य सरकार की जिम्‍मेदारी स्थानीय स्तर पर सभी तरह की सुविधाएं मुहैया कराने की थी।

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नाम दर्ज कराने का दिया जाएगा एक अवसर
सीएम सोनोवाल ने बताया कि अगर असम के मूल निवासियों में से किसी को लगता है कि उनका नाम दूसरी सूची में भी शामिल नहीं है या उन्हें इस सूची में कोई कमी है तो इन कमियों दूर करने के लिए वो एलसीआर ऑफिस में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ऐसे लोगों को सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए नियमानुसार जरूरी दस्तावेज जमा कराने होंगे। ये दस्तावेज उन्हें एलसीआर ऑफिस में कराने होंगे। इसके लिए एक सितंबर से 30 सितंबर तक का समय निर्धारित किया गया है। इसके बाद किसी भी व्‍यक्ति को अपनी नागरिकता साबित करने का अवसर नहीं दिया जाएगा। जो लोग फाइनल लिस्‍ट के खिलाफ एलसीआर ऑफिस में नागरिकता का दावा करेंगे उनकी शिकायत को सरकार द्वारा गठित फॉरेन ट्रिब्यूनल के समक्ष रखा जाएगा। ट्रिब्यूनल एनआरसी से जुड़े दावों के निपटान के लिए सुप्रीम बॉडी है। इस ट्रिब्यूनल को हर दावे को नियमानुसार सबूतों के आधार पर निरस्त करने या स्वीकार करने का अधिकार है। फॉरेन ट्रिब्यूनल की ओर से दावा स्वीकार होने पर याचिकाकर्ता का नाम एनआरसी में करने का प्रावधान है।

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डिलिशन, डिटेंशन और डिपोर्टेशन की कार्रवाई
सीएम ने बताया कि जहां तक चिन्हित 40 लाख अवैध भारतीय की हैं तो फॉरेन ट्रिब्यूनल के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए घुसपैठियों को डिटेन किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुरूप अवैश बांग्‍लादेशियों का नाम मतदाता सूची, राशन कार्ड, आधार कार्ड सूची व अन्य सरकारी दस्‍ताजों से रद्द करने का काम किया जाएगा। चिन्हित बांग्लादेशी घुसपैठिए को वापस बांग्लादेश भेजने का काम किया जाएगा। उन्‍होंने बताया कि एनआरसी एक लंबी और जटिल प्रकिया वाला काम है। पहले तो मतदाता सूची में मूल असमियां लोगों का नाम को चिन्हित किया जा रहा है। उसके बाद गैर कानूनी रूप से असम में रहने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों को बांग्लादेश वापस भेजने का काम किया जाएगा। इसके लिए बांग्लादेशियों को डिटेन कर रखने के लिए एक परिसर भी तैयार किया जाएगा। भारत सरकार को बांग्लादेश के साथ प्रत्यर्पण संधि करने होंगे। प्रत्र्यपण संधि के अनुरूप उन्हें बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया जाएगा।

कांग्रेस ने लोगों का ठगने का काम किया
भाजपा से शासनकाल से पहले के 40 वर्षों तक कांग्रेस की सरकारें लोगों से वादा करती रहीं लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। कांग्रेस की सरकारों ने इस काम को जानबूझकर लटकाए रखा ताकि उसका वोट बैंक कमजोर न पड़े। यह हाल तब है जब 2004 से लेकर 2014 तक देश के पीएम पद पर डॉ. मनमोहन सिंह पीएम रहते हुए असम से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व किया था। उन्‍होंने दस साल तक पीएम रहते हुए असम की चिंता वहां के लोगों का प्रतिनिधि होते हुए भी नहीं किया। परिणाम यह निकला कि पिछले कुछ दशकों में कई जिलों में मूल असमियां लोग अल्पसंख्यक श्रेणी में आ गए। यह सब जानते हुए कांग्रेस सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।

चार साल 29 बार पीएम मोदी ने असर का दौरा किया
भाजपा सरकार सत्ता में आते ही चार दशक से ज्यादा समय से लंबित इस काम को अपने हाथों में लिया और इसका निस्तारण प्राथमिकता के स्तर पर हो रहा है। 2014 में पीएम और प्रदेश में मई 2016 में असम में भाजपा सरकार बनने के बाद से इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। असम की समस्याओं को दूर करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी पिछले चार सालों में 29 बार असम का दौरा कर चुके हैं। जबकि कांग्रेस के 60 साल के कार्यकाल में उनके सभी भी इतनी बार असम का दौरा नहीं किया। इतना ही नहीं पीएम ने सभी केंद्रीय मंत्रियों को रोटेशन के आधार पर हर 15 दिन पर असम दौरा करने और विकास कार्यों की समीक्षा के साथ समस्याओं का समाधान निकालने का निर्देश दे रखा है।

लोगों को केंद्र प्रायोजित योजनाओं का मिला लाभ
सेनोवाल ने बताया कि असम में केंद्र सरकार की जन धन योजना, उज्जवला योजना, स्किल डेवलपमेंट योजना, बैंबो रिसर्च सेंटर, पीएम आवास योजना, मुद्रा योजना, स्टार्टअप योजना के तहत कई अन्य महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम जारी है। केवल उज्जवला योजना के तहत ही दस लाख ज्यादा गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन मुहैया कराने का काम किया गया है। इसी तरह केंद्र की परियोजना के तहत प्रदेश को सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल, परिवहन, संचार व अन्य नागरिक सुविधाओं का विकास प्रदेश में हुआ है। असम इनवेस्टर्स समिट के माध्यम से एक लाख करोड़ रुपए के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ हैं। 2,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश पिछले तीन महीनों के अंदर हुआ। रतन टाटा ग्रुप ने असम में कैंसर अस्पताल और कैंसर रिसर्च सेंटर विकसित करने के लिए एक हजार करोड रुपए से अधिक का निवेश किया है। रिटेल चेन के किशोर बियानी की कंपनी, ब्रिटानिया और बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि ने बड़े पैमाने पर निवेश किया।

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