महज 28 की उम्र में Ahmed Patel बने थे सांसद, अपनी खास विशेषता के चलते कांग्रेस नेताओं में बनाई थी अलग पहचान

  • Ahmed Patel कई मौकों पर कांग्रेस के लिए बने संकटमोचक
  • नाराज नेताओं को अपनी मुस्कान और मृदुभाषा से कर देते थे संतुष्ट
  • गठबंधन पार्टियों से संवाद कायम कर मनाने में थे माहिर

By: धीरज शर्मा

Published: 25 Nov 2020, 09:44 AM IST

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा अहमद पटेल ( Ahmed Patel ) का बुधवार तड़के निधन हो गया। वे कोरोना पॉजिटिव थे और कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। अहमद पटेल के निधन पर कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। यही वजह है कि सोनिया गांधी से लेकर राहुल और प्रियंका समेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जताया है। दरअसल कांग्रेस को मजबूत बनाने में अहमद पटेल का अहम योगदान रहा। उनकी मुस्कान और मृदुभाषी विशेषता ने कांग्रेस को एकजुट रखने में बड़ी भूमिका निभाई।

अहमद पटेल का जन्म गुजरात के भरूच जिले के पिरामण गांव में 21 अगस्त 1949 को हुआ था। उनके पिता सामाजिक कार्यों से जुड़े थे। अहमद पटेल छात्र जीवन में ही कांग्रेस पार्टी के छात्र विंग 'यूथ कांग्रेस' से जुड़ गए थे। कम उम्र में ही अहमद पटेल ने कांग्रेस के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था, अपने राजनीतिक जीवनकाल में उन्होंने कई बार कांग्रेस बड़े संकटों से भी उबारा। यही नहीं नाराज नेताओं को मनाने में भी अहमद पटेल माहिर थे।

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28 की उम्र में बने सांसद
अहमद पटेल ने पहला लोकसभा चुनाव 1977 में भरूच सीट से लड़ा था। खास बात यह है कि उस दौरान इमरजेंसी के चलते कांग्रेस को लेकर लोगों खासी नाराजगी थी, बावजूद इसके अहमद पटेल ने चुनाव में 62 हजार से ज्यादा मतों से जीता। यही नहीं इस दौरान उनकी उम्र महज 28 थी। यानी युवा अहमद ने कांग्रेस के खिलाफ माहौल के बीच जीत कर कांग्रेस के लिए शुरुआत में सकारात्मक माहौल तैयार कर दिया।

इसके बाद पटेल ने 1980 और 1984 में भी भरूच सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। हालांकि, 1989 में उन्हें हार मिली और फिर वे बाद में राज्य सभा के लिए चुन लिए गए। इस बीच 1986 में वे गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने।

सलाहकार से लेकर संवाद तक अहम रोल
अहमद पटेल का कांग्रेस में काफी अहम रोल रहा। वे ना केवल सोनिया के सलाहकार थे, बल्कि गठबंधन पार्टियों के बीच संवाद कायम रखने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 2004 से 2014 तक अहमद पटेल ने मनमोहन सिंह सरकार के बीच बड़ी भूमिका निभाई।

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मुस्कान से मुश्किल करते आसान
कॉरपोरेट से लेकर नेताओं तक उनकी अच्छी पहुंच थी। अपनी मुस्कान और मृदुभाषी स्वभाव से अहमद पटेल ने कांग्रेस के साथ-साथ अन्य नेताओं में अपनी अलग पहचान बनाई थी। कांग्रेस नेताओं की मानें तो पार्टी में नाराज नेताओं को संतुष्ट करने में अहमद पटेल बड़ी भूमिका निभाते थे। अपनी मुस्कान से वे कितना भी नाराज होकर कोई नेता आलाकमान तक पहुंचा हो उसे संतुष्ट कर के ही भेजते थे।

इन मामलों में कांग्रेस को दी मजबूती
अहमद पटेल ने कई मामलों में कांग्रेस को मजबूती दी। नाराज नेताओं को संतुष्ट करने से लेकर बड़े संकटों का साया पटेल ने अपने तेज तर्रार दिमाग से इन्हें बखूबी सुलझाया।
मनमोहन सिंह सरकार के समय भले ही 2G स्पेक्ट्रम ऑक्शन स्कैम का मामला हो या फिर जुलाई-2008 में भारत-अमरीका न्यूक्लियर डील के दौरान लेफ्ट पार्टियों का यूपीए को छोड़ने का प्रकरण, अहमद पटेल ने पर्दे के पीछे से सरकार को बचाने में बड़ा रोल निभाया।

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गुजरात में बीजेपी को मात
अहमद पटेल ने अपनी राजनीतिक सोच चलते बीजेपी को उसके ही गढ़ में मात दी। दरअसल गुजरात में 2017 में हुए राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल ने बीजेपी को राजनीति के ऐसे दांव पेंच दिखाए कि वो भी चारों खाने चित हो गई।
बीजेपी मजबूत स्थिति के बावजूद अहमद पटेल को जीतने से नहीं रोक पाई।

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धीरज शर्मा
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