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Coronavirus: तबलीगी जमात के मरकज को लेकर मुस्लिमों पर निशाना साधना गलत – उमर अब्दुल्ला

सोशल मीडिया पर मुसलमानों को ट्रोल करने पर भड़के उमर अब्दुल्ला जमात के कार्यक्रम के बहाने मुसलमानों को कोरोना का दोषी ठहराना गलत देश में तबलीगी जमात के मरकज से हजारों लोगों पर मंडराया कोरोना का साया
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नई दिल्ली

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Dhirendra Kumar Mishra

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Updated: 1 Apr 2020, 11:56 AM IST

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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के आदेश और लॉकडाउन के बावजूद निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के मरकज ( Nizamuddin Tablighi Jamaat Markaj ) में 2 हजार से ज्यादा लोगों का शामिल होना विवाद का विषय बन गया है। विवाद का विषय इसलिए कि मरकज में शामिल लोगों में से कुछ कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इस घटना के बाद से देशभर के लोगों पर कोरोना का संकट ( Corona Crisis ) पहले से ज्यादा गहरा गया है। इस मसले को हिंदू- मुस्लिम के नजरिए से भी देखा जाने लगा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया पर जारी बहस में अब जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ( Omar Abdullah ) भी कूद पड़े हैं।

उन्होंने ट्वीट कर बताया है कि कोरोना वायरस ( coronavirus ) फैलाने का दोष मुस्लिमों पर नहीं मढ़ा जाना चाहिए। इस कार्यक्रम के बाद कुछ लोग ऐसा कहने लगे हैं कि मुस्लिमों ने ही कोरोना को पैदा किया और पूरी दुनिया में फैला दिया।

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जम्मू-कश्मीर ( Jammu-Kashmir ) के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने अपने ट्वीट में लिखा है कि अब कुछ लोगों के लिए तबलीगी जमात का कार्यक्रम मुस्लिमों को दोषी ठहराने के लिए सबसे आसान बहाना बन जाएगा। ताकि वे हर जगह मौजूद मुस्लिमों को दोषी ठहरा सकें। जैसे मुस्लिमों ने ही कोरोना पैदा किया हो और पूरी दुनिया में फैला दिया हो। जबकि देश के अधिकांश मुसलमानों ने लॉकडाउन ( Lockdown ) का ठीक उसी तरह पालन किया है जिस तरह किसी और ने किया।

उमर अब्दुल्ला ने तबलीगी जमात के बहाने सोशल मीडिया पर मुस्लिमों को ट्रोल किए जाने को गलत करार दिया है। इस मुद्दे पर उन्होंने कई ट्वीट किए हैं।

बता दें कि 13 से 15 के दौरान दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के मरकज में 2 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। इसमें अलग—अलग राज्यों और विदेश से 1830 और दिल्ली एनसीआर के 5 सौ ज्यादा लोग शामिल हुए। इनमें से कुछ लोग कोरोना पीड़ित पाए गए। उसके बाद से तबलीगी जमात का यह कार्यक्रम सुर्खियों में है।

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जानकारी के मुताबिक तेलंगाना, कश्मीर, अंडमान और अन्य स्थानों पर मरने वालों के कई लोग निजामुद्दीन मरकज में शामिल हुए थे। यहीं वजह है कि लोग सोशल मीडिया पर मुसलमानों को ट्रोल करने लगे हैं, जिसे उमर अब्दुला ने गलत माना है। ट्रोल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा है कि सभी मुसलमानों को इसके लिए निशाने पर नहीं लिया जा सकता।