
क्या बिहार में 'लालूवाद' से हार गया नीतीश का 'महादलितवाद'?
नई दिल्ली। लगातार दो उपचुनावों में हार के बाद पीएम मोदी के क्रेज को लेकर ही नहीं बल्कि बिहार के विकास पुरुष और महादलितवाद के नायक सीएम नीतीश कुमार की साख को भी बट्टा लगा है। जोकीहाट विधानसभा सीट पर जेडीयू प्रत्याशी की हार के बाद से लोग कहने लगे हैं कि क्या बिहार में नीतिश कुमार का दौर अब अवसान की ओर है। इस चर्चा को तेजस्वी यादव के ट्वीट से और बल मिला है। आपको बता दें कि लालू यादव से नीतीश कुमार ने जो 2017 में विश्वासघात किया था उसे लोग अभी तक हजम नहीं कर पाए हैं। राजद से संबंध विच्छेद को बिहार के लोग जनादेश का अपमान मान बैठे हैं। यही वजह है कि नीतिश को अब उनके समकक्ष राजद प्रमुख लालू यादव नहीं, बल्कि राजनीति में उनके नवजात पुत्र तेजस्वी एक के बाद एक चुनाव में उन्हें मात दे रहे हैं। इसे बिहार में तेजस्वी यादव के उदय एरा माना जाने लगा है। आपको बता दें कि इससे पहले अररिया उपचुनाव में भी तेजस्वी ने नीतीश कुमार को हराने में कामयाबी हासिल की थी।
तेजस्वी के सामने कमजोर पड़े नीतीश
दरअसल, 2017 में बिहार में राजनीतिक स्तर पर दो बड़ी घटनाएं हुईं। एक यह कि नीतिश कुमार ने राजद से नाता तोड़कर भाजपा के सहयोग से सरकार में बने रहे। दूसरी बात यह कि रेलवे घोटाला, चारा घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के मामले में नए सिरे से सीबीआई, ईडी व अन्य एजेंसियों को उनके पीछे छोड़ दिया गया। लालू के कद को दबाने के लिए उठाए गए इन कदमों की वजह से लालू यादव रांची के बिरसा मुंडा खुला कारागार में रहने के बाद अब जमानत पर जेल से बाहर हैं। ऐसे में राजद को लीड करने की जिम्मेदारी अचानक तेजस्वी को संभालनी पड़ी। इस जिम्मेदारी को तेजस्वी राजनीति में नया होने के बावजूद बखूबी अंजाम दे रहे हैं। इस बीच उन्होंने एमवाई फार्मूले के साथ नीतिश के महादलित के फार्मूले को पंचर करने के लिए हम के जीतन राम मांझी को अपने पक्ष में साध लिया। साथ ही बिहार दलितों में अपनी पहुंच बनाई और नीतिश देखते रह गए। इतना ही नहीं उन्होंने अपने पिता से अलग सवर्णो के प्रति भी बदले रुख का संकेत दिया है। लेकिन तेजस्वी के इन सभी प्रयासों को नीतिश हल्के में लेते रहे कि राजनीति का यह नवजात शिशु कुछ नहीं कर पाएगा। अब यही सोच उनके लिए उल्टा पड़ने लगा है।
तेजस्वी ने ट्वीट में क्या कहा?
आरजेडी के उभरते सितारे तेजस्वी ने जोकीहाट सीट पर जीत मिलने के बाद अपने ट्वीट में लिखा है कि ये अवसरवाद पर लालूवाद की विजय है। लालू एक विचार है, विज्ञान है। उन्हें समझने में नीतीश कुमार को कई जन्म लेने पड़ेंगे। अवसरवादिता के लिए इतिहास कभी नीतीश कुमार को माफ नहीं करेगा। नीतीश कुमार को पलटी मारने और जनादेश को अपमानित करने का नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई दिनों तक चुनाव क्षेत्र में थे, इसके बाद भी जेडीयू प्रत्याशी हार गए। यह बहुत बड़ा झटका है। इस बार जनता ने जनादेश का अपमान करने वालों को सबक सीखा दिया है। जो लोग जहर फैलाते थे उनको सबक सिखाया गया है। हमने मोहब्बत और अमन चैन की बात की इसे जनता ने स्वीकार किया। जदयू के सारे दावे को यहां की जनता ने फेल कर दिया।
जेडीयू को मिली बड़े अंतर से हार
आपको बता दें कि जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र का गठन 1969 में हुआ था। तब से अबतक यहां 14 बार चुनाव हो चुके हैं, जिनमें नौ बार तस्लीमुद्दीन परिवार का कब्जा रहा है। पांच बार खुद मो. तस्लीमुद्दीन विधायक चुने गए हैं, जबकि चार बार उनके पुत्र सरफराज ने भी जीत दर्ज की है। यह सीट सरफराज के इस्तीफा के बाद खाली हुई है। इसी साल मार्च में जदयू विधायक सरफराज आलम विधानसभा एवं पार्टी से इस्तीफा देकर राजद के टिकट पर अररिया से सांसद चुने जाने के बाद जोकीहाट विधानसभा सीट खाली हुई है। सरफराज के पिता मो. तस्लीमुद्दीन राजद के सांसद थे, जिनका निधन पिछले साल सितंबर में हो गया था। पिता के निधन के बाद खाली हुई सीट से सरफराज राजद के टिकट पर सांसद बने हैं। इस बार तसलमुद्दीन परिवार के आरजेडी प्रत्याशी शहनवाज अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जेडीयू उम्मीदवार मोहम्मद मुर्शीद आलम को 41,225 वोटों से हराया। आरजेडी उम्मीदवार शहनवाज को 81240 वोट जबकि जेडीयू उम्मीदवार मुर्शिद आलम को 40015 वोट मिले।
Published on:
01 Jun 2018 08:22 am
बड़ी खबरें
View Allराजनीति
ट्रेंडिंग
