30 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जम्मू-कश्मीरः वैद की छुट्टी पर चढ़ा सियासी पारा, उमर अब्दुल्ला ने जल्दबाजी पर उठाए सवाल

1987 बैच के आईपीएस अफसर दिलबाग सिंह कैसे बनाई अपनी पहचान। पुलिसकर्मियों और उनके रिश्तेदारों को अगवा करने की बढ़ती घटनाओं के बीच शांति कायम रखना उनके लिए बड़ी चुनौती।

2 min read
Google source verification
dilbagh

जम्मू-कश्मीरः वैद की छुट्टी पर चढ़ा सियासी पारा, उमर अब्दुल्ला ने जल्दबाजी पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में एसपी वैद को हटाकर दिलबाग सिंह को राज्य का नया डीजीपी बनाने के बाद सियासी पारा गर्मा गया है। गृहमंत्रालय के इस फैसले पर पीडीपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सवाल खड़े किेए हैं। पूर्व सीएम अब्दुल्ला ने राज्य के पुलिस चीफ के ट्रांसफर को जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया है। उमर ने ट्वीट के जरिये सवाल उठाया है कि वैद के ट्रांसफर में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई।

एसपी वैद को ऐसे समय हटाया गया है जब कुछ दिन पहले ही घाटी में आतंकियों ने 3 पुलिसकर्मियों और अन्य पुलिसकर्मियों के 8 परिजनों को अगवा किया था और जिनकी रिहाई के बदले आतंकियों के गिरफ्तार परिजनों को छोड़ा गया। ऐसे में उमर ने ट्वीट कर कहा कि वैद के ट्रांसफर में इतनी जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए थी। स्थायी इंतजाम होने पर ही यह तबादला किया जाना चाहिए था।

निजाम के बदलते ही जम्‍मू-कश्‍मीर के डीजीपी पर गिरी गाज, हटाए गए एसपी वैद

भाजपा पर निशाना
प्रदेश में विधानसभा भंग होने के बाद से भाजपा सरकार बनाने की जोड़-तोड़ में लगी है। ऐसे में जब राज्यपाल सत्यपाल मलिक की नियुक्ति की गई तो अटकलें तेज हो गईं कि वे बीजेपी और पीडपीप के बीच पुल का काम करेंगे। उनके स्वागत में जिस तरह फारूक अब्दुल्ला ने गर्मजोशी दिखाई थी उससे इन अटकलों को और हवा मिली थी। लेकिन उमर अब्दुल्ला लगातार भाजपा विरोधी बयान देकर इस संभावना को खारिज करते रहे हैं। एसपी वैद पर कार्रवाई भी इसी सिक्के का एक पहलू माना जा रहा है।

ऐसे चर्चा में आए दिलबाग
दिलबाग सिंह का नाम इस साल उस वक्त भी चर्चा में आया था, जब श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह हॉस्पिटल के अंदर लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने हमला कर एक पाकिस्तानी आतंकवादी अबु हंजूला उर्फ नावीद जट को छुड़ा लिया था। इस हमले में दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। फरवरी 2018 में हुई इस घटना के बाद 1987 बैच के आईपीएस अफसर दिलबाग सिंह को अगले ही महीने जेल विभाग का डीजी नियुक्त किया गया था।

दिलबाग ने किया कैदियों पर काम
दिलबाग सिंह ने बतौर डीजी जेल अपने कार्यकाल के दौरान कई मोर्चों पर अपनी कार्यकुशलता से अलग पहचान बनाई है। इसमें राज्य की जेलों के अंदर कैद आतंकियों को लेकर उन्होंने नई रणनीति पर काम किया। इसमें घाटी के कई खूंखार आतंकियों की जेल बदलने जैसे कदम भी शामिल हैं। हालांकि यूपीएससी से मुहर लगने के बाद ही उनकी डीजीपी पद पर नियमित नियुक्ति होगी।

आपको बता दें कि दिलबाग सिंह को अभी डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार मिला है। पिछले हफ्ते ही दक्षिण कश्मीर में आतंकियों ने एक दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों और उनके रिश्तेदारों को अगवा कर लिया था। ऐसे में उनके सामने बड़ी चुनौती है।