
बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनाव का प्रचार अपने पीक पर है। ऐसे में विभिन्न राजनीतिक दल और उम्मीदवार मतदाताओं को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। वहीं एक ऐसा भी दल है, जिसने राज्य की एक बड़ी आबादी वाले वर्ग को ही नकार दिया है। यहां बात कर रहे भारतीय जनता पार्टी की। दरअसल, बीजेपी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में एक भी मुस्लिम को अपना उम्मीदवार नहीं बनाया है, जबकि राज्य में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत 11 से 15 के बीच है।
60 सीटों पर मुस्लिमों का प्रभाव
बीजेपी की इस नीति के चलते कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दल जहां फायदा उठाने के प्रयास में जुटे हैं, वहीं राजनीतिक जानकार इस बार मुस्लिमों की मानसिकता समझ नहीं पा रहे हैं। असल में राज्य की 60 सीटों पर मुस्लिमों का प्रभाव सबसे अधिक है। राज्य में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत 11 से 15 के बीच बताया जाता है। यही कारण है की अधिकांश राजनीतिक दल इन सीटों पर मुस्लिम वोटरों को लुभाने में लगे हैं। राज्य में कांग्रेस ने 17 और जेडीएस ने 20 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देकर मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में आने का संकेत दिया है।
मुस्लिम मतदाता के पास नहीं विकल्प
इसके साथ ही बीजेपी ने किसी मुस्लिम को उम्मीदवार बनाने से परहेज किया है। हालांकि राज्य में मुस्लिम मतदाता साइलेंट मोड में नजर आ रहे हैं। आलम यह है कि तटवर्ती कर्नाटक के मुस्लिम आबादी वाले जिलों में मुस्लिम वोटर्स खुलकर सामने आने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में मुस्लिम मतदाताओं ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही को लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। वहीं, राजनीतिक जानकारों की मानें तो कर्नाटक में मुस्लिम मतदाताओं के पास अधिक विकल्प नहीं हैं। पारंपरिक तौर पर माना जा रहा है कि मुस्लिम यहां बीजेपी की विरोधी दोनों पार्टियों कांग्रेस और जेडीएस में से एक को ही चुनेंगे।
Published on:
06 May 2018 02:26 pm
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