
नई दिल्ली। देश की दोनों बड़े राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा के लिए कर्नाटक का रण प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है। वजह साफ है जो इस रण को भेदने में कामयाब होगा वो लोकसभा को भी फतह करने का प्रबल दावेदार होगा। कर्नाटक का किंग कौन होगा इसके लिए रुझान आना भी शुरू हो गए हैं। शुरुआती रुझान में कांग्रेस को बढ़त मिलती दिख रही है, हालांकि भाजपा भी कांग्रेस से ज्यादा पीछे नहीं है। यानी टक्कर जो है वो कांटे की दिख रही है। शायद यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने लिए बैकअप प्लान भी तैयार कर लिया है।आईए जानते हैं कांग्रेस का बैकअप प्लान...
गोवा और मणिपुर में हुई कांग्रेस की किरकिरी तो आप सभी को याद होगी। इतिहास खुद को न दोहराए इसलिए कांग्रेस ने पहले ही अपनी कमर कस ली है। कांग्रेस कर्नाटक में जोखिम मोल लेने के मूड में नहीं है और शायद यही वजह है कि उसने बैकअप प्लान बनाया है। इसके तहत कांग्रेस ने अपने दो वरिष्ठ नेताओं अशोक गहलोत और गुलाम नबी आजाद को बेंगलूरू भेज दिया है।
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हालांकि कांग्रेस को पूरी उम्मीद है उनकी पार्टी को जनता पूर्ण बहुमत देगी। लेकिन पिछले कुछ दिनों में आए एग्जिट पोल सही साबित होते हैं और प्रदेश में त्रिशंकु सरकार बनने के आसार बनते हैं तो कांग्रेस इसमें किसी भी कीमत पर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहेगी। इसके लिए पहले ही पार्टी ने अपने सारे पत्ते चल दिए हैं, ताकि जेडीएस, एनसीपी या फिर बीएसपी किसी से भी जोड़-तोड़ करना पड़े तो कांग्रेस भाजपा से पहले ही बाजी मार ले।
आपको बता दें कि पिछले साल गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सत्ता से दूर रह गई थी और इन दोनों राज्यों में भाजपा सरकार बनाने में सफल रही थी। इस बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि अगर कांग्रेस आलाकमान ने कहा तो वह दलित मुख्यमंत्री के लिए पीछे हट जाएंगे। उनके इस बयान को भी JDS के साथ गठबंधन के लिए रास्ता तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
Published on:
15 May 2018 09:53 am
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