
नई दिल्ली। कर्नाटक में 222 विधानसभा सीटों के लिए मतदान शुरू हो चुका है। ऐसे में कर्नाटक विधानसभा का यह चुनाव 2019 में होने वाले आम चुनावों का दर्पण माना जा रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व बीजेपी की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह खुद चुनाव प्रचार की बागडोर संभाले हुए थे। लेकिन इस बीच कर्नाटक की चार ऐसी सीट हैं, जहां दोनों ही दलों की प्रतिष्ठिा दांव पर लगी हुई है।
ये हैं वो चार सीट—
वरुणा सीट
कर्नाटक विधानसभा क्षेत्र संख्या-219 वरुणा विधानसभा क्षेत्र। मैसूर जिले के अंतर्गत आने वाला वरुणा विधानसभा क्षेत्र में पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 2008 में हुआ था। इसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बाजी मारी थी। दरअसल मार्च 2007 में न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह की अध्यक्षता वाले भारतीय परिसीमन आयोग (डीसीआई) ने बन्नूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र को खत्म कर वरुणा विधानसभा क्षेत्र के गठन को मंजूरी दी थी, जिसका कई राजनीतिक दलों ने विरोध किया था। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जहां अपनी दो बार की जीती हुई वरुणा सीट अपने बेटे को सौंपकर दूसरे निर्वाचन क्षेत्र से लड़ने का फैसला किया है, वहीं भाजपा इसे परिवारवाद बताकर सरकार पर निशाना साध रही है। डीसीआई ने इसे 23 मार्च, 2007 को भारत के राजपत्र और कर्नाटक राजपत्र राज्य में भी प्रकाशित किया था। वर्ष 2008 में हुए विधानसभा सभा चुनाव में वरुणा निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस नेता सिद्धारमैया (71,908) ने भाजपा उम्मीदवार एल. रवीनसिद्धैया ( 53,071 प्राप्त मत) को 18,837 मतों के भारी अंतर से धूल चटाई थी। वहीं 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में सिद्धारमैया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कर्नाटक जनता पक्ष (केजीपी) के उम्मीदवार कापू सिद्धा लिंग्स्वामी को 29,641 मतों के भारी अंतर से हराया था। सिद्धारमैया ने यहां 84,385 वोट हासिल किए थे।
शिकारीपुरा सीट
विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए जहां अपनी सीटों को बचाने का दबाव है वहीं भाजपा को अपने गढ़ में सेंध लगने की आशंका। भाजपा की राज्य इकाई के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक बी.एस. येदियुरप्पा अपने मजबूत किले शिकारीपुरा से चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं। कर्नाटक विधानसभा सीट संख्या -115 शिकारीपुरा निर्वाचन क्षेत्र। शिकारीपुरा ऐतिहासिक स्थानों और प्राकृतिक आकर्षण स्थानों से घिरा हुआ है, जिसमें प्रसिद्ध अंजनेय मंदिर शामिल हैं। यहां देश के अलग अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। शिकारीपुरा विधानसभा क्षेत्र की कुल आबादी 2,13,590 हैं जिसमें से 1,08,344 पुरुष और 1,05,246 महिलाएं हैं। शिकारीपुरा निर्वाचन क्षेत्र में ज्यादातर कुरुबा, गुडिगर्स, लिंगायत, लैम्बानी, हैवीक, मुस्लिम, ईसाई और अन्य जातियां रहती हैं। बात करें क्षेत्रीय राजनीति की तो इस सीट को पारंपरिक रूप से भाजपा का गढ़ कहा जाता है। इस सीट पर पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी.एस. येदियुरप्पा का एकछत्र राज रहा है।
रामगरम सीट
रामानगरम शहर 70 के दशक में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'शोले' की शूटिंग के बाद सुर्खियों में आया था। रामानगरम में दुर्लभ पहाड़ी और विशाल चट्टान हैं, जिन्हें देखने के लिए पर्यटक देश के कोने कोने से यहां आते हैं। रामानगरम में लोक कला और संस्कृति का एक छोटा संग्रहालय भी है। रामानगरम निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री सी.एम. लिंगप्पा और जेडी-एस अध्यक्ष देवगौड़ा के परिवारों के बीच संघर्ष के लिए जाना जाता है। लिगंप्पा ने 1985 में इस क्षेत्र से पहली बार चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें जेएनपी के उम्मीदवार ने दो हजार मतों से हराया था। इसके बाद 1989 में लिंगप्पा ने 38,000 मतों के अंतर से चुनाव जीता था। वहीं 1994 में एच.डी. देवगौड़ा ने लिंगप्पा को नौ हजार वोटों से हराया और मुख्यमंत्री बने। 1996 में देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने जिसके बाद हुए उपचुनाव और 1999 विधायनसभा चुनाव में लिंगप्पा ने जीत दर्ज की।
बादामी विधानसभा सीट
कर्नाटक विधानसभा सीट संख्या-23 बादामी विधानसभा क्षेत्र बागलकोट लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। बादामी बागलकोट जिले का एक शहर और एक तालुका मुख्यालय है। इस विधान सभा सीट से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया खुद चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी ने उनके खिलाफ बेल्लारी से लोकसभा सांसद और आदिवासी नेता बी श्रीरामुलु को उतारा है। बात करें क्षेत्रीय राजनीति की, तो यहां वर्तमान में कांग्रेस के विधायक और दिग्गज नेता चिम्मानकट्टी बलप्पा भीमप्पा काबिज हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, विधानसभा क्षेत्र की कुल आबादी 2,78,344 थी, जिसमें 69.8 फीसदी ग्रामीण हैं और 30.2 फीसदी शहरी आबादी है। बादामी को पहले वतापी नाम से जाना जाता था और इसका भारत के इतिहास में महान महत्व है। यह 540 से 757 ईस्वी तक बादामी चालुक्य वंश की राजधानी रही थी। बादामी की औसत साक्षरता दर 64.8 प्रतिशत है जिसमें पुरुषों 59 प्रतिशत और 41 प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं। बादामी के गुफा मंदिर और किले देश भर में प्रसिद्ध हैं और यहां हर साल पर्यटक घूमने आते हैं। बादामी में विभिन्न युगों के चार मुख्य बलुआ पत्थर गुफा मंदिर हैं, जो इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।
Updated on:
12 May 2018 08:02 am
Published on:
12 May 2018 08:14 am
बड़ी खबरें
View Allराजनीति
ट्रेंडिंग
