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MCOCA Case: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने नरेश बालियान के केस से खुद को किया अलग

Arvind Kejriwal: दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल की जज बदलने वाली याचिका पर आज फैसला आएगा। जाने क्या है नई अपडेट।

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Judge Swarna Kanta Sharma

Judge Swarna Kanta Sharma

Judge Swarna Kanta Sharma: दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने सोमवार को पूर्व AAP विधायक नरेश बालियान से जुड़े मकोकामामले में जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। 'बार एंड बेंच' के अनुसार, जस्टिस शर्मा ने निर्देश दिया कि अब इस मामले को 23 अप्रैल को एक नई बेंच के समक्ष पेश किया जाए। गौरतलब है कि बालियान इस केस में नियमित जमानत की मांग कर रहे हैं। वहीं, शराब नीति मामले में भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा को हटाने की याचिका दी है, जिस पर आज शाम 4:30 बजे निर्णय आना है।

नरेश बालियान की मुश्किलें 4 दिसंबर 2024 को हुई उनकी गिरफ्तारी के बाद से लगातार बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ मकोका MCOCA की धारा 3 और 4 के तहत एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की है। पुलिस का आरोप है कि बालियान, फरार गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के संगठित अपराध गिरोह से जुड़े हुए थे। इसी सिंडिकेट का हिस्सा होने के चलते उन पर यह बड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है।

15 जनवरी को खारिज हुई थी जमानत याचिका

बालियान की जमानत अर्जी को 15 जनवरी 2025 को निचली अदालत की जज कावेरी बावेजा ने खारिज कर दिया था। अदालत का मानना था कि 'आप' नेता और गैंगस्टर सांगवान के संगठित अपराध गिरोह के बीच संबंधों के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। हालांकि, बालियान के वकील इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनका तर्क है कि मकोका लगाने का कोई ठोस आधार नहीं है और बालियान का सांगवान गिरोह से कोई लेना-देना नहीं है।

जबरन वसूली के एक मामले में जमानत मिल गई थी

गौरतलब है कि बालियान को इससे पहले 4 दिसंबर, 2025 को जबरन वसूली के एक मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन उसके कुछ ही घंटों बाद उन्हें मकोका मामले में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था।

दिल्ली पुलिस को लगाई थी फटकार

13 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने जांच में हो रही सुस्ती पर दिल्ली पुलिस को जमकर फटकार लगाई थी। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आरोपी 2024 से सलाखों के पीछे है, ऐसे में पुलिस को जांच जल्द से जल्द पूरी करनी चाहिए थी। अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर यह जांच और कितने वक्त तक खिंचती रहेगी? कोर्ट की टिप्पणी थी कि अगर जांच ही पूरी नहीं होगी, तो मामले की मुख्य सुनवाई (ट्रायल) आखिर कब शुरू हो पाएगी।

क्या है मकोका एक्ट?

मकोका एक्ट महाराष्ट्र सरकार ने साल 1999 में बनाया था। इसका पूरा नाम 'महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट' है। मकोका का मकसद संगठित और अंडरवर्ल्ड अपराध को खत्म करना है। यह कानून महाराष्ट्र के साथ-साथ दिल्ली में भी लागू है। यह कानून संगठित अपराध, अंडरवर्ल्ड और रंगदारी जैसे अवैध वित्तीय लाभ वाले अपराधों पर लागू होता है। मकोका लगने के बाद अपराधी की राह मुश्किल हो जाती है, क्योंकि इसमें जमानत के प्रावधान बेहद सख्त हैं।