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दोहरे झटके के बाद तनाव में टीएमसी, पांच और नेता भाजपा में हो सकते हैं शामिल

दोहरे झटके के बाद तनाव में टीएमसी, पांच और नेता भाजपा में हो सकते हैं शामिल
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नई दिल्ली। एक तरफ लोकसभा चुनाव की रणभेरी तो दूसरी तरफ राजनीतिक दलों में जोड़-तोड़ का खेल। जी हां देश में सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच चुका है। पांच राज्यों में मिली करारी शिकस्त के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपनी कमर कस ली है। यही वजह है कि पार्टी अब राज्यों में तोड़-फोड़ की राजनीति में जुट गई है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया है। बुधवार को पार्टी के एक सांसद ने बीजेपी जॉइन कर लिया और एक अन्य सांसद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।


भाजपा में जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौमित्र खान ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की जमकर आलोचना की। उन्होंने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में कोई लोकतंत्र नहीं है। वहां बस पुलिस राज चलता है।


पांच और की तैयारी
सौमित्र खान को पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और मुकुल रॉय की मौजूदगी में पार्टी महासचिव अरुण सिंह ने भाजपा की सदस्यता हासिल कर ली है। मुकुल रॉय भी टीएमसी छोड़कर भाजपा में आ गए हैं। उन्होंने दावा किया कि ममता के पांच और सांसद उनसे संपर्क में हैं।


रॉय के मुताबिक टीएमसी के कुछ और नेता लगातार उनके संपर्क में हैं और उम्मीद है जल्द ही वे भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने उन नेताओं के नाम उजागर नहीं किए हैं लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि अर्पिता घोष और शताब्दी रॉय भी टीएमसी छोड़ भाजपा खेमे में शामिल हो सकते हैं।

जारी है बगावत
बुधवार को चले राजनीतिक घटनाक्रम में जैसे ही सौमित्र खान ने पार्टी छोड़ी टीएमसी ने बोलपुर सांसद अनुपम हाजरा को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। दरअसल उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। यानी टीएमसी एक ही दिन में दो बड़े झटके लगे। लेकिन उनके ये झटके अभी संभले भी नहीं थे कि पांच अन्य नेताओं के भाजपा में शामिल होने की खबर ने हड़कंप मचा दिया है।

टिकट को लेकर मनमुटाव
आपको बता दें कि पिछले साल मॉनसून सत्र के बाद ही दोनों टीएमसी नेताओं के भाजपा में शामिल होने की चर्चा थी। ऐसा इसलिए क्योंकि यह तय था कि पार्टी आने वाले लोकसभा चुनाव में दोनों को ही फिर से टिकट देने के मूड में नहीं थी। ऐसे में शाह और प्रधान से मुलाकात के पहले ही दोनों नेताओं ने टिकट को लेकर बात साफ कर ली थी और इसी के बाद भाजपा में शामिल हुए।