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मोदी सरकार के आरक्षण पर उठे सवाल, सियासी दलों ने बताया चुनावी ‘छलावा’

अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'चुनाव के पहले भाजपा सरकार संसद में संविधान संशोधन करे।
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मोदी सरकार के आरक्षण पर उठे सवाल, सियासी दलों ने बताया चुनावी 'छलावा'

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 में अब 100 दिनों से भी कम का समय रह गया है। इससे पहले मोदी सरकार अगड़ी जातियों को साधने के लिए बड़ा कदम उठाने का साहस दिखाया है। अब मोदी सरकार सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने जा रही है। लेकिन सरकार के इस फैसले पर सियासी दलों ने सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस, राजद, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय समता लोकदल समता पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों ने सरकार के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता हरिश रावत ने कहा कि सवर्णों पर ध्यान देने में बहुत देर कर दी। चुनाव आते ही सरकार ने जुमलेबाजी शुरू कर दी।

वहीं वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'सरकार ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने का फैसला किया है। आपने इसके लिए 4 साल 8 महीने का इंजार किया? तो यह निश्चित रूप से एक चुनावी छलावा है। आप जानते हैं कि आप सीमा को अधिकतम 50 फीसदी ही बढ़ा सकते हैं।'

वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'चुनाव के पहले भाजपा सरकार संसद में संविधान संशोधन करे। हम सरकार का साथ देंगे। नहीं तो साफ़ हो जाएगा कि ये मात्र भाजपा का चुनाव के पहले का स्टंट है।'

तेजस्वी ने भी जताई नाराजगी

वहीं हाल ही में मोदी सरकार से अलग हुए और महागठबंधन में शामिल हुए उपेंद्र कुशवाहा ने भी सरकार पर आरक्षण को लेकर निशाना साधा। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि चुनाव से पहले जनता की आखं में धूल झोंकने की जुमलेबाजी है। आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि भारत सरकार को पहले जातिगण जनगणना के आंकड़े सामने लाने चाहिए जिससे पता चल सकेगा कि कौन सी जातियां क्या काम करती हैं। सरकार चुनावी लाभ लेने के लिए यह फैसला उठाई है।

सीपीआई ने उठाए सवाल

सीपीआई के डी राजा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में विधानसभा चुनाव की भरपाई करने के लिए यह कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले से आरक्षण पर एक कैप लगाई है, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से भाजपा को जो रिपोर्ट्स मिल रही थी उसके आधार पर भाजपा ने यह फैसला लिया है।

नेताओं ने किया स्वागत

वहीं भाजपा नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। उदित राज, कैलाश विजयवर्गीय शिवराज सिंह चौहान समेत नेताओं ने इसका स्वागत किया है।