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मोदी सरकार का संकल्प: सशक्त युवा, सशक्त भारत

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस: मोदी सरकार की ओर से युवाओं के सशक्तिकरण की दिशा में प्रयासों का उल्लेख कर रहे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ल

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प्रेम शुक्ल (राष्ट्रीय प्रवक्ता, भाजपा)

आज अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस है और इस अवसर पर यदि भारत के युवाओं के विकास की चर्चा न हो, तो यह अधूरा रहेगा। इस लेख के माध्यम से मैं न केवल भारत की युवा शक्ति की बात करूँगा, बल्कि मोदी सरकार द्वारा उनके सशक्तिकरण के लिए उठाए गए ऐतिहासिक कदमों की भी चर्चा करूँगा।

भारत में आत्मनिर्भरता की कल्पना युवाओं को सशक्त किए बिना संभव नहीं है। देश तभी विकसित होगा, जब उसकी युवा शक्ति पूरी क्षमता से आगे बढ़े। सौभाग्य से, भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी और ऊर्जावान युवा आबादी है। भारत में लगभग 65% जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यह विश्व का सबसे बड़ा, सबसे जीवंत और सबसे संभावनाशील युवा बल है।

लेकिन यह भी उतना ही सच है कि दशकों तक इस शक्ति को कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने केवल चुनावी पोस्टरों, खोखले नारों और अधूरे वादों में कैद करके रखा। उनकी राजनीति का केंद्र बिंदु परिवार की सत्ता को बचाए रखना रहा, न कि युवाओं की क्षमता को जगाना। कांग्रेस ने दशकों तक देश में राज किया और उसके साथी दलों ने कई प्रदेशों में लेकिन न शिक्षा में कोई क्रांति आ पाई थी, न कौशल विकास का ढांचा खड़ा हुआ और न ही रोजगार सृजन के ठोस प्रयास हुए। खेल और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों को तो कभी राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखा ही नहीं गया था। लेकिन वर्ष 2014 के बाद युवा सशक्तिकरण में एक व्यापक बदलाव आया।

मोदी का दृष्टिकोण: युवा वोट बैंक नहीं, राष्ट्र निर्माता

2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की कमान संभाली, तो उन्होंने युवाओं को केवल वोट बैंक के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के साझेदार के रूप में देखा। स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित नरेंद्र मोदी जी भली-भांति समझते हैं कि यदि युवाओं को सही दिशा और अवसर मिले, तो भारत को विकसित भारत होने से दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं सकती।

युवा शक्ति के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने शिक्षा, कौशल, रोजगार, खेल और उद्यमिता सहित हर क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए हैं। मोदी सरकार इन कार्यों ने न केवल युवाओं को नए अवसर दिए, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भारत के निर्माता के रूप में स्थापित किया। यह परिवर्तन केवल कागज़ी नीतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ज़मीनी स्तर पर ठोस नतीजे लेकर आया।

शिक्षा: राष्ट्र पुनर्निर्माण की आधारशिला

मोदी सरकार ने पहली बार शिक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का दर्जा दिया। 21 जुलाई 2020 को घोषित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने स्कूली और उच्च शिक्षा, दोनों में व्यापक सुधार का मार्ग प्रशस्त किया। लक्ष्य रखा गया कि 2030 तक प्री-स्कूल से सेकेंडरी स्तर तक का सकल नामांकन अनुपात 100 % और 2035 तक उच्च शिक्षा में 50% तक पहुँचे।

जहाँ पहले कांग्रेस सरकारें शिक्षा को वोट बैंक की राजनीति में उलझाकर रखती थीं, वहीं मोदी सरकार ने इसे राष्ट्र पुनर्निर्माण का आधार बनाया। परिणाम स्पष्ट हैं — 2014-15 में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या 51,534 थी, जो मई 2025 तक 70,683 हो चुकी है, यानी 13.8% की बढ़ोतरी। विश्वविद्यालय 760 से बढ़कर 1334, कॉलेज 38498 से बढ़कर 51951, IITs 16 से बढ़कर 13, IIMs 13 से बढ़कर 21, AIIMS 7 से बढ़कर 23 और मेडिकल कॉलेज 387 से बढ़कर 2045 हो गए हैं। मेडिकल सीटें अब 3.9 लाख से अधिक हैं।

इसके अलावा, PM SHRI स्कूल योजना के तहत 14,500 स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिस पर ₹27,360 करोड़ खर्च हो रहे हैं, ताकि विद्यार्थी 21वीं सदी के कौशल के साथ तैयार हो सकें।

कौशल विकास: अवसरों का द्वार

कांग्रेस के समय युवाओं को केवल खोखले वादे मिले, जबकि मोदी सरकार ने उन्हें कौशल और अवसर दोनों दिए। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के तहत 2015 से अब तक 1.63 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण मिला। 2022 से अब तक आयोजित 25 राष्ट्रीय रोजगार मेलों में 10 लाख नियुक्ति पत्र बांटे गए।

EPFOके आँकड़े बताते हैं कि 2017 से अब तक 8.59 करोड़ नए सदस्य जुड़े हैं, जिनमें 3.45 करोड़ युवा (18–28 आयु वर्ग) शामिल हैं। यह सिर्फ़ आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों घरों में आई रोज़गार की खुशखबरी है।

उद्यमिता : नौकरी तलाशने से नौकरी देने तक

मोदी सरकार ने उद्यमिता के क्षेत्र में युवाओं को नौकरी खोजने वाले से नौकरी देने वाला बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाए। जहाँ पहले कांग्रेस के समय उद्यमियों को लाइसेंस-परमिट के जाल में फंसाया जाता था, आज स्टार्टअप संस्कृति को उड़ान मिली है।

स्टार्टअप इंडिया के तहत 1.57 लाख स्टार्टअप्स को DPIIT से मान्यता मिली है, जिन्होंने 2017 से 2024के बीच 4.8 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए। मुद्रा योजना के तहत 2015–16 में ₹1.37 लाख करोड़ के मुकाबले 2024–25 में ₹33.65 लाख करोड़ के ऋण स्वीकृत हुए, और लोन सीमा ₹20 लाख तक बढ़ा दी गई। मोदी सरकार ने आर्थिक सशक्तिकरण को युवाओं के हाथों में सौंपने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

खेल : भारत को खेल महाशक्ति बनाना

पहले खेल नीतियां केवल घोषणाओं तक सीमित रहती थीं, लेकिन आज भारत खेलों में नई पहचान बना रहा है। टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम, खेलो इंडिया और आधुनिक खेल सुविधाओं ने भारतीय खिलाड़ियों को विश्व मंच पर गौरव दिलाया है।

ओलंपिक 2020 और 2024 में भारत ने क्रमशः 7 और 6 पदक जीते, पैरालंपिक 2024 में 29 पदक लेकर अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, और कॉमनवेल्थ 2022 में 61 पदक हासिल किए। खेलो इंडिया के तहत 1048 केंद्र स्थापित हुए, 3000 एथलीट चुने गए और उन्हें ₹6.28 लाख प्रति वर्ष की आर्थिक सहायता दी जा रही है।

राष्ट्र रक्षा और युवा

राष्ट्र रक्षा में युवाओं की भूमिका को नए स्वरूप में लाने के लिए अग्निपथ योजना शुरू की गई। इसके तहत फरवरी 2025 तक 1.5 लाख अग्निवीर सेना में शामिल हो चुके हैं। राष्ट्रीय युवा महोत्सव 2025 में 3000 युवा नेता और 30 लाख प्रतिभागी शामिल हुए, जिन्होंने प्रधानमंत्री से सीधा संवाद किया।

राष्ट्रवाद बनाम परिवारवाद

ये सभी प्रयास यह साबित करते हैं कि मोदी सरकार का दृष्टिकोण केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि नतीजों का है। जहाँ कांग्रेस और विपक्षी दलों ने दशकों तक युवाओं को अवसरों से वंचित रखा, वहीं मोदी सरकार ने उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने लायक बनाया। यह फर्क केवल नीति का नहीं, बल्कि सोच का है — कांग्रेस का मॉडल परिवारवाद और वोट बैंक की राजनीति पर आधारित था, जबकि मोदी सरकार का मॉडल राष्ट्रवाद और विकासवाद पर केंद्रित है। यही सोच भारत को 2047तक विकसित राष्ट्र बनाने का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

भारत के युवा, भारत की शक्ति हैं। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के साथ मोदी सरकार इस शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है।