
Mouth freshener
इंदौर। वह जमाना गया, जब भोजन पचाने और स्वाद के लिए सौंफ, मिश्री और धनिया दाल खाई जाती थी। स्वाद की राजधानी माने जाने वाले इंदौर में अब पारंपरिक सौंफ, मिश्री, पान, धनिया दाल, इलाइची, लौंग, काली मिर्च, आंवला और सुपारी से करीब 150 से अधिक मुखवास (माउथ फ्रेशनर) बनाए जा रहे हैं। लोग इन्हें हाथोंहाथ ले रहे हैं। शहर में मुखवास की कई वैरायटी मिल रही है, जो सेहत के लिए भी फायदेमंद है।
चांदी वर्क में कई टेस्ट
20 साल से मुखवास बना रहे शादाब भिमानी ने बताया कि पान के पत्ते, सौंफ, गुलकंद आदि से मुखवास बनाए जा रहे हैं। ये टेस्टी होने के साथ 2 साल तक खराब नहीं होते हैं। सुपारी में 25 से 30 वैरायटी है, जिनमें खजूर, बांड सुपारी, पाकीजा, चिकनी सुपारी और माधुरी शामिल हैं। सौंफ में 25 वैरायटी चमन, रसभरी, सिकी, मीठी, रोस्टेड, दिल्ली, फिकर नॉट नाम से मीठी-नमकीन सौंफ शामिल है। चांदी वर्क में भी फ्लेवर्ड गोंद, आंवला, सुपारी समेत कई टेस्ट मिल जाएंगे।
400 से 3600 रुपए किलो दाम
मुखवास 50 ग्राम की पैकिंग में भी आता है। आंवला 400 से 700 रुपए प्रति किलो, पान मुखवास 400 से 2 हजार रुपए किलो, सौंफ 400 से 1600 रुपए किलो मिल रही है।
पाचन में मददगार
मुखवास भोजन पचाने के लिए खाए जाते हैं। मुंह की दुर्गंध भी इनसे दूर होती है। कई निर्माता स्वाद के साथ सेहत के मामले में प्रयोग कर रहे हैं। शादाब ने बताया, नमकीन-रोस्टेड अलसी तो स्वास्थ्यवर्धक होती ही है। अजवायन, तिल, सौंफ से हम डाइजेस्टिव मुखवास बना रहे हैं, जिससे भोजन आसानी से पच जाता है। इसके अलावा अमचूर और हींग के मिश्रण से हींग पेड़ा बना रहे हैं।
जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट
डॉ. अखिलेश भार्गव, एसोसिएट प्रोफेसर, शासकीय आष्टांग आयुर्वेदिक कॉलेज
पान के पत्ते, लौंग, इलाइची, सौंफ, आंवला, हींग, अजवायन, खजूर से बने मुखवास भोजन के बाद लेने से न केवल मुख शुद्धि होती, बल्कि मुंह में लार का स्त्राव अधिक होता है। इससे मुंह की दुर्गंध समाप्त होती है और डाइजेशन भी अच्छा होता है।
Published on:
03 May 2023 03:26 pm
बड़ी खबरें
View Allइंदौर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
