दरअसल बीते अप्रैल में केंद्रीय मंत्रिपरिषद द्वारा वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 में संसद के सभी सदस्यों के वेतन में 30 फीसदी कटौती और एमपीलैड के निलंबन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई थी। मौजूदा विधेयक इससे संबंधित संसद सदस्य वेतन, भत्ता एवं पेंशन अध्यादेश 2020 के स्थान पर लाया गया है। इसके जरिये संसद सदस्यों के वेतन, भत्ता एवं पेंशन अधिनियम, 1954 में संशोधन किया गया है।