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NCP के विलय के पक्ष में भाजपा, पर सुनेत्रा पवार और बेटे पार्थ कर रहे विरोध, शरद पवार हैं वजह?

NCP merger news: सुनेत्रा पवार नीत एनसीपी और एनसीपी (शरद पवार) के संभावित विलय की चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा दोनों गुटों के बीच मतभेद खत्म कर उन्हें एकजुट करने की कोशिश कर रही है, ताकि संसद में महत्वपूर्ण संवैधानिक विधेयकों को पारित कराने के लिए सत्तारूढ़ एनडीए की ताकत बढ़ाई जा सके। हालांकि, दोनों दलों ने आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह की विलय वार्ता से इनकार किया है।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jul 18, 2026

Sharad Pawar NCP merger

एनसीपी और एनसीपी (एसपी) के विलय की अटकलें तेज (Photo: IANS)

Maharashtra politics: महाराष्ट्र की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा (BJP) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को और मजबूत करने के लिए एनसीपी (NCP) के दोनों गुटों के विलय के पक्ष में है और इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली एनसीपी सत्ताधारी एनडीए का हिस्सा है, जबकि शरद पवार की एनसीपी (एसपी) विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन में शामिल है। हालांकि, सुनेत्रा पवार और उनके बड़े बेटे व राज्यसभा सांसद पार्थ पवार इस संभावित विलय के खिलाफ बताये जा रहे हैं।

भाजपा क्यों चाहती है NCP का विलय?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार आगामी संसद सत्र में महिला आरक्षण लागू करने और परिसीमन (Delimitation) से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पेश करने की तैयारी में है। ऐसे विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। इसी वजह से भाजपा नेतृत्व दोनों एनसीपी गुटों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहा है। दावा यह भी किया जा रहा है कि दोनों पक्षों को केंद्र सरकार में एक-एक मंत्री पद देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार विलय के खिलाफ क्यों?

रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि एनसीपी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार पार्टी के विलय के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि यदि दोनों दल एक हो गए तो शरद पवार और सुप्रिया सुले फिर से पार्टी पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं।

बताया जा रहा है कि यदि विलय अपरिहार्य हुआ तो सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष दोनों पदों पर बनी रहने की मांग कर सकती हैं। दूसरी ओर, पार्टी के ही कई अन्य विधायक और वरिष्ठ नेता इस विलय के समर्थन में लामबंदी करने में जुटे हैं।

फडणवीस से मुलाकातों ने बढ़ाईं चर्चाएं

गुरुवार को पार्थ पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। वहीं इससे पहले शरद पवार नीत एनसीपी (एसपी) के जयंत पाटिल मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे, जहां सुनेत्रा पवार खेमे के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी मौजूद थे।

इसके अलावा जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी मुलाकात की। इन बैठकों के बाद दोनों दलों के विलय की अटकलों को और बल मिल गया।

संसद में 2/3 बहुमत के लिए BJP का बड़ा दांव!

दरअसल, सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र को देखते हुए केंद्र सरकार संविधान संशोधन विधेयक (महिला आरक्षण और परिसीमन लागू करने संबंधी) को दोबारा पेश करने की तैयारी में है, जो पिछले सत्र में जरूरी समर्थन न मिलने के कारण पास नहीं हो सका था। लोकसभा की वर्तमान ताकत 540 है, जहां दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों की जरूरत है। एनडीए के पास फिलहाल 319 का आंकड़ा है। अगर शरद पवार की पार्टी का समर्थन मिलता है, तो यह संख्या 327 हो जाएगी। बाकी 33 की कमी को पूरा करने के लिए भाजपा सरकार कुछ दलों के वॉकआउट या अनुपस्थित रहने की रणनीति अपना सकती है।

एनसीपी के भीतर भी मतभेद की चर्चा

रिपोर्ट्स का कहना है कि सुनेत्रा पवार की एनसीपी के कुछ विधायक विलय के पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यदि शरद पवार एनडीए में शामिल होते हैं तो और विधायक विलय के पक्ष में आ सकते हैं।

इसी बीच एनसीपी के उपाध्यक्ष उदयकुमार आहेर ने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर पार्थ पवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर ही कुछ लोग पार्थ पवार की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

सुप्रिया सुले ने क्या कहा?

इन सभी अटकलों के बीच एनसीपी और एनसीपी (एसपी) दोनों ने ही आधिकारिक रूप से विलय पर किसी बातचीत से इनकार किया है। एनसीपी (शरद गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि अजित पवार के जीवित रहते विलय पर चर्चा हुई थी, लेकिन उनके निधन के बाद दूसरे पक्ष ने इसका विरोध किया और वहीं यह मामला समाप्त हो गया। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल विलय को लेकर उनकी पार्टी की ओर से कोई प्रक्रिया नहीं चल रही है।