
प. बंगाल ही नहीं बल्कि इन राज्यों में भी केंद्र सरकार के साथ है टकराव
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में ममता सरकार और केंद्र सरकार के बीच सियासी लड़ाई चरम पर पहुंच गया है। इस लड़ाई का माध्यम इस बार बना सीबीआई। दरअसल शारदा चिटफंड घोटाले के संबंध में रविवार देर शाम सीबीआई कलकत्ता स्थित पुलिस कमिश्नर के घर पहुंची। लेकिन पूछताछ की कार्रवाई हो पाती उससे पहले पश्चिम बंगाल पुलिस ने सीबीआई अधिकारियों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद से हाईवोल्टेज सियासी ड्रामा शुरु हो गया। ममता बनर्जी ने मोदी सरकार के खिलाफ हमला बोल दिया। बता दें कि मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गई और कहा कि राजनीतिक दुर्भावना के साथ सीबीआई का गलत इस्तेमाल करते हुए ये कार्रवाई की गई। हालांकि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है जिसकी सुनवाई कल यानी मंगलवार को होगी। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल कोई पहला राज्य नहीं है जहां पर केंद्र और राज्य के बीच विवाद देखने को मिला है। इससे पहले दिल्ली, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, पुदुचेरी आदि राज्यों में भी केंद्र सरकार के साथ टकराव देखने को मिला है।
उत्तराखंड और अरुणाचल में लगा था राष्ट्रपति शासन
आपको बता दें कि उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में केद्र सरकार के साथ टकराव देखने को मिला था। हालात इतने खराब हो गए थे कि दोनों राज्यों में राष्ट्रपति शासन तक लगाना पड़ा था। हालांकि जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो केंद्र सरकार को मुंह की खानी पड़ी थी और फिर से सरकारों को बहाल किया गया था। केंद्र सरकार ने कहा था कि दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार अल्पमत में है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को आदेश दिया कि फ्लोर टेस्ट करवाएं और फिर इसका निर्धारण करें कि सरकार बहुमत में है या फिर अल्पमत में है। बता दें कि इसके बाद जब उत्तराखंड में चुनाव हुए तो कांग्रेस को करारी हार झेलनी पड़ी। जबकि अरुणाचल प्रदेश में भाजपा के सहयोग से सरकार चल रही है। मालूम हो कि अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस के विधायकों ने एक साथ पार्टी छोड़ दी थी। इन दो राज्यों में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप को लेकर विपक्षी दलों ने मोदी सरकार के खिलाफ हमला बोल दिया था। विपक्ष का आरोप था कि मोदी सरकार संविधान को ताक पर रखकर केवल सत्ता में काबिज होना चाहती है।
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दिल्ली और पुदुचेरी में भी केंद्र सरकार के साथ है टकराव
बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली और पुदुचेरी में भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव देखने को मिलता रहा है। इसमें से दिल्ली का मामला पूरे देश में चर्चित रहा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कई बार आरोप लगाया कि मोदी सरकार संवैधानिक एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर आम आदमी पार्टी सरकार को परेशान कर रही है। दिल्ली के उपराज्यपाल पर कई गंभीर आरोप लगाए। इसके अलावा दिल्ली के मुख्य सचिव को लेकर भी विवाद सामने आ चुका है। बता दें कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 10 से ज्यादा विधायकों को पुलिस ने विभिन्न आरोपों में गिरफ्तार किया, वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय तक पर छापेमारे की गई। केजरीवाल के प्रमुख सचिव राजेंद्र कुमार को कथित भ्रष्टाचार के आरोपों में सीबीआई ने गिरफ्तार भी किया था। इसको लेकर केजरीवाल और मोदी सरकार के बीच लगातार टकराव दिखता रहा है। बता दें कि दिल्ली के अलावा पुदुचेरी में भी सरकार के साथ टकराव देखने को मिलता रहा है। पुदुचेरी की कांग्रेस सरकार ने आरोप लगाया था कि किरण बेदी ने उपराज्यपाल बनते ही सरकार के कामकाज में सीधे दखल देनी शुरु क दी है। उपराज्यपाल किरण बेदी ने फाइलों को अपने दफ्तर में सीधे मंगाना शुरु कर दिया है और कांग्रेस ने यहां तक आरोप लगाया कि किरण बेदी अपना एक अलग वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर अधिकारियों को सीधे निर्देश दे रही हैं।
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Updated on:
04 Feb 2019 04:41 pm
Published on:
04 Feb 2019 04:38 pm
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