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प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार पर साधा निशाना, बताया ठश्रच् का ‘पिछलग्गू’

निलंबन के बाद पीके ने जेडीयू पर बोला तीखा हमला बिहार में अक्टूबर-नवंबर में होगा विधानसभा चुनाव बिहार के हितों को लेकर पहले की तरह आक्रामक नहीं रहे नीतीश

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नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 ( Bihar Assembly Elecction ) को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अभी से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ( Prashant Kishore ) ने जनता दल यूनाइटेड ( JDU ) से निलंबन के बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में बिहार सरकार पर निशाना साधते दिखे। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ( Cm NItish Kumar ) को भारतीय जनता पार्टी ( BJP ) का 'पिछलग्गू' तक करार दिया।बिहार के विकास के लिए जो केंद्र से हक और हिस्से की बात करते थे उसके संबंध लेकिन नीतीश कुमार के समर्थक मानते हैं कि अब वह उतने आक्रामक नहीं रहे जितना भाजपा के साथ 2017 में सरकार बनाने के पूर्व तक थे।

इसके जवाब में जनता दल यूनाइटेड के नेताओं का कहना है कि ऐसे शब्द का इस्तेमाल आपत्तिजनक है। वह भी ऐसे व्यक्ति के मुंह से जिसने नीतीश कुमार को पिछले पांच वर्षों में सबसे नजदीक से देखा है।

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चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का कहना है कि जब वो उन्हें श्पिछलग्गूश् कहते हैं तो उनके जैसे लोगों के सामने नीतीश कुमार का वह दृश्य होता हैं जब वह सार्वजनिक मंच से पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग करते हैं और प्रधानमंत्री खारिज कर देते हैं। इसके अलावा जब वह लोकसभा चुनाव में 40 में से 39 सीटों पर जीत दिलाते हैं लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनकी अनुपातिक प्रतिनिधित्व की मांग खारिज कर दी जाती है। जब बिहार को बाढ़ से निजात दिलाने के लिए वह निर्मल और अविरल गंगा के लिए बालू के गाद का समाधान करने की मांग करते हैं तब दो वर्ष बाद एक समिति बनाकर उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

इसके साथ मसला चाहे नदियों को जोड़ने की हो या विशेष राज्य का दर्जा, सब पर केंद्र सरकार कुंडली मारकर बैठ जाती है। नीतीश सत्ता के चक्कर में मौन साध लेते है। नागरिक संशोधन कानून ( CAA ) को जिसके ड्राफ्ट का उन्होंने विरोध किया था उसका अगर लोकसभा में समर्थन किया तो किससे पूछ कर।

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पीके इन आरोपों का जवाब देते हुए जेडीयू के प्रवक्ता केसी त्यागी का कहना है कि नीतीश कुमार सिद्धांतों से राजनीति करते हैं। अगर ट्रिपल तलाक या धारा 370 पर बीजेपी हमारे विचारधारा के खिलाफ चली तो हमने संसद में इस बात की परवाह किए बिना कि जनता में इसका क्या असर है या होगा हमने इसका विरोध किया। उसी तरीके से एनआरसी ( NRC ) पर हमारा स्टैंड कायम है और एनपीआर ( NPR ) की नई प्रश्नावली पर अगर लोगों में चिंता है तो एनडीए की बैठक में हमारे लोकसभा में नेता ललन सिंह ने प्रधानमंत्री के सामने इस मुद्दे को उठाया है।

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