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ये 10 बड़ी नाकामियां मोदी सरकार की बढ़ा सकती हैं परेशानियां

कई मोर्चों पर सफलता के बावजूद मोदी सरकार की नाकामियां उसकी चमक को फीकी करने वाली है।

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pm modi

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नई दिल्‍ली। पीएम मोदी सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में कई असरकारी कदम उठाए। इनमें कुछ कदम ऐसे भी हैं जिनमें उन्‍हें असफलता मिली है और ये भाजपा सरकार की उपलब्धियों की चमक फीकी करती हैं। आज इन नाकामियों का जिक्र करना इसलिए जरूरी है क्योंकि यूपीए की कमजोरियों को गिनाकर मोदी सरकार सत्ता में आई थी। दूसरी बात ये कि कामयाबी के बीच ये नाकामियां मोदी सरकार के सच को सामने लाने का काम करती है।

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मोदी सरकार की 10 बड़ी नाकामियां :

1. तेल की कीमतों में लगी आग
पेट्रोल-डीजल के बढ़े दाम से देश भर में हाहाकार मचा है। विगत चार वर्षों में पेट्रोल और डीजल सबसे ज्यादा महंगा हुआ है। तेल की कीमतों में किस तरह से आग लगी हुई है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि महाराष्ट्र के परभणी में 24 मई को पेट्रोल 87.27 रुपए प्रतिलीटर पहुंच गया। जबकि मोदी सरकार सत्ता में आने से पहले यह कहती रही कि उनकी सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम कांग्रेस की सरकार से भी कम कर देगी। हैरान करने वाली बात ये है कि जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम है।

2. कालेधन पर फेल
2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी की यूपीए सरकार को कालेधन के मुद्दे पर सबसे ज्‍यादा कोसा था। पीएम मोदी अपने भाषणों में कहा करते थे कि उनकी सरकार जब सत्ता में आएगी तो विदेशों में जमा भारतीय लोगों का कालाधन वो ले आएंगे और यह कालाधन इतना अधिक होगा कि सरकार हर व्यक्ति को 15 -15 लाख रुपए देगी। मोदी सरकार के चार साल पूरे हो गए मगर अब भी लोगों को इस बात का इंतजार है कि विदेशों से कालाधन कब आएगा और उससे अधिक लोगों को इस बात का इंतजार है कि उनके अकाउंट में 15 लाख रुपए कब आएंगे, जिसका वादा चुनाव से पहले पीएम मोदी ने किया था।

3. बेरोजगारी पर औंधे मुंह गिरी सरकार
पीएम मोदी सरकार ने हर साल 2 करोड़ रोजगार दिलाने का वादा किया था। रोजगार सृजन के मामले में मोदी सरकार औंधे मुंह गिरी है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर विपक्ष के सवालों के समक्ष मोदी सरकार निरुत्तर नजर आती है। बेरोजगारी के मुद्दे पर जब मोदी सरकार फंसी तो पकौड़े बेचने को भी रोजगार की श्रेणी में ले आई और उसे अपनी उपलब्धि बताने लगी। इस बात को विपक्षी दलों ने पकड़ लिया और सरकार की जमकर फजीहत हुई।

4. नोटबंदी ने बढ़ाई बेकारी
मोदी सरकार ने आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी को लागू करने का ऐतिहासिक फैसले लिया था। लेकिन इसका परिणाम सरकार के लिए नुकसानदेह साबित हुआ। सरकार के इस फैसले से न सिर्फ आम लोगों को परेशानी हुई बल्कि कालाधन भी नहीं हुआ। न ही भ्रष्टाचार में कमी देखने को मिली। नोटबंदी की विफलता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक भी कह चुका है कि मार्केट में मौजूद पुराने नोट करीब 99 फीसदी वापस आ गए है। लेकिन मोदी सरकार मार्केट फैले में जाली नोटों और देश में छुपे कालेधन का पूरा हिसाब अभी तक नहीं दे पाई है।

5.कश्मीर घाटी में शांति
2014 में चुनाव के दौरान भाजपा ने कश्मीर में अशांति को जनता के बीच बड़ा मुद्दा बनाया था। लेकिन मोदी सरकार की लगातार कोशिश के बावजूद घाटी में आशांति और हिंसा का माहौल है। कांग्रेस की सरकार से अगर तुलना करें तो लागातार पत्थरबाजी और अशांत माहौल का मोदी सरकार ने सामना किया है। जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और भाजपा की गठबंधन सरकार होने के कारण इसे बड़ी नाकामी माना जा रहा है।

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6. नमामि गंगे परियोजना
गंगा की सफाई को लेकर पीएम ने जोर शोर से नमामि गंगे परियोजना का शुभारंभ किया था। इसके लिए 20,000 करोड़ रुपए का बजट दिया। इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य 5 साल का रखा गया लेकिन मिनिस्ट्री ऑफ वॉटर रिसोर्सेज के डेटा की मानें तो नमामि गंगे प्रोजेक्ट में काफी धीमी गति से काम हुआ है। 2014 से 17 के आंकड़ों पर गौर करें तो सरकार द्वारा बीते तीन सालों में 12 हजार करोड़ रुपए का बजट देने की बात कही गई जिसमें से वास्तव में केवल 5,378 करोड़ रुपये ही बजट में दिए गए। इनमें से केवल 3633 करोड़ रुपये खर्च के लिए निकाले गए और 1836 करोड़ 40 लाख रुपये ही वास्तव में खर्च हुए।

7. सांसद आदर्श ग्राम योजना
आदर्श ग्राम योजना के तहत हर सांसदों के द्वारा पांच गावों को गोद लेने की व्यवस्था है, जिसमें 2016 तक प्रत्येक सांसद एक-एक गांव को विकसित बनाएंगे और बाद में 2019 तक दो और गांवों का विकास होगा। लेकिन एक भी गांव आदर्श ग्राम की कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया है।

8. आंतरिक सुरक्षा पर सवाल
एनडीए सरकार आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर भी काफी कमजोर साबित हुई है। छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र में समय-समय पर जिस तरह से नक्सली हमले हो रहे हैं, उसने मोदी सरकार की विफलता को उजागर कर दिया है। बीते साल अप्रैल में छत्तीसगढ़ के सुकमा में एक साथ 25 सीआरपीएफ जवानों शहीद हो गये थे। साल 2010 के बाद यह बड़ा नक्सली हमला था। इतना ही नहीं, समय-समय पर मोदी सरकार के कार्यकाल में लगातार नक्सली हमले होते रहे हैं, जिसमें हमारे जवानों ने अपनी जान गंवाए हैं।

9. निवेश हासिल करने में विफलता
पीएम मोदी ने मेक इन इंडिया के तहत भारत को वैश्विक निवेश और विनिर्माण को आकर्षित करने की योजना बनाई थी। इस योजना को 25 सितंबर, 2014 को लॉंच किया गया था। अभी तक के अनुभवों के आधार पर कहा जा सकता है कि यह एक इंटरनेशनल मार्केटिंग का अभियान बनकर रह गया। इसे जिस मकसद से लॉंच किया गया उसे हासिल करने में विफल रहा।

10. पड़ोसियों से संबंध
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में सबसे ज्‍यादा प्राथमिकता पड़ोसी देश नेपाल, भूटान, बांग्‍लादेश, श्रीलंका, पाकिस्‍तान, म्‍यांमार, मालदीव को देने की घोषणा की थी। इस मोर्चे पर भी सरकार विफल साबित हुई और चीन ने मोदी सरकार को चारों तरफ से घेर लिया है। नेपाल,पाकिस्‍तान, मालदीव व बांग्‍लादेश की नाराजगी किसी से छिपी नहीं है। इतना ही नहीं मोदी सरकार ने इन देशों के संगठन सार्क को भी निष्क्रिय बनाकर रख दिया।