रोजाना 18 हजार लीटर दूध पीएंगे प्रतापगढ़ के बच्चे

Rakesh kumar Verma

Publish: Jun, 14 2018 10:47:38 AM (IST)

Pratapgarh, Rajasthan, India
रोजाना 18 हजार लीटर दूध पीएंगे प्रतापगढ़ के बच्चे

-1342 स्कूलों के बच्चों को पिलाएंगे दूध

-03 दिन मिलेगा सप्ताह में
-1 लाख 23 हजार नियमित पीएंगे दूध
-2 जुलाई से दूध मिलना शुरू होगा स्कूली बच्चों को
प्रतापगढ़. सरकारी स्कूली के बच्चों को आगामी दो जुलाई से दूध पिलाया जाएगा। इसकी तैयारियों में इन दिनों शिक्षा विभाग जुटा हुआ है। दूध कहां से आएगा, किस प्रकार वितरण होगा, इसकी तैयारियां चल रही है। ताकि स्कूल खुलने के बाद व्यवस्थित ढंग से बच्चों तक दूध पहुंचाया जा सके। अकेले प्रतापगढ़ जिले में 18 हजार लीटर दूध बच्चों को रोजाना पिलाया जाएगा।

दूध मीठा या फीका असमंजस बरकरार
बच्चों को दूध मीठा दिया जाएगा या फीका इस पर अभी तक असमंजस बरकरार है। यह मामले उठने और शिक्षा मंत्री तक पहुंच जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

इस प्रकार मिलेगा दूध
1-5 कक्षा के बच्चे-150 एमएल दूध
5-8 कक्षा के बच्चे-200 एमएल दूध

सप्ताह में इस प्रकार मिलेगा
सोमवार, बुधवार व शुक्रवार या फिर मंगलवार, गुरुवार व शनिवार
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प्रार्थना सभा के बाद मिलेगा दूध
सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले कक्षा एक से आठवीं कक्षा के बच्चों को दूध प्रार्थना सभा के तुरंत बाद दिया जाएगा। यह दूध मदरसों में भी पढऩे वालों को बच्चों को दिया जाएगा।

तैयारी जारी
-अन्नपूर्णा योजना के तहत स्कूलों को दूध पिलाने की तैयारी चल रही है। रोजाना 18 हजार लीटर दूध पिलाया जाएगा। दूध फीका होगा या मीठा, इस पर अभी पूरी तरह से निर्णय नहीं हो पाया है।
मावली खांट, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारम्भिक
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कांठल में रक्तदान को लेकर जागरुकता जरूरी
रक्तदान को लेकर अब भी कई भ्रांतियां
प्रतापगढ़.
आदिवासी बाहुल्य कांठल क्षेत्र में रक्तदान को लेकर जागरुकता नहीं है। लोगों में रक्तदान को लेकर कई भ्रांतियां भी हैं। ऐसे में कई बार जिला चिकित्सालय में रक्त नहीं मिलने की परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। हालांकि आवश्यकता वाले लोगों के लिए रक्त की व्यवस्था निकटवर्ती जिलों के ब्लड बैंकों से की जाती है। लेकिन यहां जिले में रक्तदान को लेकर जागरुकता की महती आवश्यकता है। यहां के लोगों में रक्तदान को लेकर भ्रांतियों को दूर किया जाने पर काफी हद तक समस्या से निजात मिल सकती है।
कतराते हंै रक्तदान से
यहां किसी को रक्त की आवश्यकता होने पर जब मरीज के परिजनों से रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाता है, तो वे कतराते हुए बहाना बनाने लग जाते हैं। कई बार तो स्थिति यह हो जाती है कि ब्लड बैंक से ही कई परिजन तो बाहर चले जाते हैं। ऐसे में मरीज को तो रक्त उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन ब्लड बैंक में यूनिट की कमी हो जाती है। लोगों में एक प्रमुख भ्रांति यह है कि रक्तदान से शरीर में कमजोरी आ जाती है। जबकि वास्ततिवकता यह है कि शरीर में एक यूनिट रक्त 24 घण्टों में पुन: तैयार हो जाता है। इसके साथ ही रक्तदान से कई बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

कुछ जागरुकता तो आई है
यह सही है कि जिले में रक्तदान को लेकर अभी लोगों में कई भ्रांतियां है। इससे रक्तदान करने से ही कतराते है। यह स्थिति प्रतापगढ़, अरनोद, पीपलखूंट में अधिक है। छोटसादड़ी में रक्तदान को लेकर लोग अधिक जागरुक हैं। धरियावद में भी अन्य इलाकों की तुलना में कुछ जागरुकता तो है। अभी स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर काफी भ्रांतियां है। जिले के विभिन्न संगठनों के माध्यम से शिविर आयोजित होते हैं। जिससे रक्त की कुछ हद तक आपूर्ति हो रही है।
डॉ. ओ.पी. दायमा
वरिष्ठ विशेषज्ञ पैथोलोजी
जिला चिकित्सालय, प्रतापगढ़

जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक का आंकड़ा
जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में 13 जून तक 502 यूनिट रक्त संग्रहित हुआ है। इसी प्रकार वर्ष 2017 में कुल 2530 यूनिट रक्त आया। इस वर्ष कुल 32 शिविर लगाए गए। इन शिविरों में 1351 यूनिट रक्त का संग्रहण किया गया।

पांच वर्ष में शिविर और यूनिट की स्थिति
वर्ष 2014 10 शिविर 422 यूनिट
वर्ष 2015 18 शिविरों 768,
वर्ष 2016 --- 656,
वर्ष 2017 32 शिविरों 1351 यूनिट
वर्ष 2018 में (मई तक) 11 शिविरों 502 यूनिट

छोटीसादड़ी में शिविर का ब्लड नीमच और उदयपुर
जिले के छोटीसादड़ी में लगाए जाने वाले शिविरों का रक्त उदयपुर और नीमच चिकित्सालयों के ब्लड बैंक में पहुंचाया जाता है। यहां की विभिन्न संस्थाएं उदयपुर और नीमच से जुड़ी हुई है। इस कारण यहां से शिविरों में संग्रहित रक्त नीमच और उदयपुर जाता है।

इन्हें तो समय पर चाहिए ही होता है रक्त
गौरतलब है कि जिले में थैलेसीमिया से ग्रसित 15 बच्चों सहित अन्य कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान व दुर्घटना के आवश्यकता होने पर रक्त उपलब्ध कराना अति आवश्यक होता है। इसके अलावा जिले में दो रोगी ए प्लास्टिक एनिमिया रोग से ग्रसित है। इन रोगियों को प्रति माह एक-एक यूनिट की आवश्यकता होती है। थैलेसीमिया से ग्रसित रोगियों को एक या दो यूनिट की आवश्यकता होती है।
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