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शहर में अनदेखी से बीमारियां की आशंका

-शहर में जगह-जगह गंदगी, जमा पानी, कीचड़ और गाजर घास की समस्या
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pratapgarh

अनदेखी से बीमारियां की आशंका

प्रतापगढ़. जिधर देखो उधर गंदगी, जगह-जगह भरा पानी व कीचड़ और उनमें पनपते मक्खी-मच्छर। शहर की विभिन्न कॉलोनियों में यह हालात लोगों की परेशानियों और बीमारियों का सबब बना हुआ है। इनके चलते जहां दुर्गन्ध के चलते लोगों का बुरा हाल है वहीं बीमारियां फैलने की आशंका भी बढ़ी हुई है। खाली भूखण्डों में कचरा और यहां-वहां उगी गाजर घास व झाड़-झंखाड़ भी यहां की नियति बने हुए हैं। जिस पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। आम दिनों में तो गंदगी की समस्या रहती ही है लेकिन बारिश के बाद तो कोढ़ में खाज जैसी स्थिति हो गई है जो लोगों के लिए खासी मुसीबत का सबब बनी हुई है।
खाली भूखंड बनाम कचरापात्र
कॉलोनियों में खाली पड़े भूखंड भी खासी मुसीबत का कारण बने हुए हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान सख्ती से भूखंडों में कचरा डालने पर सख्ती बरती गई थी वहीं नगरपरिषद की ओर से भी इनकी सफाई की गई थी लेकिन अभियान समाप्त होने के बाद से ये फिर से कचरा पात्र बनने लगे हैं। बारिश के दिनों में और नालियों से पानी की उचित निकासी नहीं होने से पानी इनमें जमा हो जाता है। ऐसे में यह कचरे, गंदगी व बरसाती पानी के छोटे तालाब बन जाते हैं। यह भूखंड मक्खी-मच्छरों के पनपने व जहरीले जीव-जन्तुओं के आश्रय स्थल बनते जा रहे हैं। ऐसे में जहां इनसे बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है वहीं जानवरों के काटने का डर भी रहता है। शहर की बाहरी कॉलोनियों में यह समस्या अधिक बनी हुई है। यहां लोगों ने व्यावसायिक दृष्टि से भूखण्ड तो खरीद लिए लेकिन उन पर निर्माण नहीं किया गया। शहर के नाकोड़ा नगर, गौतमनगर, हनुमान नगर, मालवा कॉलोन, मालीखेड़ा, बगवास, तिलक नगर आदि कॉलोनियों में इन भूखंडों में जमा बरसाती पानी व गंदगी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है।
नालियां जाम की समस्या
अधिकांश नई कॉलोनियों में नालियां नही होने और उनके टूटे हुए और जाम होनेे के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंदे पानी की निकासी की व्यापक व्यवस्था के अभाव में यहां-वहां गंदा पानी फैले रहना रोजमर्रा की बात है। नालियां जाम होने के कारण गंदे पानी की निकासी नहीं होने से वह सडक़ों और खाली भूखंडों में फैल जाता है। जिनमें मक्खी-मच्छर पनप कर बीमारियों का कारण बनते हैं।
गाजर घास का प्रकोप
शहर में जगह-जगह उगी गाजर घास भी परेशानी का सबब बन गई है। विभिन्न कॉलोनियों में खाली पड़े सैंकड़ों भूखण्डों पर बड़ी तादाद में गाजर घास के पौधे उगे हुए हैं, जो लोगों के लिए विशेषकर श्वास रोगियों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं। गाजर घास स्वत: उगने वाली खरपतवार है जो खाली पड़े ऐसे स्थानों पर उगती है जहां साफ-सफाई नहीं होती है। ऐसे में विभिन्न कॉलोनियों के खाली भूखण्ड इनके लिए मुफीद जगह साबित होते हंै और ये आसानी से यहां उग जाती है। शहर में इस समय कई ऐसी कॉलोनियां है, जहां कुछ में मकान बने हुए हैं तो कुछ भूखण्ड खाली पड़े हैं। इन भूखण्डों पर गाजर घास के पौधों ने कब्जा जमा लिया है। गाजर घास के चलते लोगों को एलर्जी व श्वास सम्बंधी गंभीर बीमारियां होने की आशंका रहती है। अस्थमा व अन्य श्वास के रोगियों के लिए तो गाजर घास काफी हानिकारक साबित होती हैं। गाजर घास के पौधों पर लगे फूलों के परागकण हवा मेें घुलकर सांस के जरिए नाक में प्रवेश कर जाते हैं जिसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।