
BJP के दो नेता आमने-सामने। फोटो सोर्स-X (@cameraman_r)
Argument Between Two BJP Leaders: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जहां एक ओर विपक्षी दल सक्रिय हैं, वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी कई जगहों पर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। रानीगंज विधानसभा क्षेत्र में आयोजित BJP के प्रशिक्षण वर्ग कार्यक्रम में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां पार्टी के दो बड़े नेताओं के समर्थक आमने-सामने आ गए। ये कार्यक्रम दिलीपपुर बाजार स्थित भव्या गेस्ट हाउस में चल रहा था।
शुक्रवार को दिलीपपुर बाजार स्थित भव्या गेस्ट हाउस में पृथ्वीगंज मंडल का प्रशिक्षण वर्ग कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में नए लोगों को पार्टी से जोड़ने और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की जानी थी। कार्यक्रम के दौरान रानीगंज के पूर्व BJP विधायक अभय कुमार उर्फ धीरज ओझा अपने समर्थकों के साथ बैठक कर रहे थे।
इसी दौरान समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रह चुके और वर्तमान में BJP के वरिष्ठ नेता प्रो. शिवाकांत ओझा भी कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए। जैसे ही वह अपने समर्थकों के साथ गेस्ट हाउस के गेट पर पहुंचे, अंदर मौजूद धीरज ओझा भी बाहर आ गए।
दोनों नेताओं के आमने-सामने आते ही उनके समर्थकों के बीच अपने-अपने नेता के समर्थन में नारेबाजी शुरू हो गई। धीरे-धीरे यह नोकझोंक बढ़ती गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मारपीट की नौबत आ गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया। दिलीपपुर थाना प्रभारी बलराम सिंह ने बताया कि समय रहते हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया और किसी बड़े विवाद को टाल दिया गया।
बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच विवाद की मुख्य वजह 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर टिकट की दावेदारी है। प्रो. शिवाकांत ओझा पहले रानीगंज से विधायक रह चुके हैं और BSP के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। वहीं, धीरज ओझा भी दोबारा इस सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। इसी वजह से दोनों खेमों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है।
यह पहली बार नहीं है जब दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच टकराव हुआ हो। कुछ महीने पहले भी पूर्व विधायक और पूर्व प्रमुख के समर्थकों के बीच विवाद हुआ था, जिसमें मामला थाने तक पहुंचा और मुकदमा दर्ज किया गया था।
इस घटना ने भाजपा के अंदर चल रहे गुटबाजी और मतभेदों को उजागर कर दिया है। सियासी जानकारों की माने तो आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी के लिए यह एक चुनौती बन सकती है, जिसे समय रहते पार्टी संभालना जरूरी होगा।
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Updated on:
04 Apr 2026 12:31 pm
Published on:
04 Apr 2026 12:29 pm
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