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प्राइमरी स्कूलों जैसी है नए कॉलेजों की हालत

हकीकत: जरूरी संसाधन है न पर्याप्त स्टाफ, सात विषय मंजूर, लेकिन दो-तीन में ही हो रही पढ़ाई
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प्राइमरी स्कूलों जैसी है नए कॉलेजों की हालत

प्राइमरी स्कूलों जैसी है नए कॉलेजों की हालत



प्रतापगढ़.पीपलखूंट. राज्य सरकार ने प्रदेश में आननफानन में नए कॉलेज खोलकर श्रेय तो ले लिया, लेकिन इन कॉलेजों के लिए समुचित स्टाफ और जरूरी संसाधन अब तक नहीं जुटाए गए। प्रतागपढ़ जिले में खोले गए दो नए सरकारी कॉलेजों गल्र्स कॉलेज प्रतापगढ़ और राजकीय महाविद्यालय पीपलखूंट के हैं। यहां पढ़ाई शुरू हो गई लेकिन आधे अधूरे संसाधनों के साथ। दोनों ही कॉलेजों में अभी पूरा स्टाफ नहीं आया। फर्नीचर सहित अन्य संसाधन भी नहीं है। विद्यार्थी जमीन पर दरी बिछाकर पढ़ रहे हैं। फिलहाल दो तीन विषयों में पढ़ाई शुरू हो पाई है। अभी कॉलेजों को स्थायी जगह भी आवंटित नहीं हुई। अस्थायी जगह में ही कक्षाएं चलाई जा रही है। इन कॉलेजों में सात विषय स्वीकृत किए थे। लेकिन अभी दो या तीन विषयों की कक्षाएं शुरू हो पाई है।
पीपलखूंट में करीब 700 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, वहीं गल्र्स कॉलेज प्रतापगढ़ में 400 छात्राएं हैं। पत्रिका ने दोनों कॉलेजों के हालात का जायजा लिया।
सरकार ने इस वर्ष जिला मुख्यालय पर गल्र्स कॉलेज और पीपलखूंट में कॉलेज की घोषणा की है। यहां अच्छी संख्या में प्रवेश हुए हैं। पीपलखूंट में करीब 700 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, वहीं गल्र्स कॉलेज प्रतापगढ़ में 400 छात्राएं हैं।हालत यह है कि दिसम्बर आने वाला है, लेकिन इन कॉलेजों में अभी न तो स्टाफ की पूरी नियुक्ति हुई है और न ही अस्थायी भवनों में कक्षाएं लगनी शुरू हुई है।
प्रदेश में 50 कॉलेज खोलने की हुई थी घोषणा: गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में प्रदेश में 50 नए कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। इन कॉलेजों में से 22 में इसी सत्र से पढ़ाई शुरू होनी थी। मुख्यमंत्री ने इस घोषणा के दौरान कहा था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार ऐसे पहलू हैं, जिन पर सरकार का मुख्य फोकस है। इस दौरान यह भी बताया गया था कि 22 ऐसे संचालित कॉलेज जिनके भवन नहीं बने हैं, उनके भवन का निर्माण करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं।
नहीं हुआ भूमि का चयन
प्रतापगढ़ गल्र्स कॉलेज और पीपलखूंट का कॉलेज फिलहाल अस्थायी जगहों में हीचल रहा है। नोडल अधिकारी के रूप में राजकीय पीजी कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य ने जिला कलक्टर को दोनों कॉलेजों के लिए नए भवनों के लिए भूमि आवंटन को लेकर पत्र दिया था। लेकिन इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रतापगढ़ के गल्र्स कॉलेज के लिए पीजी कॉलेज के पास यूजीसी गल्र्स हॉस्टल की बिल्डिंग में दो कमरे आवंटित किए गए हैं। जबकि पूरा हॉस्टल खाली पड़ा है। दो कमरों में भी एक कमरे में स्टाफ बैठता है। यह कमरा भी इतना छोटा है कि इसमें पांच से ज्यादा छात्राएं नहीं बैठ सकती। इस कमरे को फिलहाल कॉलेज स्टाफ ने अपने काम के लिए उपयोग में ले रखा है। दूसरे कमरे में अभी फर्नीचर नहीं लगाया गया। देखने में यह कमरा हॉस्टल का रूम ही नजर आता है। जिसमें वार्डरोब और वॉशरूम बना हुआ है। कहीं से भी यह कमरा कक्षाकक्ष नहीं है। इसमें फिलहाल फर्नीचर पूरा भी नहीं लगाया गया। छात्राओं को दरी पर बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। फिलहाल यहां दो विषयों इतिहास और हिन्दी की कक्षाएं चल रही है। जबकि सात विषय मंजूर है। ये दो विषय भी पीजी कॉलेज के प्राध्यापक आकर पढ़ाते हैं। गल्र्स कॉलेज में मात्र एक कार्यवाहक प्रचार्य की नियुक्ति हुई है।

पीपलखूंट में राजकीय कॉलेज अस्थायी भवन में चल रहा है। यहां करीब 700 प्रवेश है। इनमें से प्रतिदिन 250-300 विद्यार्थी आ रहे हैं। कॉलेज में प्राचार्य के रूप में प्रो हरदेव सिंह को लगाया गया है। कुल सात विषय अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, हिन्दी, अंग्रेजी, भूगोल और लोकप्रशासन की मंंजूरी मिली थी। यहां चार विषयों के प्राध्यापक अर्थशास्त्र, इतिहास,राजनीति विज्ञान की कक्षाएं चल रही है। कॉलेज में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है। विद्यार्थी नीचे दरी बिछाकर पढ़ रहे हैं। प्राचार्य को वित्तीय अधिकार नहीं मिले । इसके कारण शिक्षण सामग्री की व्यवस्था नहीं हो रही। शौचालय की कमी है। स्टाफ को समय पर वेतन नहीं मिल रहा। कॉलेज में ऑफिस कामकाज के लिए कम्प्यूटर ऑपरेटर, चतुर्थश्रेणी कर्मचार आदि की व्यवस्था नहीं है।