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पोषाहार बनता है पर नहीं होता बच्चों का पोषण

प्रतापगढ़ जिले में आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थिति
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पोषाहार बनता है पर नहीं होता बच्चों का पोषण

प्रतापगढ. जिला मुख्यालय पर आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थिति अन्यंत खराब है। कई केन्द्र नियमित रूप से नहीं खुलते। भवन की कमी है। आंगनबाड़ी केन्द्र में आने वाला स्टाफ समय पर नहीं आता। बच्चों के स्वास्थ्य की जांच भी समय पर नहीं होती। पत्रिका टीम ने गुरुवार को शहर के दो आंगनबाड़ी केन्द्रों बगवास कच्ची और तालाबखेड़ा बस्ती के आंगनबाड़ी केन्द्रों का जायजा लिया। इन दौरान सामने आया कि आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों की नियमित उपस्थिति नहीं होती। पोषाहार बनता है, लेकिन बच्चों का पोषण पूरा नहीं हो पाता।
केस एक- आंगनवाड़ी केन्द्र बगवास कच्ची बस्ती
आंगनबाड़ी केन्द्र खुलने का समय सुबह दस से दोपहर दो बजे तक का होता है। यहां केन्द्र खुला हुआ तो था। आंगनबाड़ी सहायक नहीं थी। सुबह 11 बजे दो बालिकाएं बैठी हुईथी। दोनो बालिकाओं से पूछा तो उन्होंने बताया कि मैडम बच्चों को बुलाने गईहै। आंगनबाड़ी केन्द्र के पास रहने वाले एक युवक ने बताया कि आंगनबाड़ी समय पर नहीं खुलता। बच्चों के लिए पूरी सुविधा नहीं है। पीने के पानी की समस्या है। आंगनबाड़ी के पास लगा हैंण्डपम्प अरसे से खराब पड़ा है। बच्चों से पूछने पर वे बोले कि आंगनबाड़ी में खाना रोज मिलता है। लेकिन खाना कैसा बनता है यह नहीं बताया। पास ही खड़े एक स्थानीय निवासी ने बताया कि खाने के नाम पर खानापूर्ति होती है। केन्द्र पर डॉक्टर चैक अप के लिए कभी नहीं आया।

केस दो- आंगनबाड़ी केन्द्र तालाबखेड़ा
यह आंगनवाड़ी केन्द्र दीपेश्वर तालाब के आगे कच्ची बस्ती इलाके में स्कूल परिसर में बना हुआ है। सुबह करीब सवा ग्यारह बजे पत्रिका टीम वहां पहुंची तो केन्द्र पर ताला लगा हुआ था। केन्द्र के बाहर दो तीन छोटे बच्चे हाथ में खाने का बरतन लेकर खेल रहे थे। उन्हें आंगनबाड़ी केन्द्र में मिलने वाले नाश्ते का इंतजार था। थोड़ी देर में आंगनबाड़ी सहायिका वहां आ गई। उसने बोला कि उसके बच्चे की तबीयत खराब थी। अस्पताल दिखाने चली गई, इसलिए लेट हो गई। अन्यथा हमेशा सुबह दस बजे आ जाती हूं। केन्द्र खुलते ही बच्चे चहकते हुए अंदर आ गए। केन्द्र पर सुबह मात्र सात-आठ बच्चे थे। जबकि वहां कुल 26 बच्चों का नामांकन था।