5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

विभिन्न मांगों को लेकर प्रतापगढ़ रहा पूर्णतया बंद

-विभिन्न मांगों को लेकर संविधान बचाओ संघर्ष समिति ने किया था आह्वान
2 min read
Google source verification
pratapgarh

विभिन्न मांगों को लेकर प्रतापगढ़ रहा पूर्णतया बंद

प्रतापगढ़. संविधान बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर विभिन्न मांगों को लेकर भारत बंद के तहत मंगलवार को प्रतापगढ़ भी बंद रहा। बंद पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा। समिति की ओर से सोमवार को बंद के ऐलान के चलते सुबह से ही दुकानें बंद रही।
रैली निकाल कराया बंद
हालांकि पहले से ऐलान के चलते सुबह से ही अधिकांश दुकानें बंद रही वहीं कुछ दुकानें खुली थी। सुबह समिति के लोग शहर के विभिन्न मार्गो पर रैलियों के रुप में निकले और जो दुकानें खुली थी उन्हें बंद करवाया।
आपातकालीन सेवाएं रही
बंद के दौरान आपातकालीन सेवाएं खुली रही। ऐसे में मेडिकल स्टोर्स, निजी चिकित्सालय और क्लिनिक तथा पेट्रोल पम्प आदि खुले रहे।
स्कूल-कॉलेज भी खुले रहे
बंद के दौरान स्कूल-कॉलेज भी खुले रहे। ऐसे में शिक्षण कार्य पर किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
चाय-नाश्ते को तरसे
बंद के चलते सुबह से ही चाय-नाश्ते तक की दुकानें बंद रही। ऐसे में लोगों को चाय-नाश्ते तक के लिए तरसना पड़ा। वहीं भोजनालय आदि भी बंद रहे। ऐसे में बाहर से आए लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
शाम को खुलने लगी दुकानें
बंद को लेकर दिनभर दुकानें बंद रही लेकिन शाम होते-होते दुकानें खुलने लगी। हालांकि बड़े प्रतिष्ठान बंद ही रहे लेकिन छोटी दुकानों और चाय-नाश्ते आदि की दुकानें खुल गई।
यह है मांगे
1. 8 अक्टूबर 2013 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के समर्थन और चुनाव आयोग के विरोध में बंद
2. 13 पाईंट रोस्टर के विरोध में
3.10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण का विरोध
4. चुनाव आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के विरोध में इवीएम से सम्बंधित
5. आदिवासियों को उनके जल, जंगल, जमीन से बेदखल करना तथा संविधान की 5वीं और 6वहीं अनुसूची लागू ना करने के विरोध में
6.एससी, एसटी, ओबीसी आरक्षण में वर्गीकरण लागू ना करने का विरोध
7. एससी, एसटी, ओबीसी एवं धार्मिक अल्पसंख्यक लोगों को निजीकरण में आरक्षण लागू ना करने के विरोध
8. जाति आधारित गिनती करके शत प्रतिशत आरक्षण लागू ना करने के विरोध में
9. धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय को संरक्षण के लिए कम्यूनल वॉयलेंस प्रेवेंशन एक्ट ना बनाने के विरोध में