5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

राजस्थान में शीतलहर और पाले से नुकसान, बढ़ी किसानों की चिंता

राजस्थान में शीतलहर और पाले से नुकसान, बढ़ी किसानों की चिंता
less than 1 minute read
Google source verification

प्रतापगढ़।

सर्दी और शीतलहर के कारण जहां जनजीवन प्रभावित हो रहा है। वहीं रबी की फसलों में नुकसान की भी आशंका बढ़ती जा रही है। जिले में कई इलाकों में रविवार रात को शीतलहर से फसलें प्रभावित हुई है। एक माह पहले भी पाले की मार झेल चुकी फसलों में फिर से नुकसान की आशंका ने भूमिपुत्रों को चिंता में डाल दिया है। हालांकि अभी पाले से नुकसान कम ही हुआ है। लेकिन मौसम इसी प्रकार का रहा तो और भी खराबा होने की आशंका है।

इन फसलों में नुकसान की आशंका

शीतलहर और पाले की आशंका से सभी फसलों में नुकसान की होने की संभावना है। ऐसे में अति संवेदनशील फसल अफीम में नुकसान की आशंका अधिक होती है। इसी प्रकार चना, मैथी, सरसों में भी नुकसान होता है। क्षेत्र में गत दिनों से शीतलहर की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग की ओर से सर्वे किया जा रहा है।

सहायक कृषि अधिकारी आशीष आंजना, सहायक कृषि अधिकारी ललित गिरी ने क्षेत्र का दौरा किया। किसानों के खेतों में अफीम फसल में लगने वाले रोगों व कीटों की जानकारी दी। भ्रमण के दौरान अफीम की फसल में अभी मुख्य रूप से मौसम उतार-चढ़ाव व बदलाव के कारण काली मस्सी व तना सडऩ की मुख्य समस्या पाई गई।

मौके पर ही किसानों को काली मस्सी बीमारी की जानकारी दी गई तना सडऩ, काली मस्सी के लिए रिडोमिल 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करने की सलाह दी। मेटा एक्सएल क़ार्बेंडाइजिम का छिडक़ाव की सलाह दी गई। तना सडऩ के लिए बोरान की सिंचाई जल के साथ देने का सुझाव दिया। उर्वरकों का उचित मात्रा में उपयोग करने के बारे में सलाह दी गई।