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रोजा न रखने वालों का परिणाम

रोजा न रखने वालों का परिणाम
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pratapgarh

रोजा न रखने वालों का परिणाम

रोजा न रखने वालों का परिणाम
सबसे पाक पवित्र माह रमजान की जितनी तारीफ कि जाए कम है । इस मुबारक माह में रोजा रखना सभी मुस्लिम के लिए अनिवार्य है। बिना किसी विशेष कारण के रोजा नहीं रखना गुनाह है। जान बूझकर कर रमजान का रोजा छोडऩा महा पाप माना गया है। हजरत अबू उमामा रजि. के मुताबिक नबी मोहम्मद स.अ.व. को फरमाते हुए सुना... मैं सोया हुआ था, सपने में मेरे पास दो फरिश्ते आए जिन्होंने मेरे बाहों को पकडकऱ मुझे उठाया और कठिन चढ़ाई वाले पहाड़ तक ले जाकर मुझे उस पर चढऩे के लिए कहा। मैंने कहा मैं उस पर चढ़ नहीं सकता उन्होंने कहा कोशिश करो। हम आपकी मदद करेंगे। मैंने उस पर चढऩा शुरु किया। यहां तक की पहाड़ की चोटी तक पहुंच गया। तो मैंने वहां चीखने और चिल्लाने की आवाजें सुनी। मंैने पूछा ये आवाजें किसकी है। क्यों चिल्ला रहे है? जवाब यह दिया गया कि ये दोजख (नरक है ये लोग नकरवासी) है। ये वही लोग है जो रमजान के दिनों में खूब खाया पीया करते थे। रोजा नहीं रखते थे। इसलिए इन लोगों पर रमजान माह की कद्र , इज्जत , अहतराम नहीं करने के बदले ये अजाब नाजिल हो रहा है। इसलिए रमजान माह का खूब अहतराम किया जाना चाहिए। बिना किसी वाजिब कारण के रोजा नहीं छोडऩा चाहिए। रोजा किसी भी हालत में माफ नहीं है।
आलिम रफिकउल इस्लाम, इमाम बिलाल मस्जिद

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उफ ये गर्मी कर ना दे बीमार
-एहतियात नहीं बरती तो धूप में निकलना पड़ सकता है भारी
प्रतापगढ़जिले में तापमापी का पारा काफी बढ़ा हुआ है। रोजाना अधिकतम तापमान 43 से 45 तो न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री के आसपास चल रहा है। जिसके चलते तेज गर्मी पड़ रही है। आग उगलता सूरज और दिनभर चलते लू के थपेड़े कभी भी, किसी को भी अपनी चपेट में ले सकते हैं। ऐसे में इसके लिए काफी एहतियात बरती जाने की जरुरत है।
लू तापघात के लक्षण
-सिर का भारीपन व सिरदर्द
-अधिक प्यास लगना
-शरीर में भारीपन के साथ थकावट
-जी मिचलाना, सिर चकराना व शरीर का तापमान बढऩा।
-पसीना आना बंद होना
-मुंह लाल हो जाना, त्वचा का सूखा होना।
-बेहोशी जैसी स्थिति का होना
यह आती है समस्या
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ धनेश सोनी ने बताया कि गर्मी बढऩे के साथ ही शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इससे शरीर में खनिज लवणों के साथ ही पानी की कमी हो जाती है। जिसके कारण लाल रक्त कणिकाएं रक्त वाहिनियों में टूट जाती हैं। ऐसे में रक्त संचार में कमी आती है, और प्राथमिक एवं समुचित उपचार की कमी से लू व तापघात के रोगी की मौत हो सकती है।
बचाव के उपाय
लू तापघात से प्राय: कुपोषित बच्चे, वृद्ध, गर्भवती महिलाऐं, श्रमिक और ज्यादा देर सूरज की रोशनी में रहने वाले शीघ्र प्रभावित होते हैं। ऐसे में सुबह 10 से शाम 6 बजे तक तेज गर्मी से बचाने के लिए छायादार ठंडे स्थान पर रहे। तेज धूप मे ना निकले यदि निकलना आवश्यक हो तो ताजा भोजन करके उचित मात्रा में ठंडे जल का सेवन करके बाहर निकले। थोड़े-थोड़े अन्तराल में ठंडे पानी, शीतल पेय, छाछ, ताजा फलों के रस का सेवन करते रहे। तेज धूप में बाहर निकलने पर छाते का उपयोग करें या कपडे से सिर, मुंह व बदन को ढककर रखें।
यह करें प्राथमिक उपचार
लू तापघात से प्रभावित रोगी को तुरंत छायादार ठंडे स्थान पर लिटा दें। रोगी के कपडों को ढीला कर दें तथा उसकी त्वचा को गीले कपड़े से स्पंज करते रहें। रोगी होश में हो तो उसे ठन्डा पेय पदार्थ दें। रोगी को यदि बेहोशी आ जाए तो पानी के छींटे डालकर ठंडा पिलाएं। हालात ज्यादा बिगडऩे पर उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार के लिए लेकर जाएं।
क्या करें क्या ना करें
जहां तक संभव हो घर में ही रहें तथा हर हाल में सूर्य के सीधे सम्पर्क से बचें। संतुलित हल्का व नियमित भोजन करें। घर से बाहर अपने शरीर को कपडे या टोपी से ढक़ कर रखें। खिड़कियों को दरवाजे, परदेे ढक कर रखे ताकि बाहर की गर्मी को अन्दर आने से रोका जा सके। बच्चों को कभी भी बन्द वाहन में अकेला ना छोड़े। मादक पेय पदार्थो का सेवन ना करें।