
होली को लेकर सजने लगी दुकानें
- जिले में एक-दो वर्षों से खेली जाने लगी धुलण्डी
- जिले में तेरस पर खेलते है रंग
प्रतापगढ़. जिले में होली पर्व नजदीक आते ही तैयारियां शुरू हो गई है। बाजारों में ग्राहकी बढ़ गई है। दुकानों पर लोग खरीदारी के लिए उमड़ रहे है। वहीं दूसरी ओर करीब एक दो वर्षों से धुलण्डी खेली जाने लगी है। जिसको लेकर शहर में बाजार भी सजने लगे है। देश भर में जहां होली के दूसरे दिन धुलंडी का पर्व मनाया जाता है, वहीं प्रतापगढ़ जिले में राजवंश के चिराग की याद में शोक के चलते यहां करीब दो सौ सालों से धुलण्डी का पर्व नहीं मनाया जाता है।
यह बताया जाता है कारण
इतिहासकार, साहित्यकारों और विद्वानों के मुताबिक 1696 में तत्कालीन महाराज प्रतापसिंह को देवगढ़ ठिकाना रास नहीं आने के बाद करीब 10 किलोमीटर दूर समतल भूमि पर प्रतापगढ़ को अपनी दूसरी रियासत बनाया था। किंवदंती है कि बाद के वर्षों में सत्तासीन हुए महाराजाओं में से एक की मृत्यु होली के दिन हुई थी। जिसके चलते 12 दिन का शोक मनाया जाता आ रहा है। जिसके बाद जिले में परम्परा के अनुसार 13 वें दिन रंग तेरस के अवसर पर रंगों का पर्व मनाया जाता है। हालांकि अब समय के साथ-साथ जिले में बाहर से आकर रहने वाले लोग कुछ-कुछ जगहों पर धुलण्डी पर रंगों की बौछार के साथ ही होली खेलते है। इसी कारण जिले में अब धीरे-धीरे होली पर रंगों की बौछार होने लगी है।
सजने लगी दुकानें
जिले में वैसे थोड़ी बहुत जगह धुलण्डी का पर्व नहीं मनाया जाता है लेकिन अब कई-कई जगह धुलण्डी का पर्व खेलने के कारण शहर में भी होली के रंगों व पिचकारियों की दुकानें सजने लगी है। वहीं दुकानों पर लोग अपनी जरूरत के अनुसार सामानों की खरीदे में लगे हुए है। इसके साथ ही जिले के कस्बों और गांवों में भी ग्रामीणों की ओर से होली की तैयारियां की जा रही है।
शहर सहित गांवो में हुआ होलिका रोपण
शहर सहित गांवों में होली को लेकर होलिका रोपण होने लगा है। होलिका रोपण को लेकर शहर समेत गांवों में में खासा उत्साह देखने को मिलता है।
पापडिय़ों की भी सजी दुकानें
होली के पर्व को लेकर शहर के बाजारों में पापडिय़ों की दुकानें भी सजने लगी है। वहीं घरों पर भी पापडिय़ां बनाई जा रही हैं। जिसमें परिवार की महिलाएं मक्का, ज्वार, चावल, गेहूं आदि की पापडिय़ां बनाने में लगी हुई है।
---
Published on:
18 Mar 2019 10:51 am
