
नौनिहालों को पिलाया अमृत का घोल, देखें पूरी खबर
प्रतापगढ़. बच्चों को दस्त और कुपोषण से बचाने के लिए सोमवार को गहन दस्त नियंत्रण पखवाड़े की शुरुआत की गई।जिला चिकित्सालय में आरसीएचओ डॉ दीपक मीणा व शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ धीरज सेन ने पांच साल तक के बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाकर पखवाड़े की शुरुआत की। इसी के साथ जिलेभर के स्वास्थ्य केंद्रों एवं आंगनवाड़ी पर पखवाड़े का विधिवत आगाज किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दिनेश खराड़ी ने बताया कि इस अभियान के दौरान जिन घरों में बच्चे उल्टी, दस्त रोग के पाए जाते हैं। उन घरों में निशुल्क ओरआरएस के पैकेट व जिंक की टेबलेट वितरित कराई जाएंगी। साथ ही ओआरएस बनाने की विधि के बारे में जानकारी दी जाएगी। आरसीएचओ डॉ दीपक मीणा ने बताया कि राजकीय चिकित्सा संस्थानों में ओआरएस जिंक कॉर्नर स्थापित करने के साथ ही वहां ओपीडी-आईपीडी में बच्चों के लिए विशेष उपचार सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि गांव स्तर पर संचालित गांव स्वास्थ्य स्वच्छता पेयजल व पोषण समितियों के माध्यम से भी गांव-ढाणियों तक अभियान गतिविधियां क्रियान्वित की जाएगी। जिला चिकित्सालय में पखवाड़े के शुभारंभ के अवसर पर परमेश्वर सिंह सिसोदिया, नर्स ग्लोरियाना आदि मौजूद थे।
अमृत की तरह है ओआरएस का घोल
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ धीरज सेन ने बताया कि गर्मी में बच्चों के शरीर में पोषण व नमक की कमी आ जाती है। जिसके कारण वे उल्टी-दस्त व शरीर में पानी की कमी के शिकार हो जाते हैं। यह समस्या जन्म से 5 वर्ष तक के बच्चों में अधिक होती है। ऐसी स्थिति में ओआरएस जिंक की गोलियां बच्चों के लिए अमृत के समान है। जिंक की गोली से दस्त की अवधि और तीव्रता दोनों कम हो जाती है एवं बच्चे के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। इसी प्रकार ओआरएस के घोल से शरीर में नमक की कमी दूर हो जाती है व पानी की कमी की पूर्ति होती है।
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वन्यजीव गणना आज से
प्रतापगढ़. वन विभाग की ओर से जंगलों में वाटर ***** पद्धति से वैशाखी पूर्णिमा पर होने वाली वन्यजीवों की गणना अब ज्यैष्ठ पूर्णिमा पर मंगलवार से होगी। उदयपुर संभाग के जंगलों में 29 मई सुबह 10 बजे से 30 मई सुबह 10 बजे तक वन्यजीव गणना की जाएगी। इसकी तैयारी की गई है। गौरतलब है कि इस वर्ष उदयपुर संभाग में बारिश अधिक होने से जंगलों में अधिकांश स्थानों पर पानी की उपलब्धता को देखते हुए यह गणना एक माह आगे बढ़ाई गई है। उपवन संरक्षक अमरसिंह गोठवाल ने बताया कि इसका प्रमुख कारण यह है कि पानी अधिक स्थानों पर भरा होने से वन्यजीवों की गणना का अनुमान सही नहीं लगाया जा सकता है।
जिले में 77 वाटर ***** पर होगी गणना
इस वर्ष बारिश की अधिकता के कारण विभाग ने जंगल में वाटर ***** भी बढ़ाए है। गत वर्ष जंगल में 70 वाटर ***** पर गणना की गई थी। वहीं इस वर्ष 77 वाटर ***** बनाए गए है। इनमें से छोटीसादड़ी रेंज में 9, प्रतापगढ़ में 18, पीपलखूंट में 11, धरियावद में 17, देवगढ़ में 9 और बांसी रेंज में 15 वाटर ***** पर वन्यजीव गणना की जाएगी।
Published on:
28 May 2018 07:21 pm
