
उल्टी-दस्त की थी शिकायत, झाड़ फूंक कराते रहे परिजन और चली गई दो बहनों की जान...देखे खबर
गांव जम्बूवेला में सोमवार रात की घटना, सीएमएचओ ने लिया हालात का जायजा
प्रतापगढ़. ग्यासपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अंतर्गत गांव जाम्बूवेला में उल्टी-दस्त की समस्या से पीडि़त दो सगी बहनों की सोमवार रात मौत हो गई। मृतकों को उल्टी दस्त की शिकायत थी। परिजन उन्हें अस्पताल ले जाकर इलाज कराने के बजाए भोपाओं से झाड़-फूंक करवा रहे थे। घटना की जानकारी के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने टीम के साथ गांव पहुंचकर हालात का जायजा लिया और गांव में पेयजल स्रोतों और स्थिति का जायजा लिया। सीएमएचओ डॉ दिनेश खराड़ी ने परिजनों से हुई बातचीत के आधार पर बताया कि गांव जाम्बूवेला के तरूभाटफलां में नाथू की बड़ी पुत्री पार्वती (26 ) व कला (16 ) की तबीयत 31 मई की रात को तबीयत बिगड़ी थी। बड़ी बहन पार्वती को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई तो उसे स्थानीय स्तर से झाड़-फूंक करवाया गया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। उसे नाजुक हालात में जिला चिकित्सालय भर्ती करवा दिया, किंतु परिजन अगले ही दिन उसे घर ले आए। यहां आकर उसको फिर झांड़-फूंक के लिए अन्यत्र स्थान पर ले गए। जहां उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और मौत हो गई। जबकि बीमार छोटी बहन कला की तबीयत बिगडऩे पर परिजन घर के नजदीकी देवरा पर ले गए। किंतु उसकी भी मौत बीती सोमवार की रात हो गई। इस घटना की जानकारी के बाद सीएमएचओ डॉ दिनेश खराड़ी मेडिकल टीम के साथ प्रभावित क्षेत्र पहुंचे। सीएमएचओ ने परिजनों से घटना की जानकारी लेकर गांव में सर्वे करवाया। सीएमएचओ डॉ खराड़ी के मुताबिक प्रथम दृष्टया में मामला दूषित भोज्य एवं पेय पदार्थो के सेवन का है, फिलहाल जांच के लिए टीमों ने गांव के पेयजल स्रोतों एवं स्टूल सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भिजवाया है।
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सर्वे में गांव में नहीं मिला कोई बीमार
घटना के बाद मंगलवार दोपहर को चिकित्सकीय टीम द्वारा प्रभावित घर एवं आस पास के 50 घरों में सर्वे किया, जहां पर दो व्यक्ति बीमार मिले, दोनों व्यक्ति को साधारण पेट दर्द की समस्या थी। क्षेत्र में फिलहाल कोई उल्टी-दस्त या गंभीर मामला सामने नहीं आया है।
बिना डिग्री ईलाज अपराध
बिना किसी चिकित्सकीय डिग्री एवं वैद्यता के कोई भी व्यक्ति उपचार नहीं कर सकता है। यदि कोई दवा या इलाज का दावा करता है, तो उस पर मानव जीवन को खतरे का मामला बनता है। ऐसी स्थिति में कानून ने जेल व सजा तय कर रखी है।
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क्या करें
उल्टी दस्त हो या किसी प्रकार की तबीयत बिगड़े, तो सबसे पहले सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या क्षेत्र की आशा एवं एएनएम से संपर्क साधे। आपताकाल की स्थिति में टोल फ्री नंबर 104 व 108 पर जानकारी देकर मदद ली जा सकती है। किसी भी स्थिति में देवरा या झाड़-फूंक अंधविश्वास में नहीं पड़े तुरंत चिकित्सकीय सलाह व इलाज लें।
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झाड़-फूंक में गंवाया समय
परिजनों द्वारा बीमारी से पीडि़तों को इलाज के बजाए उन्हें झाड़-फूंक करवाया गया, जिसकी वजह से दोनों की हालत बिगड़ी। जहां तक उल्टी दस्त के वजह की बात है, तो कोई मूल वजह सामने नहीं आई है, जांच के लिए सैंपल भिजवाए है, रिपोर्ट मिलने के बाद स्थिति साफ होगी।
डॉ दिनेश खराड़ी, सीएमएचओ, प्रतापगढ़
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Published on:
05 Jun 2018 08:49 pm
