7 अगस्त 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अब्बू अतीक और चाचा अशरफ के जनाजे में क्यों नहीं पहुंच पाया था अबान अहमद? 221 दिन बाद कब्र पर पढ़ी थी फातिहा

Atiq Ahmed Son Abaan Death: झांसी सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद की जिंदगी का सबसे भावुक पहलू सामने आया है। आखिर क्यों वह अपने पिता अतीक अहमद और चाचा अशरफ के जनाजे में शामिल नहीं हो सका और क्या कारण था कि 221 दिन बाद वह कब्र पर फातिहा पढ़ने पहुंचा था। जानिए पूरा मामला...
3 min read
Google source verification
Atiq Ahmed

अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की मौत (X Photo Vishal Singh)

Atiq Ahmed Son Abaan Ahmed Funeral Update: माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की झांसी में सड़क हादसे में मौत के बाद उसकी जिंदगी से जुड़ी पुरानी कहानियां फिर से चर्चा में आ गई हैं। अबान झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने जा रहा था तभी यह दर्दनाक हादसा हो गया। अबान की मौत के बाद लोग उस भावुक किस्से को भी याद कर रहे हैं जब वह अपने पिता अतीक अहमद और चाचा अशरफ के जनाजे में शामिल नहीं हो सका था। आइए जानते हैं कि आखिर ऐसी क्या वजह थी कि उसे 221 दिन बाद अपने पिता की कब्र पर जाकर फातिहा पढ़नी पड़ी थी।

'उमेश पाल हत्याकांड' के बाद बदल गई थी जिंदगी

24 फरवरी, 2023 को प्रयागराज में उमेश पाल की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। इस मामले के बाद पुलिस ने अतीक अहमद और उसके परिवार पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। पुलिस कार्रवाई तेज होने पर अतीक के दो नाबालिग बेटे अहजम और अबान घर में अकेले रह गए। सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने दोनों भाइयों को प्रयागराज के राजरूपपुर स्थित बाल संरक्षण गृह भेज दिया। यहीं से उनकी दुनिया उस बाल गृह की चारदीवारी तक सीमित होकर रह गई।

परिवार पर टूटा था दुखों का पहाड़

बाल संरक्षण गृह में रहने के दौरान ही उनके परिवार पर एक के बाद एक कई मुसीबतें आईं। 13 अप्रैल, 2023 को यूपी एसटीएफ ने अतीक के बेटे असद को झांसी में पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया। इसके ठीक दो दिन बाद 15 अप्रैल की रात प्रयागराज में पुलिस हिरासत के दौरान अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस वक्त पूरा देश इस घटना को देख रहा था लेकिन अतीक के दोनों छोटे बेटे बाल संरक्षण गृह में बंद थे।

आखिर जनाजे में क्योंनहीं जा सका था अबान

अतीक और अशरफ की हत्या के समय अबान और उसका भाई अहजम नाबालिग थे। वे बाल कल्याण समिति की कड़ी निगरानी में बाल संरक्षण गृह में रह रहे थे। कानूनी वजहों से उन्हें बाहर जाने या अंतिम संस्कार में शामिल होने का कोई भी आधिकारिक आदेश नहीं मिल पाया। इसी वजह से दोनों भाई अपने पिता और चाचा के आखिरी सफर में शामिल नहीं हो सके। वे न तो जनाजे में जा सके और न ही आखिरी बार उनका चेहरा देख पाए।

221 दिन बाद मिली थी रिहाई

अतीक और अशरफ की हत्या के बाद भी दोनों भाई बाल संरक्षण गृह में ही रहे। करीब 221 दिन बाद 10 अक्टूबर, 2023 को बाल कल्याण समिति के आदेश पर दोनों को उनकी बुआ परवीन कुरैशी की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया। इसके बाद दोनों बाल संरक्षण गृह से बाहर आए।

रिहाई के बाद सबसे पहले पहुंचे कब्रिस्तान

बाल संरक्षण गृह से निकलने के बाद अबान और अहजम सीधे कसारी मसारी कब्रिस्तान पहुंचे। वहां पहुंचकर दोनों ने अपने पिता अतीक अहमद, चाचा अशरफ और भाई असद की कब्र पर फातिहा पढ़ी। जिस जनाजे में वे शामिल नहीं हो सके थे, उसी कब्र पर 221 दिन बाद पहुंचना दोनों भाइयों के लिए बेहद भावुक पल माना गया।

विवादों से भी रहा नाता

बुआ की कस्टडी में जाने के बाद अबान लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहा। साल 2025 में वह तब नजर आया था जब वह नैनी सेंट्रल जेल में अपने भाई अली से मिलने पहुंचा। इसके कुछ समय बाद एक शादी समारोह का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस वीडियो में आपत्तिजनक डायलॉग का इस्तेमाल करने पर प्रयागराज के धूमनगंज थाने में अबान और उसके दोस्त हमजा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।