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एक धर्म को एकमात्र सच्चा बताना अन्य धर्मों का अपमान: इलाहाबाद HC

Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी करते हुए कहा है कि एक धर्म को एकमात्र सच्चा बताना अन्य धर्मों का अपमान है। कोर्ट के मुताबिक इस तरह का बयान अन्य धर्मों का 'अपमान' माना जा सकता है।

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ओबीसी आरक्षण: दो केस सुनेगा सुप्रीम कोर्ट, बाकी 52 पर हाईकोर्ट में दो अप्रेल को सुनवाई

ओबीसी आरक्षण: दो केस सुनेगा सुप्रीम कोर्ट, बाकी 52 पर हाईकोर्ट में दो अप्रेल को सुनवाई (File Photo)

Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने (Allahabad High Court) ने कहा है कि धर्मनिरपेक्ष भारत में किसी भी व्यक्ति द्वारा यह दावा करना कि कोई एक विशेष धर्म ही “एकमात्र सच्चा धर्म” है, पूरी तरह से गलत है। कोर्ट के अनुसार इस तरह का बयान अन्य धर्मों का 'अपमान' माना जा सकता है।

Prayagraj News: कोर्ट ने किया याचिका को खारिज

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी टिप्पणी प्रथम दृष्टया IPC की धारा 295 A के अंतर्गत अपराध है। इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव (Justice Saurabh Srivastava) की पीठ ने मऊ (Mau) के रेवरेंड फादर विनीत विंसेंट परेरा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।

Uttar Pradesh News: क्या है याचिकाकर्ता पर आरोप?

याचिकाकर्ता पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण कृत्य करते हुए किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से उसके धर्म और धार्मिक मान्यताओं का अपमान किया। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 295ए से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि आरोपी प्रार्थना सभाओं के दौरान अक्सर एक धर्म को ही सही या सच्चा धर्म बताते थे, जिससे अन्य धर्मों के अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुंची।

UP News: कोई अवैध मतांतरण नहीं

जांच अधिकारी ने अपनी जांच में यह निष्कर्ष निकाला कि मामले में कोई अवैध मतांतरण नहीं हुआ था। इसके बावजूद पुलिस ने अन्य धर्मों की आलोचना करने के आरोपों को लेकर आरोपपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। याची के वकील ने दलील दी कि न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अपने न्यायिक विवेक का प्रयोग किए बिना ही आरोपपत्र का संज्ञान ले लिया। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि मामले में साक्ष्यों का मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है और निचली अदालत को इस स्तर पर केवल यह देखना होता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं।

Prayagraj: न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने क्या कहा?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा, '' भारत एक ऐसा देश है, जहां संविधान द्वारा परिभाषित धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के तहत सभी धर्मों और विश्वासों के लोग साथ रहते हैं। ऐसे में किसी भी धर्म के बारे में यह दावा करना कि वही एकमात्र सच्चा धर्म है, गलत है, क्योंकि इससे अन्य धर्मों का अपमान होता है।''

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