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जनाजे में भी नहीं हो सकेगा अतीक अहमद के बेटों का मिलन!छोटे भाई अबान के आखिरी दीदार को तरस जाएंगे अली और उमर

Atiq Ahmed Son Abaan Death: प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के पुश्तैनी कब्रिस्तान कसारी-मसारी में सबसे छोटे बेटे अबान अहमद को सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अदालत से याचिका खारिज होने के बाद नैनी और लखनऊ जेल में बंद उसके बड़े भाई अंतिम विदाई में शरीक नहीं हो पाएंगे।
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Atiq Ahmed Son Abaan

अतीक अहमद और उसका बेटा अबान - फोटो पत्रिका नेटवर्क

Abaan Ahmed Funeral: उत्तर प्रदेश के झांसी में हुए सड़क हादसे में अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की मौत हो गई है। यह घटना उस वक्त हुई जब अबान झांसी की जिला जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मुलाकात करने जा रहा था। हाईवे पर अचानक सामने आए एक बेसहारा पशु को बचाने के प्रयास में उसकी क्रेटा कार अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में अतीक के बेटे अबान और उसके एक दोस्त की मौत हो गई, जबकि 3 घायल हो गए।

अंतरिम जमानत के लिए अदालत में याचिका

कानूनी बंदिशों के कारण अबान के दोनों बड़े भाई, उमर और अली, उसे अंतिम विदाई देने के लिए जनाजे में शामिल नहीं हो सकेंगे। नैनी और लखनऊ की जेलों में निरुद्ध दोनों भाइयों की ओर से अदालत में अंतरिम जमानत और पैरोल के लिए विशेष अर्जी दाखिल की गई थी। याचिका में मानवीय संवेदनाओं, पारिवारिक दायित्वों और धार्मिक रीति-रिवाजों का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मांगी गई थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कानूनी प्रावधानों की आड़ लेते हुए इस मांग का कड़ा विरोध किया।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विचाराधीन बंदियों को पैरोल देने संबंधी स्पष्ट वैधानिक प्रावधान न होने का हवाला देते हुए अर्जी को खारिज कर दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश मिश्रा की अदालत ने स्पष्ट किया कि विचारण न्यायालय के पास इस स्तर पर अंतरिम राहत देने का कानूनी अधिकार मौजूद नहीं है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट अवश्य प्रदान की है कि वे राहत के लिए नियमानुसार सक्षम प्राधिकारी अथवा उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं। इस फैसले के बाद परिवार की वह उम्मीद भी टूट गई, जिसमें भाइयों के एक साथ जुटने की संभावना जताई जा रही थी।

छोटे भाई के निधन की खबर से जेल में अली बेहाल

झांसी जेल में बंद अली अहमद के लिए यह घटना बेहद पीड़ादायक साबित हुई है, क्योंकि अबान अपने सभी भाइयों में उसी के सबसे ज्यादा करीब माना जाता था। बीते दस महीनों के भीतर अबान ने नियम का पालन करते हुए करीब 49 बार जेल जाकर अपने भाई से मुलाकात की थी। दुर्घटना वाले दिन भी वह अपने भाई के पढ़ने के लिए प्रेम और साहित्य से जुड़ी दो किताबें लेकर झांसी जा रहा था। जैसे ही जेल प्रशासन के माध्यम से अली तक छोटे भाई के निधन की सूचना पहुंची, वह बैरक के भीतर ही फफक-फफक कर रो पड़ा।

पुश्तैनी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अबान के पार्थिव शरीर को प्रयागराज लाया गया है, जहां कसारी-मसारी स्थित उसके पुश्तैनी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी है। इसी कब्रिस्तान में उसके पिता अतीक अहमद, चाचा अशरफ और बड़े भाई असद की कब्रें भी मौजूद हैं। अतीक के कुनबे पर बीते कुछ वर्षों में आए संकट और आपराधिक मुकदमों के सिलसिले के बीच इस घटना ने परिवार की बची-खुची कड़ियों को भी गहरा झटका दिया है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराने के इंतजाम किए गए हैं।