
जाने क्या है गिफ्ट डीड कानून, जानिए कैसे काम करता है इससे संबंधित कानून
प्रयागराज: कानून में कई कानून बने है। आज आप को बताते हैं गिफ्ट डीह कानून किसे कहते हैं। आइये जानते है यह कानून क्या और इस कानून को कब कहा इस्तेमाल किया जाता है। गिफ्ट जिसे दान कहा जाता है, यह एक आम जीवन का एक बड़ा हिस्सा है। इसमें किसी संपत्ति का दान किसी दूसरे व्यक्ति को किया जाता है। कहा जाता है कि दान में कोई भी प्रतिफल नहीं होता है। जैसे की हम किसी को उसके जन्मदिन पर कोई वस्तु देते हैं तब उसके बदले में उससे कुछ लिया नहीं जाता है, यही दान कहलाता है। ऐसे में बड़ी संपत्तियों का दान कानून द्वारा निर्धारित की गई प्रक्रिया के जरिए ही होता है।
संपत्ति अंतरण अधिनियम किसी भी संपत्ति के हस्तांतरण से संबंधित प्रावधानों को उल्लेखित करता है, जहां मुख्य रूप से अचल संपत्तियों का उल्लेख है। इस अधिनियम में दान को भी परिभाषित किया गया है।
किसी भी संपत्ति को हस्तांतरण करने की प्रक्रिया होती है और प्रकार होते हैं। जैसे विक्रय,दान, हक त्याग, वसीयत और पट्टा। यह सभी किसी भी संपत्ति के हस्तांतरण के प्रकार हैं, इसमें दान भी शामिल है। दान की परिभाषा संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 122 के अंतर्गत प्रस्तुत की गई है, जहां पर दान के कुछ तत्व बताए गए हैं जो इस तरह है। सक्षम पक्षकार दान में पक्षकारों का सक्षम होना आवश्यक होता है। पक्षकारों का सक्षम होना संविदा अधिनियम के अंतर्गत माना जाता है। संविदा अधिनियम में कोई व्यक्ति संविदा करने हेतु कब सक्षम होता है इसका उल्लेख किया गया है।
इस कानून के अंतर्गत अचल संपत्ति में किसी भी मकान जमीन आदि का दान पत्र बनाया जाता है। दान की संविदा आमतौर से घर के पारिवारिक सदस्यों के बीच होती है। जैसे पिता पुत्र के बीच, माता पुत्री के बीच और पति पत्नी के बीच। ऐसे घनिष्ठ रिश्तो में लोग एक दूसरों को संपत्ति दान करते हैं। बाहर के मामले में संपत्ति बहुत कम दान की जाती है। किसी धार्मिक ट्रस्ट या फिर खैराती ट्रस्ट को कोई संपत्ति जरूर दान की जाती है लेकिन साधारण लोगों को आमतौर से कोई संपत्ति दान नहीं की जाती है।
जब घर के सदस्य एक दूसरे को कोई संपत्ति दान करते हैं तब उन्हें ऐसी संविदा में बहुत कम स्टांप ड्यूटी देना होती है, संपत्ति का रजिस्ट्रेशन भी हो जाता है। जैसे कि एक पिता अपने नाम पर रजिस्टर्ड कोई मकान अपने बेटे को देना चाहता है तब पिता दानपत्र को उप पंजीयक के कार्यालय में रजिस्टर्ड करवा सकता है। ऐसे रजिस्ट्रेशन पर बहुत कम स्टांप ड्यूटी लगती है क्योंकि इन व्यवहारों में किसी भी प्रकार का धन का लेनदेन नहीं होता है। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि परिवार के सदस्यों के बीच होने वाले दान के व्यवहार में ही कम स्टांप ड्यूटी लगती है।
दान हमेशा दान होता है
अगर आप किसी भी चल और अचल संपत्ति का दान कर देते हैं तो चल संपत्ति के दान में दान पत्र का रजिस्ट्रेशन आवश्यक नहीं होता है लेकिन अचल संपत्ति के मामले में दान पत्र का रजिस्टर्ड होना बेहद जरूरी है। बगैर रजिस्ट्रेशन के कोई भी दान पत्र वैलिड नहीं माना जाता है।
भारयुक्त संपत्ति
कोई भी भारयुक्त संपत्ति जिस पर किसी प्रकार का कोई कर्ज है, कोई योजना है ऐसी संपत्ति का दान नहीं किया जा सकता। पहले उस संपत्ति का कर्ज चुकाया जाएगा फिर उस संपत्ति का दान किया जाएगा।
Published on:
03 Mar 2022 03:15 pm
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