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‘महाकुंभ पर्व है इसे मेला न बनाएं’, प्रयागपुत्र की श्रद्धालुओं से अपील

Maha Kumbh 2025: मेला विशेषज्ञ और 2019 कुंभ में केंद्र सरकार के विशेष सलाहकार रहे राकेश कुमार शुक्ला ने कहा कि कुंभ पर्व है, इसे मेला ना बनाएं।

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Maha kumbh 2025

Maha Kumbh 2025: "महाकुंभ केवल एक मेला नहीं है, बल्कि यह डेढ़ महीने तक चलने वाला सत्संग और मिलन का महापर्व है, जो मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस महापर्व के महत्व और इसके मूल को समझना आवश्यक है, ताकि वे इसका अधिकतम आध्यात्मिक लाभ उठा सकें।"

तीर्थराज प्रयाग के निवासी और "प्रयाग पुत्र" के नाम से प्रसिद्ध राकेश कुमार शुक्ला ने महाकुंभ के महत्व पर विस्तार से चर्चा। उन्होंने इसे न केवल आध्यात्मिक शुद्धिकरण का पर्व बताया, बल्कि इसे डिजिटल डिटॉक्स का भी माध्यम कहा। अपनी कॉफी टेबल बुक में उन्होंने महाकुंभ के इस पहलू का विशेष रूप से उल्लेख किया है।

'चार हिस्सों में बांटा जा सकता है कुंभ'

मेला विशेषज्ञ और 2019 कुंभ में केंद्र सरकार के विशेष सलाहकार रहे राकेश कुमार शुक्ला ने कहा कि कुंभ पर्व है, इसे मेला ना बनाएं। कुंभ को चार हिस्सों में बांटा जा सकता है। पहला आध्यात्मिक परिकल्पना, दूसरा प्रबंधन, तीसरा अर्थव्यवस्था और चौथा वैश्विक भागीदारी। हर श्रद्धालु के लिए यह समझना आवश्यक है कि कुंभ क्या है? क्यों मनाया जाता है? कैसे मनाया जाता है? और यह महाकुंभ कैसा होगा?

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'मानव कल्याण है हिंदू धर्म का उद्देश्य'

राकेश कुमार शुक्ला ने कहा कि इस धरती का एकमात्र धर्म सनातन वैदिक हिंदू धर्म है, जिसका उद्देश्य नर सेवा, नारायण सेवा के भाव के साथ मानव मात्र का कल्याण करना है। इसका विचार ऋषि मुनियों के सत्संग से शुरू होता है। महाकुंभ को ऋषि, मुनि, यती, योगी, संत, महात्मा और समाज मिलकर बनाते हैं। संतों का कुंभ के माध्यम से यह संदेश है कि व्यवसाय में धर्म होना चाहिए ना कि धर्म का व्यवसाय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक मिनट की रील की बजाय रियल जीवन जीना ही यहां कल्पवास का उद्देश्य है। उन्होंने महाकुंभ को ईश्वरीय संविधान की शक्ति से चलने वाला महत्वपूर्ण पर्व बताया।