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मथुरा विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई टली, अब 10 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

Shri Krishna Janmabhoomi Dispute : मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई 10 अप्रैल तक के लिए टल गई है।

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मथुरा विवाद मामले में सुनवाई टली, PC- Ians

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट में मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मामलों की शनिवार को प्रस्तावित सुनवाई टाल दी गई है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी। इस बहुचर्चित और संवेदनशील मामले पर देशभर की नजरें बनी हुई हैं।

हाईकोर्ट में पिछले कई महीनों से इस विवाद से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। हिंदू पक्ष की ओर से दायर याचिकाओं में शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने और विवादित भूमि पर अधिकार की मांग की गई है। अदालत अब 10 अप्रैल को इन याचिकाओं पर आगे की प्रक्रिया तय कर सकती है।

हाईकोर्ट में लंबित हैं 18 याचिकाएं

वर्तमान में हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष की कुल 18 याचिकाएं लंबित हैं। वहीं, मस्जिद पक्ष ने 22 अगस्त को सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत एक आवेदन दाखिल किया था। इस आवेदन में सभी समेकित मुकदमों की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई है, जिस पर भी अदालत को विचार करना है।

यह मामला केवल हाईकोर्ट तक सीमित नहीं है बल्कि सुप्रीम कोर्ट में भी इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सुनवाई जारी है। दोनों अदालतों में चल रही कार्यवाही के कारण यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

काफी लंबे समय से चल रहा विवाद

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित यह विवादित स्थल लंबे समय से कानूनी और ऐतिहासिक बहस का केंद्र रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि 17वीं सदी में मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में यहां स्थित प्राचीन केशवदेव मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण कराया गया था। उनका कहना है कि यह स्थल भगवान कृष्ण का जन्मस्थान है।

इस विवाद में भूमि स्वामित्व, पूजा के अधिकार और पुरातात्विक जांच जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं, जिन पर अदालत में विस्तृत बहस जारी है।

दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष मस्जिद की ऐतिहासिक और कानूनी वैधता का दावा करता है। इस विवाद में मंदिर की जमीन पर स्वामित्व, पूजा का अधिकार और स्थल की पुरातात्विक जांच जैसे मुद्दे शामिल हैं। वर्तमान में इलाहाबाद हाईकोर्ट में 18 से अधिक याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं।