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टैक्स चोरी मामले में कन्नौज के परफ्यूम कारोबारी पीयूष जैन को मिली जमानत

कन्नौज के इत्र कारोबारी पीयूष जैन को आखिरकार जमानत मिल गई है। टैक्स चोरी के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आठ महीने के बाद पीयूष जैन की जमानत को सशर्त मंजूरी दी है। मतलब करीब 200 करोड़ रुपए कैश मामले में जमानत मिली है।

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कन्नौज के इत्र कारोबारी पीयूष जैन को आखिरकार जमानत मिल गई है। टैक्स चोरी के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आठ महीने के बाद पीयूष जैन की जमानत को सशर्त मंजूरी दी है। मतलब करीब 200 करोड़ रुपए कैश मामले में जमानत मिली है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने पीयूष जैन की जमानत अर्जी को मंजूरी देने के लिए कई शर्तें लगाईं हैं। जिसमें यह निर्देश दिया गया है कि, वह मुकदमे के दौरान सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे। जीएसटी इंटेलिजेंस निदेशालय टीम की तलाशी के दौरान पीयूष जैन के कानपुर और कन्नौज में आवास और कारखाने से 196 करोड़ रुपए से अधिक नकद और 23 किलो सोना जब्त किया गया था। इसके बाद से ही यानि दिसंबर 2021 से पीयूष जैन जेल में बंद हैं। इससे पहले हाई कोर्ट पीयूष जैन को 23 किलो गोल्ड की बरामदगी के मामले में जमानत दे चुका है। दोनों केस में बेल होने के बाद अब पीयूष जैन जेल से बाहर आ सकते हैं।

दिसंबर, 2021 को हुए गिरफ्तार

आरोपी पीयूष जैन विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट-थ्री कानपुर नगर की अदालत में आपराधिक मामला संख्या 7646 ऑफ 2022 में जमानत पर रिहा होने की मांग कर रहे थे। पिछले साल 22 दिसंबर को डीजीजीआई की टीम ने कन्नौज और कानपुर में पीयूष जैन के आवासीय और आधिकारिक परिसरों की तलाशी ली थी जो 28 दिसंबर तक जारी रही। जैन को 26 दिसंबर, 2021 को गिरफ्तार किया गया था।

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पीयूष जैन कहा, वह कई बीमारियों से पीड़ित

पीयूष जैन ने कहाकि, वह ग्लूकोमा, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप की बीमारियों से ग्रसित हैं। इसका इलाज चल रहा है। उन्होंने जमानत याचिका में कहा कि, उन्होंने कर, ब्याज और जुर्माने के रूप में पहले ही 54.09 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया था और ये भी कहा था कि, अगर और भी भुगतान बाकी है तो वो भी दे देंगे।

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हिरासत में पूछताछ की मांग नहीं हुई

इसके अलावा, पीयूष जैन पहले ही आठ महीने से अधिक समय जेल में बिता चुका था और इस अवधि के दौरान विभाग ने उससे हिरासत में पूछताछ की मांग नहीं की थी। जिससे पता चलता है कि उसकी हिरासत की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं थी और इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जा सकता है।

आरोप गंभीर पर बेल से इनकार जरूरी नहीं

हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी की अनुमति देते हुए कहाकि, भले ही आरोप गंभीर आर्थिक अपराध में से एक है। पर यह नियम नहीं है कि हर मामले में जमानत से इनकार किया जाना चाहिए क्योंकि विधायिका द्वारा पारित प्रासंगिक अधिनियम में ऐसी कोई रोक नहीं है।


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