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मौत के आखिरी 30 सेकंड… तड़,तड़,तड़ चली गोलियां, फिर समाप्त हो गया यूपी के इस माफिया का साम्राज्य

अतीक अहमद की जिंदगी माफिया से नेता बनने की कहानी है, जिसमें ताकत, डर और राजनीति शामिल रही। कई हत्याओं और मामलों के बावजूद वह लंबे समय तक कानून से बचता रहा।

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अतीक अहमद की वो कहानी जिसने यूपी को हिला दिया

अतीक अहमद की वो कहानी जिसने यूपी को हिला दिया Source- X

Atiq Ahmed Death Story: यूपी की अपराध और राजनीति की दुनिया में अतीक अहमद का नाम कई दशकों तक खौफ का पर्यायवाची रहा। गरीब परिवार का लड़का कैसे माफिया डॉन बना और फिर नेता, यह कहानी फिल्मी लगती है, लेकिन उसका अंत बेहद खतरनाक और फिल्मी तरीके से हुआ। 15 अप्रैल 2023 की रात प्रयागराज में तड़तड़ाती गोलियों की आवाज के साथ अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की जिंदगी खत्म हो गई। इसी के साथ उनका अरबों का साम्राज्य भी ध्वस्त हो गया।

गरीबी से अपराध की दुनिया में प्रवेश

अतीक अहमद का जन्म 1962 में प्रयागराज में गरीब परिवार में हुआ था। उसके पिता फीरोज अहमद तांगा चलाते थे। पढ़ाई ज्यादा नहीं कर पाया। अतीक अहमद पर महज 17 साल की उम्र में 1979 में पहला हत्या का केस दर्ज हुआ। 1980-90 के दशक में प्रयागराज में गैंगवार का दौर था। चांद बाबा जैसे बड़े गैंगस्टरों के बाद अतीक ने अपना झंडा गाड़ दिया। जमीन कब्जाना, फिरौती मांगना, ठेके हथियाना और हत्याएं… सब उसके गैंग का रोज का काम था। देखते-देखते उसने अरबों की संपत्ति बना ली। उसके पास दर्जनों शूटर थे जो उसके एक इशारे पर कुछ भी कर गुजरते थे।

राजनीति की सीढ़ी और ताकत का चरम

अपराध के साथ-साथ अतीक ने राजनीति में भी हाथ आजमाया। 1989 में पहली बार इलाहाबाद पश्चिम सीट से निर्दलीय विधायक बना। फिर पांच बार विधायक चुना गया। 2004 में फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद भी बना। समाजवादी पार्टी, अपना दल और बसपा जैसे दलों से जुड़ा रहा। राजनीतिक ताकत ने उसके अपराधों को ढाल बना दिया। जेल में रहते हुए भी चुनाव लड़ता और जीतता। उसके खिलाफ 160 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें कई हत्याओं के आरोप शामिल थे। लेकिन सियासी रसूख की वजह से लंबे समय तक बचता रहा।

गिरफ्तारी और साम्राज्य पर संकट

2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद यूपी में माफिया के खिलाफ बड़ा अभियान चला। अतीक का नंबर भी आ गया। 2018-19 में उसे गुजरात की साबरमती जेल में शिफ्ट किया गया। उसकी संपत्तियां कुर्क होने लगीं। उमेश पाल अपहरण मामले में उसकी मुश्किलें बढ़ गईं। फरवरी 2023 में उमेश पाल की हत्या हो गई, जिसमें अतीक का परिवार मुख्य आरोपी बना। इसके बाद अतीक और अशरफ को प्रयागराज लाया गया।

वह खौफनाक रात और अंतिम पल

15 अप्रैल 2023 की रात। अतीक और अशरफ मेडिकल जांच के लिए पुलिस हिरासत में थे। मीडिया से बात करते हुए दोनों बाहर निकल रहे थे। अचानक तीन हमलावर पत्रकार बनकर आए और पास से गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। तड़, तड़, तड़… कुछ ही सेकंड में दोनों जमीन पर गिर पड़े। हमलावरों ने सरेंडर कर दिया। पूरे देश ने टीवी पर यह दृश्य देखा। जांच में पता चला कि हमलावरों का मकसद बदनाम होना और चर्चित होना था।

साम्राज्य का अंत और सबक

इस हत्या के बाद अतीक के बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों पर भी कार्रवाई हुई। उसकी संपत्तियां जब्त हुईं, गैंग बिखर गया। यूपी पुलिस ने उसके पूरे नेटवर्क को तोड़ दिया। अतीक अहमद का साम्राज्य, जो दशकों तक अटूट लगा था, कुछ पलों में खत्म हो गया। यह घटना दिखाती है कि अपराध और राजनीति का गठजोड़ कितना भी मजबूत हो, कानून का शिकंजा अंत में कस ही जाता है।