
रायगढ़. आठ माह पहले जिस किशोर पर अपने पिता का हत्या का आरोप लगा है और कानून को हाथ में लेने के आरोप में उसके खिलाफ अपराध दर्ज कर उसे संप्रेक्षणगृह में भेज दिया गया। अब वो किशोर, बालिग हो गया है, वहीं कानून की रक्षा करने के लिए 12वीं के छात्र ने पुलिस की भर्ती में आवेदन करने की इच्छा जाहिर की। इस बात को किशोर न्याय बोर्ड के न्यायाधीश के समक्ष रखा गया। युवक के पठन-पाठन व बेहतर आचरण को देखते हुए उसे पुलिस भर्ती का आवदेन करने की अनुमति दी गई है। जिससे उक्त युवक का उत्साह, दोगुना बढ़ गया है।
जेल व संप्रेक्षण गृह का दूसरा नाम सुधार गृह भी है। इस बात को ये घटना प्रमाणित कर रही है। रायगढ़ संप्रेक्षण गृह में एक युवक ऐसा भी है। जो गृह के २६ अन्य बच्चों के लिए प्रेरणास्त्रोत बना हुआ है। तमनार क्षेत्र के इस युवक पर करीब आठ माह पहले अपने पिता की हत्या का आरोप लगा था, उस समय ये नाबालिग था। जिसकी वजह से उसके खिलाफ तमनार पुलिस ने हत्या का अपराध दर्ज कर कोर्ट में पेश करने के बाद संप्रेक्षण गृह में रखा गया है।
सुधार गृह के अधिकारियों के अनुसार समय बीतने के साथ किशोर, बालिग हुआ और उसके विचार में भी काफी बदलाव आए। १२वीं पास युवक अब कानून का रक्षक बनाना चाहता है। ऐसे में उसने छत्तीसगढ़ पुलिस की भर्ती में आवेदन करने की अनुमति भी मांगी। जिससे संप्रेक्षण गृह के कर्मचारियों ने मजिस्ट्रेट के समक्ष रखा।
मजिस्ट्रेट ने भी काफी मंथन किया। उसके बाद उक्त युवक के संप्रेक्षण गृह में रहन-सहन का आंकलन, पठन-पाठन व अन्य गतिविधियों को देखते हुए उसे पुलिस की भर्ती में शामिल होने की अनुमति दी गई। जिसके बाद युवक ने पुलिस भर्ती में आवेदन कर दिया है और अब उसकी तैयारियों में जुट गया है। इधर युवक को पुलिस भर्ती में सफलता को लेकर पाठ्य समाग्री भी उपलब्ध कराई जाने की बात कही जा रही है।
अन्य किशोर को पढ़ाई में करता है मदद
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस युवक ने पुलिस भर्ती में खुद की दावेदारी पेश की है। वो संप्रेक्षण गृह में अन्य २६ किशोर के लिए भी प्रेरक भी भूमिका अदा करता है। 12वीं पास उक्त छात्र, संप्रेक्षण गृह में काफी अव्वल भी है। जिसकी वजह से वो अन्य किशोर को पठन-पाठ्न में मदद भी करता है। उसकी इन्हीं सब आदतों को देख उसे पुलिस भर्ती में आवदेन करने की अनुमति दी गई है। संप्रेक्षण गृह के न्यायायिक व प्रशासनिक अधिकारी की इस पहल की सराहना भी की जा रही है।
-सुधार गृह में इस बात का प्रयास होता है कि आरोपी गुनाह के दलदल से बाहर आए और बेहतर इंसान बनकर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो। इस युवक ने भी ऐसा ही किया है, बकायदा न्यायालय ने भी इसे परखा और सही पाया तब जाकर अनुमति दी गई। ये कदम अन्य के लिए प्रेरणा कार्य करेगा- शैलेष आदित्य, परामर्शदाता, संप्रेषण गृह, रायगढ़
Published on:
19 Feb 2018 11:33 am
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