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नेताओं की गिरफ्तारी के बाद अब महिलाओं ने संभाला मोर्चा, उधर जेल में अनशन शुरू

मोर्चा संभाल लिया

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मोर्चा संभाल लिया

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रायगढ़. एनटीपीसी के पुनर्वास नीति को लेकर चल रहे आंदोलन को लेकर नेतृत्व कर रहे लोगों सहित 71 लोगों को जेल दाखिल करने के बाद लारा में महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया है। मंगलवार की रात में पुलिस ने जब महिलाओं को ठेंगापाली चौक में छोड़ा तो उसके पहले से ही क्षेत्र की अन्य महिलाएं एनटीपीसी गेट के सामने प्रदर्शन शुरू कर चुकी थीं।


इस बात की सूचना मिलने के बाद पुलिस की पकड़ से छूटी महिलाएं भी एनटीपीसी गेट के सामने पहुंची और वहां प्रदर्शन में शामिल हो गईं। ग्रामीणों के अनुसार मंगलवार को सुबह से ही एनटपीसी गेट के सामने महिलाएं धरना प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाओं की ओर से एकसूत्रीय मांग की जा रही है कि जिन आंदोलनकारियों को यहां से पुलिस द्वारा उठाया गया है उनको नि:शर्त वापस यहीं छोड़ा जाए। कुल मिलाकर देखा जाए तो एनटीपीसी गेट के पास धीरे-धीरे तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो रही है। ग्रामीण यह भी कह रहे हैं कि जब तक आंदोलनकारियों को छोड़ा नहीं जाता है तब तक महिलाओं का आंदोलन जारी रहेगा। विदित हो कि एनटीपीसी के उक्त प्रभावित किसान पुनर्वास नीति के तहत रोजगार और एनटीपीसी की पुनर्वास नीति को छोड़ छत्तीसगढ़ की आदर्श पुनर्वास नीति लागू करने की मांग को लेकर पिछले लंबे समय से आंदोलन करते आ रहे हैं। ऐसे में मंगलवार से ग्रामीणों की ओर से अनशन की शुरुआत की गई थी।

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नाम पूछकर तैयार किया गया वारंट
प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण बता रहे हैं कि सभी आंदोलनकारियों को बिना वारंट के जेल में दाखिल करने का प्रयास किया जा रहा था। जब जेल प्रशासन ने इससे मना कर दिया तो एसडीएम कार्यालय में हैरान करने वाली स्थिति थी। वहां का बाबू संबंधित लोगों से यह पूछता फिर रहा था कि अपना नाम बताओ वारंट जारी करना है। बाद में एसडीएम के यहां से सभी के नाम से वारंट जारी हुआ और फिर सभी को जेल में दाखिल किया गया। इसके बाद जेल में ही अंादेालनकारियों ने अनशन की शुरुआत कर दी।


ग्रामीण लगा रहे आरोप
वहीं पुलिस पर ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि प्रदर्शन स्थल से महिला व पुरुषों को पुलिस लाइन लाया गया। इसके बाद महिलाओं से यह झूठ बोला गया कि सभी पुरुषों को छोड़ दिया गया है। और फिर ठेंगापाली चौक में बस से उतार दिया गया। जबकि इस दौरान चार से पांच महिलाएं बेहोश हो चुकी थीं, उनकी तबीयत खराब थी। ग्रामीण बता रहे हैं कि पुलिस की ओर से इनको ऐसे ही छोड़ दिया गया बाद में ग्रामीणों की सहायता से पुसौर स्वास्थ्य केंद्र में उनको भर्ती कराया गया है।

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