
रायगढ़. मार्च के बाद से और अप्रैल के प्रथम सप्ताह से ही निजी स्कूलों के किताबों की खरीदी बिक्री संबंधित ठेके के दुकानों पर शुरू हो गई थी। अब तो लगभग सभी किताबें बिक चुकी हैं, ड्रेस अभिभावकों ने खरीद लिया है, एडमिशन भी करवा लिया है। इसके बाद 23 अप्रैल को शिक्षा विभाग की ओर से एक पत्र जारी किया गया है जिसमें शिक्षा के अधिकार के नियमों का हवाला देकर स्कूलों को खासकर निजी स्कूलों को सख्त हिदायत दी गई है। जबकि अप्रैल के प्रथम सप्ताह से ही लगातार किताब बिक्री में मनमानी, फीस वृद्धि को लेकर लोग आवाज उठाते रहे पर कोई कार्रवाई उस दौरान नहीं की गई।
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अब निजी स्कूलों में एक माह का क्लास भी पूर्ण हो चुका है ऐसे में बिना किताब, ड्रेस और एडमिशन के बच्चे तो क्लास करेंगे नहीं इन हालात में जब सबकुछ हो गया तो शिक्षा विभाग की आंख खुली है। 23 अप्रैल को जारी आदेश में जिला शिक्षाधिकारी ने कहा है कि सभी अशासकीय विद्यालयों में सत्र 2018.19 में लागू गणवेश पर नमूने का प्रदर्शन किया जाए तथा लागू पाठ्य पुस्तक की सूची भी सूचना पटल पर अनिवार्य रूप प्रदर्शित किया जाए। सूचना पटल में यह भी प्रदर्शित करे कि गणवेश व पाठ्य पुस्तक खुले बाजार से कहीं से भी क्रय किया जा सकता है। किसी फर्म विशेष को अधिकृत न करें और न ही शाला परिसर में बेचा जाए।
और किस बात का दिया है ज्ञान
जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी आदेश में किताब और ड्रेस के निमयों संबंधी ज्ञान के बाद विद्यालय में ली जाने वाली अधिसूचित फीस मद वार एवं विभागीय मान्यता एवं बोर्ड की सम्बद्वता की प्रति का सूचना पटल पर प्रदर्शन करने को कहा गया है। कहा गया है कि सभी अशासकीय विद्यालयों की प्रबंध समिति में शासकीय प्रतिनिधि का होना अनिवार्य है। जिन विद्यालयों में पूर्व से ही शासकीय प्रतिनिधि नियुक्त है वे यथावत रहेंगे। जहां शासकीय प्रतिनिधि नियुक्त नहीं है उस विद्यालय के नोडल अधिकारी प्राचार्य शासकीय प्रतिनिधि हों। साथ ही सभी अशासकीय विद्यालय आरटीई पोर्टल पर ऑनलाईन रजिस्ट्रशन कराना सुनिश्चित करें।
क्यों उठ रहा है सवाल
अप्रैल के प्रथम सप्ताह से ही शहर में लगातार निजी स्कूलों की ओर से तय किए गए ठेके की दुकानों के मनमानी के खिलाफ आवाज उठाई जाती रही है। यहां तक कि शहर के संत माइकल स्कूल में तो किताब दुकान ही खोल दिया गयाए इसके अलावा शहर के शालिनी स्कूल में किस कंपनी का जूता पहनना है ये भी तय कर दिया गयाए पर उस समय न तो शिक्षा विभाग ने कोई कार्रवाई की और न ही किसी प्रकार का गाइडलाइन जारी किया। जब अभिभावकों ने ड्रेसए किताब खरीद ली और एडमिशन करवा लिया तब यह आदेश जारी किया गया है।
निभा रहे रस्म
शिक्षा के अधिकार के तहत किसी प्रकार की मनमानी पर कंट्रोल का अधिकार शिक्षा विभाग का होता है ऐसे में जब मनमानी की जा रही थी तो कोई कार्रवाई नहीं की गई, न ही किसी प्रकार की सक्रियता दिखाई गई। अंत में इस प्रकार का आदेश जारी कर ये स्थापित करने का रस्म निभाया जा रहा है कि हमने इसके लिए गाइडलाइन जारी किया है। ऐसे में निजी स्कूलों और शिक्षा विभाग के बीच के मधुर संबंधों की पुष्टि हो रही है।
Published on:
24 Apr 2018 12:43 pm
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