
रायगढ़. जिले के पुसौर क्षेत्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी आंखे दान कर दी थी। ऐसे में उनके निधन के बाद उनकी आंखों को आईबैंक में ले लिया गया है। विदित हो कि इसी ब्लाक के लिंजिर ग्राम के त्रिपति प्रधान ने मृत्यु भोज का विरोध करते हुए अपने देह को दान करने का फैसला किया था, ऐसे में कुछ पहले उनकी भी मृत्यु हो गई इसके बाद उनके शरीर को उनके परिजन मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर आए और सुपुर्द कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार पुसौर ब्लाक के नागरिक डॉ. भीमसेन के ज्येष्ठ पुत्र व्यवसायी व सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश अग्रवाल का आकस्मिक निधन हो गया। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि स्वर्गीय कैलाश अग्रवाल अंचल में सदैव समाजिक योगदानों में सक्रिय रहते थे। उनकी सामाजिक उपस्थिति व योगदान को लोगों ने सदैव सहर्ष स्वीकार भी किया। स्वर्गीय कैलाश अग्रवाल क्षेत्र में सोने चांदी के ज्वेलर्स और किराना का व्यवसाय करते थे। जाते-जाते स्वर्गीय कैलाश अग्रवाल द्वारा अपने नेत्रों का दान कर 2 नेत्रहीनों के लिए दुनिया देखने का मार्ग बना गए।
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स्वर्गीय अग्रवाल अब दो लोगो के नेत्रों के माध्यम से इस दुनिया मे सदैव जीवित रहेंगे। मृत्यु पूर्व भी सदा मरणोपरांत घर मे नेत्रदान की हमेशा बात करने वाले कैलाश अग्रवाल के परिवारजनों ने मृत्यपश्चात नेत्रदान के लिए कार्य करने वाली सामाजसेवी संस्था से संपर्क कर उनकी इच्छा जताई थी। ऐसे में उनके निधन के पश्चात डाक्टरों की एक टीम वहां पहुंची और नेत्रों को सफलतापूर्वक निकाल कर आई बैंक सिम्स बिलासपुर भेज दिया गया। डॉक्टरों की टीम में डॉ. प्रभात पटेल, डॉ. एनके पाणिकर, डॉ. रामेश्वर पटेल पुसौर एवं दिनेश देवांगन शामिल रहे।
इन्होंने भी कायम किया मिसाल
ज्ञातव्य हो कि कुछ दिन पूर्व ही पुसौर ब्लाक के लिंजिर निवासी 77 वर्षीय त्रिपति प्रधान द्वारा मृत्युपश्चात अपने शरीर का दान कर पूरे क्षेत्र में मिसाल कायम किया था। समाजिक बुराइयों के लिए सदैव लडऩे वाले त्रिपति प्रधान के देहदान पश्चात अब स्वर्गीय कैलाश अग्रवाल द्वारा नेत्रदान से पूरे अंचल में नेत्रदान व देहदान के लिए लोगों में जागरूकता फैलेगी और लोगों में देहदान व नेत्रदान के लिए जो सामाजिक कुरीतियों का प्रचार है वह कम होगा।
Published on:
24 Apr 2018 01:00 pm
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