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बाढ़ में फंस जाएं तो क्या करें जानिए यहां, प्रशासन ने मॉकड्रिल करके लोगों समझाया

बाढ़ आपदा राहत के लिए कंट्रोल रूम की स्थापना कलक्टोरेट में
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रायगढ़

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Shiv Singh

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Updated: 18 Jul 2018, 5:19 PM IST

बाढ़ आपदा राहत के लिए कंट्रोल रूम की स्थापना कलक्टोरेट में

बाढ़ आपदा राहत के लिए कंट्रोल रूम की स्थापना कलक्टोरेट में

रायगढ़. जून से जहां जिला प्रशासन ने बाढ़ आपदा राहत के लिए कंट्रोल रूम की स्थापना कलक्टोरेट में कर दी है वहीं मंगलवार को बचाव की तैयारी के लिए नगर सेना व जिला प्रशासन ने केलो डेम मेें उपलब्ध संसाधनों के साथ मॉक ड्रिल किया। सोमवार को केलो डेम में दिन के ११ बजे इसका आयोजन किया गया।

इसमें पहले नगर सेना के जवानों को को डेम में अंदर पेड़ व अन्य स्थानों में छोड़ कर यह बताया गया कि बाढ़ में किस तरह से लोग चारों ओर से फंस जाते हैं, इन हालात में इन्हें कैसे बचाया जाए इसकी जानकारी दी गई है।


जवानों को बताया गया कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर उनको बचाकर बाहर लाया जाना चाहिए। मॉक ड्रिल के दौरान उपस्थित प्रशासनिक अधिकारी डिप्टी कलक्टर निशा नेताम, तहसीलदार अंवती गुप्ता, एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों को उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर नगर सेना के जवानों ने दिखाया। साथ ही यह बताया कि किस तरह से बाढ़ आने की स्थिति में इसका उपयोग करेंगे और बाढ़ में फंसे लोगों को कैसे बचाएंगे।

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कंबल का स्ट्रेचर
जहां शिविर आयोजित किया जाता है वहां पर स्ट्रेचर की कमी पड़ती है ऐसी स्थिति में कंबल को दो लकड़ी से बांधर स्ट्रेचर बनाया गया और डेम में डूब रहे लोगों को बचाकर इसी स्ट्रेचर के सहारे शिविर स्थल जहां उपचार की व्यवस्था थी वहां लाते हुए दिखाया गया।


ये क्षेत्र हैं प्रभावित
जिला प्रशासन ने सारंगढ़ विकासखंड के १७ ग्राम भदरा,जशपुर,घोठला बड़े,सिंघनपुर,गंतुली बड़े,छतौना,पासीदा, बरभांठा,छर्रा, मल्दा, जसरा,हिच्छा, दहिदा,,धुता, टिमरलगा,नावापारा,तिलाईमुड़ा,बरमकेला क्षेत्र के २७ ग्राम विश्वासपुर,रतनपाली,रानीडीह, मानिकपुर,बुदबुदा, कोर्रा,पोरथ, बिलाईगढ़ सहित अन्य गांव को चिन्हांकित किया गया है। इसके अलावा पुसौर और सरिया क्षेत्र के भी आधा दर्जन से अधिक ग्राम है जहां हर वर्ष बाढ़ आता है।


संसाधन न हो तो इसका करें उपयोग
बाढ़ आपदा के दौरान अगर रेस्क्यू टीम पहुंचने में देरी हो रही है या फिर अन्य कोई संसाधन बचाव के लिए नहंी है तो सामान्य रूप से मिलने वाले पानी की आठ से दस खाली बोतल को अच्छे से बंद कर रस्सी से बांध दें और इसे अपने सीने में बांध दे। ऐसा करने पर प्रभावित व्यक्ति पानी में डूबेगा नहीं। इसके अलावा टीन के डिब्बे को भी सील पैक कर उसे राहत कार्य में उपयोग करने के बारे में बताया गया ताकि आपात काल में आप सुरक्षित रहें।