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VIDEO- मांगे पूरी होने पर आंबा कार्यकर्ता व सहायिकाओं ने निकाला विजय जुलूस, खूब उड़े अबीर गुलाल

- राजधानी के बाद रायगढ़ में भी दिखी खुशियां, विभाग पहुंच कर लगाए अबीर-गुलाल

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मांगे पूरी होने पर आंबा कार्यकर्ता व सहायिकाओं ने निकाला विजय जुलूस, खूब उड़े अबीर गुलाल

रायगढ़. छत्तीसगढ़ जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका संघ की रायगढ़ शाखा ने शासन द्वारा उनकी मांगों को मानने के बाद जमकर खुशियां मनाई गई। कार्यकर्ता-सहायिका ने एक दूसरे पर अबीर व गुलाल लगा कर अपने उत्साह को जाहिर किया। कुछ कार्यकर्ता संघ के जिंदाबाद के नारे लगाते हुए बैंड-बाजा पर झूमते हुए भी नजर आई।

इस बीच वो महिला बाल विकास विभाग, परियोजना कार्यालय भी पहुंची। जहंा अधिकारी व कर्मचारी केे साथ अपनी खुशियां बांटी। विदित हो कि हड़ताल की अवधि में रायगढ़ की 51 कार्यकर्ता व सहायिका को बर्खास्त कर दिया गया था, जिसमें संघ की अध्यक्ष का नाम भी शामिल है।

५० दिनों की हड़ताल के बाद रायगढ़ की 51 बर्खास्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका की पुन: बहाली का रास्ता साफ होते नजर आ रहा है। संघ की करीब आधा दर्जन मांग में शासन स्तर पर हुए बैठक में चार मांगों पर सहमति बनी है। जिसके बाद संघ के पदाधिकारी व सदस्य, काफी उत्साहित हैंं। राजधानी रायपुर में रविवार को विजय जुलूस निकालने के बाद रायगढ़ में भी सोमवार को कार्यकर्ता व सहायिकाओं ने अबीर व गुलाल की जमकर होली खेली।

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संंघ की अध्यक्ष प्रीति देवांगन की अगुवाई में बर्खास्त कार्यकर्ता व सहायिका सबसे पहले मिनी स्टेडियम में एकत्रित हुए। उसके बाद एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगा कर अपनी खुशियों का इजहार किया। मिनी स्टेडियम के बाद कार्यकर्ता व सहायिकाओं का जत्था, महिला बाल विकास विभाग पहुंंचा। जहां उस रास्ते गुजर रहे एक बैंड पार्टी को रोक कर कार्यकर्ता व सहायिका, करीब 10 मिनट तक झूमते हुए नजर आई। उसके बाद विभागीय अधिकारी व कर्मचारी के बीच पहुंच कर अपनी खुशियों को बांटा। इसके बाद महिलाओं का जत्था परियोजना व अन्य कार्यालय पहुंचे।

पत्रिका से चर्चा के दौरान संघ की अध्यक्ष देवांगन नेे कहा कि यह 50 दिन का संघर्ष, हमारे लिए मील का पत्थर साबित हुआ। यह जीत किसी एक की बदौलत नहीं जीती जा सकती थी। संगठन की एकता व साथियों के हर कदम पर साथ देने के जज्बे की वजह से यह सफलता मिली है।

खुशी इतनी की छालक पड़े आंसू
करीब 50 दिन की हड़ताल व उसमें हुई परेशानी के बीच जब कार्यकर्ता व सहायिका अपनी जीत का जश्र मना रही थी। इस बीच कुछ सदस्यों के आंख से आंसू छालक पड़े। हड़ताल के दिनों में हुई परेशानी के दर्द को वे रोक ना सकीं और रो पड़ीं। इस बीच संंघ के पदाधिकारियों ने इसे एकता की जीत का नाम देते हुए उन्हें गले लगाया।