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World Family Day: छत्तीसगढ़ में कायम है संयुक्त परिवार की परंपरा, चार पीढ़ी के 48 सदस्य का एक किचन में बनता है खाना

World Family Day: परिवार बिना जीवन जीना अंसभव है। एक परिवार ही है, जो समाज से जोड़ता है। आगे बढने की प्रेरणा देता है और बुरे से बुरे समय में साथ खड़ा रहता है। इंसान को जीवन के हरेक मोड़ पर परिवार की जरुरत होती है।

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World Family Day: अब एकल परिवारों का चलन बढ़ रहा है। संयुक्त परिवार ढूंढे से नहीं मिलते। ऐसे में परिवार की अवधारणा बदल रही है। एक साथ खाना खाने से लेकर आपसी सहयोग और सहनशीलता के लिए परिवार समाज की नींव होते हैं।

परिवार के बिखरने से तनाव और कई तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में रायगढ़ जिला के लैलूंगा विधानसभा के कटकलिया गांव में चक्रधर सिंह सिदार का परिवार संयुक्त परिवार की मिसाल है। यहां चार पीढ़ियां साथ रह रही हैं। परिवार में 48 सदस्य हैं, जिनका भोजन एक साथ बनता है। बच्चों को परदादी,दादा-दादी, पापा-मम्मी, चाचा-चाची का प्यार मिल रहा है।

पूर्व विधायक चक्रधर सिंह ने बताया कि वे 8 भाइयों में सबसे बड़े हैं। वे शुरू से ही राजनीति में सक्रिय रहे। इसके अलावा परिवार के 9 सदस्य सरकारी सेवा में हैं। उनके पास करीब पौने चार सौ एकड़ जमीन है, जिसमें वे धान सहित सब्जी की खेती करते हैं। खेती ऐसी होती है कि चावल, दाल और सब्जी बाहर से नहीं खरीदनी पड़ती...

World Family Day: खपरैल के मकान में निवास

यह परिवार संपन्न है, लेकिन आज भी उनके मकान का अधिकांश हिस्सा खपरैल युक्त है। वहीं इस परिवार का मुख्य कार्य खेती किसानी के अलावा पशु पालन भी है। इन्होंने घर में भैस पालन किया है। यहीं वजह है कि दूध दही, घी घर का बना ही उपयोग करते हैं।

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एक बार में लगता है 7 से 8 किलो चावल

सभी का भोजन एक ही चूल्हे पर पकता है। भोजन पकाने का कार्य घर की महिलाएं करती हैं। एक बार में करीब 7 से 8 किलो का चावल पकता है। हालांकि ऐसा भी होता है किसी को अपने काम के लिए जल्दी जाना होता है तो उसके सुबह का नाश्ता भी अलग से बन जाता है।

परमानेंट बना दिया शादी का मंडप

बड़ा परिवार होने से हर साल से दो साल में किसी न किसी की शादी तय होती है। इसे लेकर शादी का मंडप ही आंगन में परमानेंट बना दिया गया है। आंगन के चारों ओर सीमेंट का पोल लगा दिया गया है। परिवार में जब भी किसी की शादी होती है तो इस पोल के सहारे मंडप सजाते हुए डेकोरेट किया जाता है।